सुंदर विचार

जीने की राह

जिन सपनों में जीना चाहीवे सपने बिखर गएदिल के अरमान अबआंसू बन बह गए। राह कौन सा अपनाऊं?यह सोचकर थक गई।दुनिया की भीड़ देखजीने की राह मिल गई।

समय बलवान है

ऐ वक्त और कितना साधेगा चाहे तू जितना भी साध ले लेकिन याद रखना मैं भी जिद्दी हूं हार नही मानूंगी, कहीं किसी मोड़ पर तुझे बदलने के लिए मजबूर कर दूंगी विश्वास मुझे है तू मेरे साथ होगा। जय हिन्द

कहती हूँ मैं (कविता)

कहती हूँ मैं सबसे, मुझे कोई दुःख नहीं रहती हूँ मैं अकेले, मुझे कोई दुःख नहीं दुःख इतना है कि, बस दुःख पी जाती हूँ फिर भी कहती हूँ कि, मुझे कोई दुःख नहीं । मुस्कुराती हूँ तो अधर, जलने लग जाते हैं   पश्चाताप करती हूँ तो, दिल बैठ जाते है फिर भी कहती… Continue reading कहती हूँ मैं (कविता)

ध्वज वंदना (रामधारी सिंह ‘दिनकर’)

नमस्कार ! सतहत्तरर्वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर आप सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। स्वतंत्र भारत का यह स्वतंत्रता दिवस हम भारतियों को यह याद दिलाता है कि आजादी एक यात्रा है, मंजिल नहीं। राष्ट्र अपनी उपलब्धियों का जायजा लेता है। अतीत के बलिदानों को याद रखना तथा और भी अधिक उर्जावान होकर… Continue reading ध्वज वंदना (रामधारी सिंह ‘दिनकर’)

भारवि (संस्कृत-रचनाकार)

भारवि कालिदास के ही समकालीन थे। भारवि का कीर्ति का आधार-स्तम्भ उनकी एक मात्र रचना ‘किरातार्जुनीयम’ महाकाव्य है। इसकी कथावस्तु महाभारत से ली गई। इसमें अर्जुन तथा ‘किरात’ वेशधारी ‘शिव’ के बीच युद्ध का वर्णन है।   भारवि (मूलनाम- दामोदर) समय- 560 ई. लगभग, रचनाकाल- 580 ई. के लगभग। (छठी शताब्दी का उत्तरार्द्ध या सातवीं शताब्दी… Continue reading भारवि (संस्कृत-रचनाकार)