सुंदर विचार

अरस्तू: विरेचन (Catharsis) सिद्धांत

विरेचन का अर्थ: यूनानी भाषा के 'कथार्सिस' शब्द के लिए संस्कृत एवं हिंदी में रेचन  / विरेशन शब्द का प्रयोग किया जाता है।       विरेचन का शाब्दिक अर्थ है- 'शुद्धिकरण' अथार्त विचारों का शुद्धिकरण या निष्कासन करना। 'विरेचन' शब्द चिकित्साशास्त्र का शब्द है, जिसका अरस्तू ने काव्यशास्त्र में लाक्षणिक प्रयोग किया है।       'विरेचन' भारतीय… Continue reading अरस्तू: विरेचन (Catharsis) सिद्धांत

कॉलरिज: कल्पना और फैंटेसी

कॉलरिज - समय: (1772 - 1834 ई.)       जन्म - (1772 ई.), लंदन,       पूरानाम - सैमुअल टेलर कॉलरिज, ये आत्मदार्शनिक थे।       निधन - 1834 ई.       वर्ड्सवर्थ कॉलरिज के प्रिय मित्र थे। वर्ड्सवर्थ के साथ मिलकर कॉलरिज ने 'रोमांटिसिज्म' का प्रवर्तन किया। कॉलरिज की प्रमुख रचनाएँ: (कॉलरिज का सिद्धांत 'जैववादी' सिद्धांत पर आधारित… Continue reading कॉलरिज: कल्पना और फैंटेसी

साधारणीकरण

प्राचीन भारतीय साहित्य के सन्दर्भ में, साधारणीकरण रस-निष्पत्ति की वह स्थिति है, जिसमें दर्शक या पाठक कोई अभिनय देखकर या काव्य पढ़कर उससे तादात्मय स्थापित करता हुआ उसका पूरा-पूरा रसास्वादन करता है।       यह वह स्थिति होती है जिसमे दर्शक या पाठकों के मन में 'मैं' और 'पर' का भाव दूर हो जाता है और… Continue reading साधारणीकरण

रस निष्पत्ति

'रस निष्पत्ति' का अर्थ है - 'रस अस्वादन' की प्रक्रिया। भरतमुनि ने 'नाट्यशास्त्र' में रसों की संख्या आठ मानी है- श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत। दण्डी ने भी आठ रसों का उल्लेख किया है। भरतमुनि ने 'नाट्यशास्त्र' के 'छठे अध्याय' में रस निष्पत्ति की प्रक्रिया का सूत्र देते हुए कहा है -… Continue reading रस निष्पत्ति

सरस्वती पत्रिका

सरस्वती पत्रिका के संपादक/प्रकाशक - चिंतामणि घोष ने आरंभ करवाया। सरस्वती पत्रिका की स्थापना वर्ष - 1900 ई. सरस्वती पत्रिका के संपादक (मंडल)       1. जनवरी 1900 ई से दिसंबर 1900 ई. तक       सरस्वती पत्रिका के संपादक मंडल में 5 संपादक थे-             जगन्नाथ दास रत्नाकर             किशोरीलाल गोस्वामी              श्यामसुन्दर दास             राधाकृष्ण… Continue reading सरस्वती पत्रिका

खड़ीबोली आन्दोलन

खड़ीबोली आन्दोलन के सन्दर्भ में विशेष तथ्य:       खड़ीबोली पश्चिमी हिंदी के अंतर्गत आती है       19 वीं शताब्दी के पहले ही खड़ी बोली की रचनाएँ मिलना शुरू हो जाती है। इसके बाद  फोर्ट विलियम कॉलेज ने इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।       > 1908 ई. में लल्लूलाल के द्वारा लिखी गई रचना 'प्रेम… Continue reading खड़ीबोली आन्दोलन

नागरी प्रचारिणी सभा, काशी

नागरी प्रचारिणी सभा काशी की स्थापना- 16 जुलाई 1893 ई. को हुई थी।       > इसकी स्थापना वाराणसी 'क्वींस कॉलेज' के, कक्षा 9वीं के तीन विद्यार्थियों-       > रामनारायण मिश्र, श्यामसुंदर दास, शिवकुमार सिंह के द्वारा किया गया।       > इसके प्रथम अध्यक्ष राधाकृष्ण दास थे।       > काशी के सप्तसागर मोहल्ले के घुड़साल में… Continue reading नागरी प्रचारिणी सभा, काशी

फोर्ट विलियम कॉलेज

फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना (Fort William College) की स्थापना 10 जुलाई सन् 1800 ई. को तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली के द्वारा की गई थी। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य था भारत में आने वाले नए ब्रिटिश व्यापारियों, शासकों और कर्मचारियों को भारतीय रहन-सहन, संस्कृति, भाषा, एवं प्रशासनिक ज्ञान से परिचित करवाना तथा सिविल अधिकारियों को भारतीय भाषा,… Continue reading फोर्ट विलियम कॉलेज

स्त्री विमर्श

स्त्री के संदर्भ में किया गया विचार स्त्री विमर्श कहलाता है। हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श अन्य अस्मितामूलक विमर्शों की तरह ही विमर्श रहा है। स्त्री विमर्श को इंग्लिश में 'फेमिनिज्म' कहा गया है।       स्त्री विमर्श के प्रवर्तक फ्रांसीसी लेखिका सिमोन द बिउवार हैं। उन्होंने अपनी रचना 'The second sex' में नारी के विमर्श… Continue reading स्त्री विमर्श

अल्पसंख्यक विमर्श / किन्नर विमर्श  (Third Gender)

व्युत्पत्ति- 'किन्नर' दो शब्दों के योग से बना है 'किम' + 'नर' = किन्नर, जिसका अर्थ होता है, हिजड़ा, नपुंसक ।       > किन्नर विमर्श से तात्पर्य है, किन्नरों के जीवन से संबंधित समस्याओं की चर्चा        करना।       > 2006 ई. में किन्नरों को 'थर्ड जेंडर' का दर्जा दिया गया, साथ ही साहित्यकारों का… Continue reading अल्पसंख्यक विमर्श / किन्नर विमर्श  (Third Gender)