लिविंग रिलेशनशिप

यह मेरी अपनी सोच है। मेरे ख्याल से जिन दो व्यक्तियों को जीवन भर साथ रहना हैं। उसके साथ पहले ही रहकर देख लेने में क्या हर्ज है। कम से कम यह तो पता चल जाएगा कि वे दोनों जीवन भर साथ निभा सकते है या नहीं। बाद में परिवार और समाज आता है।

आज के समय में शादी-व्याह के बाद जो घटनाएं हो रहीं है। उन सब घटनाओं से हम सभी अवगत हैं। उसे नाकारा भी नहीं जा सकता है। चाहे ‘अरेंज मैरिज’ हो या ‘लव मैरिज’ बहुत ही कम लोग सफल हो पा रहें हैं। कहीं लड़कियां जलाई जा रही हैं, तो कहीं लड़के आत्महत्या कर रहे हैं। ये आज के समय की बहुत बड़ी विडम्बना है। सबसे बड़ा कष्ट तो तब शुरू हो जाता है जब इस तरह का केस कोर्ट में पहुंचता है, फिर तो वकीलों की बल्ले-बल्ले हो जाती हैं। पता नही कब तक फैसले आएंगे। फैसले आने में कितना समय लगेगा यह कहना मुश्किल है तब तक दोनों के घरवालें पैसे से भिखारी और लड़का-लड़की बूढ़े हो जाते हैं। सारी जवानी कोर्ट में ही खत्म हो जाती हैं।

आज के समय में भारतीय कानून में भी इस लिविंग रिलेशनशिप को स्वीकृति मिल गई है। अगर युवक-युवती स्वेच्छा से साथ में रहते हों तो यह गैर कानूनी नहीं है। लेकिन सुप्रिम कोर्ट के आदेशानुसार इस रिश्ते को कानूनी तौर पर लिव इन रिलेशनशिप माने जाने के लिए चार शर्तों को सिद्ध करना आवश्यक होगा।

पहला- इस तरह के रिलेशनशिप में पति-पत्नी की तरह ही रहना होगा।

दूसरा- दोनों का उम्र कानूनी रूप से सही होना चाहिए।

तीसरा – दोनों को अविवाहित होना चाहिए।

चौथा- इस रिलेशनशिप में लम्बी अवधि तक रहना होगा।

लिविंग रिलेशनशिप आज के समय में यह संबंध तेजी से बढ़ रहा है। एक समय था जब ऐसे संबंधों पर लोग खुलकर बात करना पसंद नहीं करते थे। लेकिन आज लोग खुलकर इस लिविंग रिलेशनशिप पर बातें करते हैं। लिविंग रिलेशनशिप के जहां कुछ फायदे हैं वही इसके कुछ नुकसान भी हैं। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं ‘नकारात्मक’ और ‘सकारात्मक’। इस रिश्तें में भी कुछ ऐसा ही है।

