सुंदर विचार

रूपवाद (Formalism)

प्रथम विश्वयुद्ध के समय रूस में रूपवाद का आरंभ हुआ। इसलिए इसे रुसी रुपवाद भी कहा जाता है।   रुपवाद के मुख्य दो केंद्र थे-       पहला- मॉस्को - मॉस्को में इसकी शुरुआत 1915 ई. में हुई       दूसरा- सेंट पीटर्सबर्ग - सेंट पीटर्सबर्ग में इसकी शुरुआत 1916 ई. से मानी जाती है। सोवियत संघ के गठन के पश्चात् रूपवादियों का… Continue reading रूपवाद (Formalism)

फैंटेसी (Fantasy)

काव्यशास्त्र में 'फैंटेसी' शब्द यूनानी भाषा के 'फैंटेसिया' से बना है, जिसका अर्थ होता है- कोरी कल्पना, तृष्णा, कपोल कल्पना, भ्रम, दिवास्वपन आदि। फैंटेसी की परिभाषाएँ-       मानविकी कोश के अनुसार - "फैंटेसी स्वप्न चित्र मूलक साहित्य है, जिसमे असंभाव्य संभावनाओं का प्राथमिकता दी जाती है।"       फ्रायड के अनुसार - "काव्य में शब्द बद्ध… Continue reading फैंटेसी (Fantasy)

बिंब (Image)

'बिंब' वह शब्दचित्र है जो कल्पना द्वारा ऐन्द्रिक (इन्द्रियों से संबंधित) अनुभवों के आधार पर निर्मित होता है।       विश्वकोष के अनुसार - "बिंब चेतन स्मृतियाँ हैं, जो मौलिक उत्तेजना के अभाव में उस विचार को संपूर्ण या आंशिक रूप से प्रस्तुत करती है।"       'बिंब' अंग्रेजी के 'Image' इमेज शब्द का हिंदी रूपांतरण है।… Continue reading बिंब (Image)

कल्पना (Imagination)

'कल्पना' 'Imagination' शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के 'इमाजीनाटीओ' शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है 'कल्पना'।       > 'संभाव्य (जिसकी होने की संभावना हो) के विषय में सोचना' 'कल्पना' होता है। पाश्चात्य काव्य शास्त्र में 'कल्पना' का वही स्थान है, जो भारतीय काव्य शास्त्र में 'प्रतिभा' का स्थान है।       > प्लेटो ने… Continue reading कल्पना (Imagination)

मिथक (myth)

मिथक का अर्थ - मिथक शब्द अंग्रेजी भाषा के 'मिथ' (myth) शब्द का हिंदी रूपांतरण या पर्यायवाची शब्द है। मूलतः इस शब्द की उत्पत्ति यूनानी भाषा के 'माइथॉस', लैटिन के भाषा के 'मिथस' और जर्मन भाषा के 'मिथोस' से हुई है, जिसका अर्थ होता है मौखिक या काल्पनिक कथा। मिथक की परिभाषाएँ- (पाश्चात्य विद्वानों के… Continue reading मिथक (myth)

आई. ए. रिचर्ड्स: मूल्य सिद्धांत, संप्रेषण सिद्धांत तथा काव्य भाषासिद्धांत

आई.ए. रिचर्ड्स - समय - (1893- 1979 ई.) पूरानाम - इवोर आर्मस्ट्रांग रिचर्ड्स है। ये 20वीं सदी के 'मूल्यवादी' समीक्षक है।    जन्म - 26 जनवरी, (1893 ई.) इंग्लैंड के 'चेशायर' शहर में हुआ था। वे 'अर्थशास्त्र' एवं 'मनोविज्ञान' के विद्यार्थी थे।        > हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर रहे। वहीं से इन्होंने डी. लिट् की उपाधि प्राप्त की।       > उनका रचनाकाल सन्… Continue reading आई. ए. रिचर्ड्स: मूल्य सिद्धांत, संप्रेषण सिद्धांत तथा काव्य भाषासिद्धांत

टी. एस. इलियट निर्वैक्तिकता एवं परंपरा की अवधारणा

नाम - टी. एस. इलियट पूरानाम - थॉमस / टॉमस सतरं इलियट जन्म - 1888 ई. सेंत लुईस (अमेरिका), 1927 ई. में ब्रिटिस नागरिकता प्राप्त निधन - 1965 ई. लंदन में हुआ टी. एस. इलियट - दर्शनशास्त्री, निबंधकार, नाटककार, आलोचक, कवि थे। इन्हें आधुनिक आलोचक का 'मसीहा' भी कहा जाता है। इन्हें 'द वेस्ट लैंड'… Continue reading टी. एस. इलियट निर्वैक्तिकता एवं परंपरा की अवधारणा

वर्ड्सवर्थ का काव्य भाषा सिद्धांत

विलियन वर्ड्सवर्थ       जन्म - 7 अप्रैल 1770 ई. में इंग्लैंड में हुआ था।       निधन -  23 अप्रैल 1850 ई. को हुआ था।       वर्ड्सवर्थ को कवि के रूप में विशेष ख्याति मिली। उन्हें 'रोमानी काव्यायुग' का प्रवर्तक कहा गया। लगभग 20 वर्ष कि अवस्था में ही उन्होंने साहित्य लिखना आरंभ कर दिया था।… Continue reading वर्ड्सवर्थ का काव्य भाषा सिद्धांत

काव्य के लक्षण

काव्य - कवि के द्वारा जो कार्य संपन्न हो उसे 'काव्य' कहते हैं।       लक्षण- किसी वस्तु अथवा विषय के 'असाधारण' अथार्त 'विशेष धर्म' के विषय में कथन करना उसका 'लक्षण' कहलाता है।       काव्य शब्द की व्युत्पत्ति - 'काव्य' शब्द 'कवि' में 'य' प्रत्यय के योग से बना है, जिसका अर्थ होता है, कवि… Continue reading काव्य के लक्षण

अरस्तू: त्रासदी सिद्धांत

त्रासदी का अर्थ: 'त्रासदी' अंग्रेजी के 'ट्रेजडी' शब्द का हिंदी रूपांतरण है। इसका आशय है- दुखांतक या दुःखपूर्ण रचना अथार्त जिस रचना का अंत दुःखपूर्ण हो। अरस्तू ने 'पेरिपोइतिकेस' (पायटिक्स) के 6 से 19 वें तक के अध्यायों में त्रासदी की विस्तार से विवेचन किया है। (विशेषतः 11वें अध्याय में है।) त्रासदी की परिभाषाएँ:      … Continue reading अरस्तू: त्रासदी सिद्धांत