सुंदर विचार

आदिवासी विमर्श

आदिवासी का अर्थ- किसी भी देश के मूल निवासियों को आदिवासी शब्द से संबोधित किया जाता है। 'आदि' का अर्थ 'आरंभ' तथा 'वासी' का अर्थ होता है 'रहने वाला' इस प्रकार आदिवासी शब्द का अर्थ हुआ किसी स्थान पर रहने वाले वहाँ के मूल निवासी। परिभाषाएँ-       रामचंद्र वर्मा के शब्दों में- "वे जातियाँ जो… Continue reading आदिवासी विमर्श

दलित विमर्श

'दलित विमर्श' जाति पर आधारित अस्मिता मूलक विमर्श है। यह एक भारतीय विमर्श है क्योंकि जाति भारतीय समाज की बुनियादी संरचनाओं में से एक है। इस विमर्श ने भारत की अधिकांश भाषाओं में दलित साहित्य को जन्म दिया है। दलित शब्द का अर्थ- दबाया हुआ, रौंदा हुआ, शोषित, दमित आदि। परिभाषाएँ:       हिंदी मानक कोश… Continue reading दलित विमर्श

भारतीय संस्कृति और राष्ट्र

भूमिका- भारतीय संस्कृति प्राचीन एवं गौरवपूर्ण है। विश्व संस्कृति के इतिहास में इसका विशिष्ठ स्थान है। इस संस्कृति को समृद्ध और समुन्नत बनाने में हमारे ऋषियों, मुनियों, साधू-संतों, दार्शनिकों, विचारकों, आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गुरु वेदव्यास, बाल्मीकि, कालिदास, स्वयंभू, पुष्पदंत, संत तुलसीदास, संत कबीर दास, गरुनानक देव, गुरुगोविंद सिंह, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, जयशंकर… Continue reading भारतीय संस्कृति और राष्ट्र

उत्तर आधुनिकतावाद (Post Modernism)

'उत्तर आधुनिकतावाद' अंग्रेजी के 'Post Modernism' शब्द का हिंदी रूपांतरण है। 'पोस्ट' (Post) शब्द का अर्थ 'बाद' में होता है। उत्तर आधुनिकता अपने अर्थ में आधुनिकता की समाप्ति अथवा आधुनिकता के विस्तार की घोषणा का रूप है। उत्तर आधुनिकता को लेकर विद्वानों में मतभेद रहा है। कुछ विद्वान इसे 'आधुनिकता' की समाप्ति तो कुछ विद्वान… Continue reading उत्तर आधुनिकतावाद (Post Modernism)

अस्तित्ववाद (Existentialism)

अस्तित्ववाद का उद्भव :       अस्तित्ववाद का उद्भव प्राचीनकाल में ही हो चूका था। अरस्तु, एक्वीनास तथा नीत्से में इस चिंतन को देखा जा सकता है। आधुनिक काल में इसकी शुरुआत 1813 ई. में डेनमार्क निवासी 'सोरेन कीर्के गार्द' द्वारा किया गया इसलिए कीर्के गार्द को अस्तित्ववाद का जनक माना जाता है।         अस्तित्ववाद-… Continue reading अस्तित्ववाद (Existentialism)

मार्क्सवाद

मार्क्सवाद - अर्थशास्त्र और राजनीति से संबंधित जर्मन विचारक कार्लमार्क्स के विचारों को सामूहिक रूप से मार्क्सवाद के रुप में जाना जाता है। मार्क्सवादी विचारधारा के जनक कार्लमार्क्स थे। कार्लमार्क्स का परिचय:       जन्म- 5 मई 1818 ई. ट्रेवेज नगर, राइनलैंड (जर्मनी) में हुआ था।       निधन- 14 मार्च 1883 ई. को लंदन में हुआ।… Continue reading मार्क्सवाद

समकालीन हिंदी उपन्यासों में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन

भूमिका- भारत विभिन्नताओं में एकता का देश है। सदियों से भारतीय समाज में अनेक वर्ण, जाति, धर्म तथा संप्रदाय के लोग एक साथ मिलकर रहते आये हैं। आदिवासी समुदाय भी अनेक क्रिया-कलापों के साथ संगठित रूप से रहते हैं। आज भी बहुत से आदिवासी जंगलों पहाड़ों और दुर्गम प्रदेशों में रहकर अपना जीवन यापन करते… Continue reading समकालीन हिंदी उपन्यासों में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन

डॉ राम मनोहर लोहिया

लोहिया दर्शन       डॉ राम मनोहर लोहिया विश्व की उन विभूतियों में से थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा में लगा दिया। वे महान राजनीतिक योद्धा, देशभक्त, स्वतंत्र चिंतक तथा निडर नेता थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के साथ-साथ नेपाल और गोवा के स्वतंत्रता संग्राम में भी रूचि दिखाई। जीवन परिचय-       जन्म- 23 मार्च… Continue reading डॉ राम मनोहर लोहिया

डॉ. भीमराव अंबेडकर

अंबेडकर का प्रारंभिक जीवन -       जन्म - 14 अप्रैल, 1891 ई. के इंदौर के पास मऊ छावनी में हुआ था। अंबेडकर अपने माता-पिता की 14 वीं संतान थे। इनका परिवार कबीर पंथ को मनानेवाला मराठी मूल का था।       निधन - 6 दिसंबर, 1956 ई. को हुआ था।       पिता का नाम - रामजी… Continue reading डॉ. भीमराव अंबेडकर

मोहनदास करमचंद गाँधी

गांधीदर्शन गाँधी दर्शन न केवल राजिनीति, नैतिक और धार्मिक है, बल्कि यह पारंपरिक आधुनिक तथा सरल एवं जटिल भी है। यह दर्शन कई पश्चिमी प्रभावों का प्रतिक है। जिसको गाँधी जी ने उजागर किया था। यह दर्शन प्राचीन भारतीय संस्कृति में निहित है तथा सार्वभौमिक नैतिक और धार्मिक सिद्धांतों का पालन करता है।   मोहनदास करमचंद… Continue reading मोहनदास करमचंद गाँधी