  1. लिविंग रिलेशनशिप में रहने से दोनों को एक दूसरे को समझने, जानने और परखने का पूरा समय मिलता है।
  2. इस रिश्ते के अन्तर्गत आर्थिक रूप से किसी को किसी पर बोझ बनने की जरूरत नहीं है। इसमें अपनी मर्जी से एक दूसरे के उपर पैसा खर्च करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
  3. इस रिश्ते में पारिवारिक और सामाजिक नियम लागू नहीं होता है। इसके अन्तर्गत ही सारा खेल शुरू होता है। लड़कियां सिर्फ पति के साथ रहना चाहती है।
  4. इस रिश्ते के अन्तर्गत किसी भी विषय पर जवाबदेही नहीं होती है
  5. कानूनी मान्यताओं में फसने के मुक्त रहते हैं। जो जीवन का सबसे दुखदाई पहलू है।
  6. एक दूसरे को सम्मान देते हैं। इस रिश्ते से निकलने की पूरी आजादी होती है।अंत मैं यह कहना चाहूंगी कि आज हमारे देश में शादी-ब्याह से संबंधित जितनी घटनाएं घट रही है , उतनी ही वृद्धा आश्रम भी खुल रहे। आखिर इसका कारण करता है। इससे संबंधित एक छोटी सी कहानी है। आज से सात वर्ष पहले की बात है। मेरे पड़ोस में एक बहुत ही सभ्य परिवार रहते थे। उनके दो बच्चे थे दोनों बेटा। अपने बच्चों को उन्होंने बहुत ही दुःख तकलीफ करके अच्छी शिक्षा दिया था। बच्चे दोनों बड़े होकर अच्छी नौकरी करने लगे थे। मां-बाप और बच्चों ने मिलकर कई सपने देखे थे। जिसे पूरा करना था। इसी बीच बड़े बेटे की शादी के लिए रिश्ते आने लगे थे। रिश्ते तो बहुत आए थे। लेकिन लड़का ने जिसे पसंद किया मां-बाप ने उसी से शादी कर दिया। जबकि लड़का के छोटा भाई और मां को यह रिश्ता पसंद नहीं था। शादी के दिन भी लड़की वालों ने बहुत ड्रामा किया था। शादी के बाद लड़के वालों के घर में कोई भी खुश नहीं था। मुझे तो उन सबको देखकर बहुत दुख होता। लड़की सिर्फ अपने पति के सिवा किसी को देखना तक पसंद नहीं करती थी। सारे घरवालें बुरी तरह से परेशान थे। जबकि लड़के वालों ने लड़की वालों से कुछ डिमांड भी नहीं किया था, और उनलोगों ने कुछ दिया भी नहीं। ऐसा नही कि वे गरीब थे। कुछ लोगों के पास दिल नहीं होता है तो कुछ के पास लक्ष्मी नहीं होती है। सात आठ साल शादी को हो गया अभी तक बच्चा नही हुआ पूछने कर कहती हैं मुझे बच्चा नही चाहिए। खैर समय किसी के लिए रुकता नहीं है। और समय सबकुछ सीखा भी देता है। अब छोटा बेटा भी अच्छी नौकरी कर रहा है। और विवाह के योग्य हो गया है। एक दिन मैं उनसे पूछी, “मैडम छोटे वाले बेटे का शादी करिए।” उन्होंने कहा, “मैं एक दिन उससे (बेटे) से पूछी तुम्हारे लिए रिश्ते आ रहें हैं क्या करूं? उसने कहा एक बेटे का शादी करके आप कितनी सुखी है? यह आपको पता है न। मुझे शादी के नाम से डर लगता है, “मां” अभी मैं दो तीन साल शादी नहीं करूंगा। मेरे कई दोस्तों की शादी हुई है अभी तक एक ने भी नहीं कहा कि हम खुश हैं। दो वर्ष के बाद उनके बेटे ने बताया कि एक लड़की उनके बेटे को बहुत पसंद करती है। लड़की यूरोपीयन है। फिर उनके बेटे ने कहां मां हम दोनों साथ रहना चाहते है। एक दूसरे को समझने, देखने और परखने के लिए, कि भविष्य में कोई शिकवा, शिकायत न हो। आपका क्या विचार है। पापा तो कभी तैयार नहीं होंगे। मैडम ने हां कर दिया। बेटे ने कहां पापा तो अच्छा नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा मैं समय के अनुसार पापा को समझने कि कोशिश करूंगी। वो भी मान जाएंगे। धीरे-धीरे सब कुछ अच्छा हो गया। अभी भाई साहब और मैडम दोनों खुश हैं। पिछले साल उनका बेटा उस यूरोपीयन लड़की को साथ लेकर आया था। उस लड़की ने मैडम और भाई साहब का बहुत ख्याल रखा और आदर भी करती थी। एक सप्ताह साथ में रही। मैडम बता रही थी, कि वह बहुत अच्छी है। उस लड़की ने कहा आपलोग भी वहां हमारे पास आइए। मैडम और भाई साहब भी वहां जाकर 25 दिनों तक उसके साथ में रहें। उन्होंने कहा उस यूरोपीयन लड़की ने हमारी बहुत इज्जत किया। रोज कहीं न कहीं घूमने का प्रोग्राम बनाती और घूमाती थी। जब उसके पास समय होता था तो साथ में भी जाती थी। समय नहीं होता था, तब सारा रुल रेगूलेशन समझा कर कैब कर देती थी। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। अतः हमें भी समय के अनुसार परिवर्तित हो जाना चाहिए। यह समय की मांग है।

4 thoughts on “लिविंग रिलेशनशिप”

  1. इंदु सिंह जी, आपका आलेख पढ़ा : लिविंग रिलेशनशिप पर | अच्छा  और बहुत सामयिक है |  मैं रूढ़िवादी नहीं हूँ पर फिर भी शायद अपने संस्कारों के कारण मैं इसका पक्षधर तो नहीं हो पा रहा हूँ | पर स्वीकारता हूँ कि धीरे धीरे यह समय की माँग हो चुकी है |  यह एक विस्तृत चर्चा का विषय है और एक छोटे ब्लॉग में हो पाना संभव नहीं है |  पर आपका आर्टिकल कई लोगों के लिये food फॉर thought जरूर बनेगा |  इसके विपक्ष में भी बहुत कुछ कहा जा सकता है पर यह जगह नहीं है उस चर्चा की |  हाँ एक बात जरूर कहना चाहूंगा की आपने जो अपने पड़ोसी की दास्तान लिखी है उसका , मुझे लगता है की लिविंग रिलेशनशिप से उसका कोइ नाता नहीं है |  बिना लिविंग रिलेशनशिप के भी इस संस्कार की बहुएँ आती हैं घरों में | 
      पर आपका आर्टिकल कई लोगों के लिये food फॉर thought जरूर बनेगा |  विश्वास है आगे भी इसी तरह के सामयिक आलेख पढ़ने को मिलेंगे आपके ब्लॉग पर |  

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    1. नमस्कार Ravnrda Kumar ji पहले तो आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। पहले मैं भी इस रिलेशनशिप के पक्षधर नहीं थी
      लेकिन आज के समय में जो हो रहा है उसे देख कर सोचना आवश्यक हो गया है। आज कई घर बर्बाद हो रहें हैं, और दोषी मां बाप को ठहराया जाता है। कई मां बाप बेकसूर जेल में भी भी हैं। सर सच में हर किस्से को दो पहलू होते हैं। लेकिन क्या किया जाए कहीं न कहीं समझौता तो करना ही होगा। धन्यवाद

      Liked by 1 person

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