सुंदर विचार

संरचनावाद (Structuralism)

मानव विज्ञान की ऐसी पद्धति जो संकेत विज्ञान (संकेतों की एक प्रणाली) और सहजता से परस्पर संबंध भागों की एक ऐसी पद्धति के अनुसार तथ्यों का विश्लेषण करने का प्रयास करती है।       स्वीडन के प्रसिद्ध भाषाविद द 'फर्निनांद सस्यूर' इसके प्रवर्तक माने जाते हैं।       'संरचनावाद' शब्द अंग्रेजी के 'स्ट्रकचरलिज्म' शब्द का हिंदी रूपांतरण… Continue reading संरचनावाद (Structuralism)

विखंडनवाद (Deconstruction)

'विखंडनवाद' के प्रवर्तक 'जॉक देरिदा' थे। जन्म - 1930 ई. में अल्जीरिया के यहूदी परिवार में हुआ था निधन - 2004 ई. * ये हाशिये से वंचित समूह (द्वितीय विश्व युद्ध और यहूदी) की संस्कृति से संबंधित थे। * 19 वर्ष कि अवस्था में वे अध्ययन के लिए फ्रांस चले गए। * 'अल्बैर कामू' और… Continue reading विखंडनवाद (Deconstruction)

क्रोचे का अभिव्यंजना सिद्धांत

बेनदेतो क्रोचे- (आत्मवादी दार्शनिक) जन्म - 1866 ई. इटली निधन - 1952 ई.       बेनदेतो क्रोचे, इटली के प्रसिद्ध दार्शनिक थे। उन्होंने आत्मवादी दर्शन के आधार पर सौंदर्य-सिद्धांत की व्याख्या किया है, जो अभिव्यंजनावाद के (Expressionism) नाम से प्रसिद्ध है।       'अभिव्यंजनावाद' का मूल स्रोत वस्तुतः 'स्वछंदतावाद' की उस प्रवृति में है, जो रुढ़ि परंपरा,… Continue reading क्रोचे का अभिव्यंजना सिद्धांत

लोंजाइनस का उदात्त तत्व

'लोंजाइनस' का यूनानी नाम 'लिगिनुस' है। (उदात्त का अर्थ 'महान' है) समय - ईसा की प्रथम से तृतीय शताब्दी के बीच रचना- पेरिइप्सुस/ पेरिहुप्सुस (यह भाषण शास्त्र से संबंधित रचना है)       * यह यूनानी भाषा में 'पत्रात्मक' शैली में रचित है।       * इस रचना में कुल 44 अध्ययन है।       * अरस्तू के… Continue reading लोंजाइनस का उदात्त तत्व

हिंदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएँ

विश्व की भाषाओँ की संख्या को लेकर विद्वानों के विचार विभक्त है। सामान्यत: इनकी संख्या 2796 से 3000 के बीच मानी जाती है। संसार की सभी भाषाओँ का अध्ययन दो प्रकार के वर्गीकरण के तहत् किया जाता है-       1. अकृतिमूलक वर्गीकरण       2. पारिवारिक वर्गीकरण विश्व में भाषा परिवार की संख्या को लेकर विभिन्न… Continue reading हिंदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएँ

प्रतीक (Symbol)

'प्रतीक' का सामान्य अर्थ 'चिह्न' होता है।       परिभाषा- यही चिह्न जब वस्तु विशेष, भावना विशेष, विचार विशेष या व्यक्ति विशेष का प्रतिनिधित्व करता है तब 'प्रतीक' कहलाता है।       डॉ. भागीरथ के शब्दों में - अपने रूप, गुण, कार्य या विशेषताओं के सादृश्य एवं प्रत्यक्षता के कारण जब कोई वस्तु या कार्य किसी अप्रस्तुत… Continue reading प्रतीक (Symbol)

नयी समीक्षा (New Criticism)

'यूनान' पाश्चात्य काव्यशास्त्र और दर्शन का स्रोत माना जाता है और प्लेटो को पाश्चात्य कव्य शास्त्रीय परंपरा का प्रारंभिक दार्शनिक।       20वीं शताब्दी का सबसे महत्वपूर्ण और समृद्ध आलोचनात्मक आन्दोलन का नाम 'नयी समीक्षा' आन्दोलन है।       आधुनिक काल में इंग्लैंड और अमेरिका में साहित्यिक आलोचना से संबंधित यह सबसे बड़ा आंदोलन था।       इस… Continue reading नयी समीक्षा (New Criticism)

सच्चितानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ : अरे यायावर रहेगा याद

रचना - 'अरे यायावर रहेगा याद' (1953 ई.) रचनाकार - सच्चितानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (1911- 1987 ई.) * अज्ञेय द्वारा रचित ‘अरे यायावर रहेगा याद’ का आरम्भ 'परशुराम' के लेख से होता है। * इसमें 'अज्ञेय' की 'भारतीय' यात्राओं का चित्रण है। * इसमें अज्ञेय ने ब्रह्मपुत्र के मैदानी भाग से लेकर एलोरा की गुफाओं तक की… Continue reading सच्चितानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ : अरे यायावर रहेगा याद

राहुल सांकृत्यायन : मेरी तिब्बत यात्रा

रचना - मेरी तिब्बत यात्रा (1937 ई.) रचनाकार - राहुल सांकृत्यायन (1893-1963 ई.) जन्म - 9 अप्रैल, 1893 ई. निधन - अप्रैल, 1963 ई.       राहुल सांकृत्यायन साधु, बौद्ध भिक्षु, यायावर, इतिहासकार, पुरातत्त्ववेत्ता, नाटककार और कथाकार थे। ये जुझारू स्वतंत्रता-सेनानी, किसान-नेता, जन-जन के प्रिय थे। उनके अनन्य मित्र भदंत आनन्द कौसल्यायन के शब्दों में, ''उन्होंने… Continue reading राहुल सांकृत्यायन : मेरी तिब्बत यात्रा

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ : एक साहित्यिक की डायरी

रचना -'एक साहित्यिक की डायरी' (प्रकाशन - 1964 ई.)  रचनाकार - गजानन माधव 'मुक्तिबोध' (1917 - 1964 ई.)       (प्रथम संस्करण -1964 ई.), द्वितीय संस्करण 2000 ई.) विधा - कथात्मक निबंध संग्रह, यह फैंटेसी, मनोविशलेषण, तर्क आदि विविध शैली में रचित है। 'एक साहित्यिक की डायरी' में संकलित कुल 13 निबंध है:       1. तीसरा… Continue reading गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ : एक साहित्यिक की डायरी