‘पाश्चात्य’ साहित्यशास्त्र की परंपरा अत्यंत प्राचीन व समृद्ध रही है। पाश्चात्य साहित्य का प्रारंभ ईसा की पाँचवीं शताब्दी पूर्व सुप्रसिद्ध यूनानी चिंतक प्लेटो से माना जाता है। प्लेटो से पहले वहाँ अनेक चिंतकों और दार्शनिकों का अविर्भाव हो चुका था। प्राचीन ग्रीक साहित्य चिंतन का प्रादुर्भाव नाटकों के संदर्भ में हुआ था। प्राचीन ग्रीस में ‘नाटकों’ का विशेष महत्व था। इन नाटकों का धार्मिक-उत्सवों से घनिष्ट संबंध था। इसी कारण कुछ विद्वानों ने अरस्तू के ‘विरेचन’ सिद्धांत की व्याख्या धार्मिक आधार पर किया है।
पाश्चात्य काव्यशास्त्र का शाब्दिक अर्थ है – पश्चिमी देशों का काव्यशास्त्र।
पाश्चत्य काव्यशास्त्र में – प्लेटो, अरस्तू, लोंजाइनस ये तीनों ‘यूनान’ से थे।
वर्ड्सवर्थ, कॉलरिज, रिचर्ड्स ये तीनों ‘इंग्लैंड’ से थे।
क्रोचे- ‘इटली’ से और टी. एस. इलियट ‘अमेरिका’ से थे।
प्लेटो से पूर्व तीन सिद्धांत प्रचलन में था:
1. प्रेरणा का सिद्धांत
2. अनुकरण का सिद्धांत
3. विरेचन का सिद्धांत
प्लेटो के काव्य सिद्धांत:
जन्म– 427/ 428 ई.पू. एथेंस, यूनान में हुआ था। (प्लेटो को आदर्शवाद का जनक कहा जाता है)
निधन– 347 ई.पू.
मूलनाम– अरिस्तोकलीस और सुकरात के द्वारा दिया गया नाम – प्लातोन था
प्लेटो ‘सुकरात’ के मेधावी छात्र थे।
पिता का नाम – अरिस्टटोन
माता का नाम – पेरिक्टोन था
अंग्रेजी में इनका नाम – प्लेटो था
प्लेटो को भारत में ‘अफलातून’ कहा गया है’।
प्लेटो संस्कार और स्वभाव से ‘कवि’ तथा शिक्षा और परिस्थिति से ‘दार्शनिक’ थे। वे सत्य के उपासक और तर्क का हिमायती थे। वास्तविकता यह है कि प्लेटो ने ‘सुकरात’ के विचारों को ‘संवाद शैली’ में लिपिबद्ध किया। मूलतः प्लेटो का लक्ष्य ‘काव्य सिद्धांत’ का सृजन करना नहीं बल्कि ‘आदर्श गणराज्य’ की स्थापना करना था।
प्लेटो की प्रमुख रचनाएँ:
प्लेटो के कुल 36 ग्रंथों का जिक्र मिलता है, जिनमे 23 संवाद और 13 आलेख पत्र के रूप में हैं। इओन (काव्य), क्रेटिलुस, प्रोटोगोरस, गोर्गियास, सिम्पोजियम, रिपब्लिक (काव्य), फ्रेदुस, फिलेबुस, द लॉज, दि रिपब्लिक (पोलिटिया, गणतंत्र), दि स्टेट्समैन, दि लॉज (नोमोइ), सिम्पोजियम और इयोन इनके प्रमुख ग्रन्थ है।
1. ‘दि रिपब्लिक’ (आदर्श गणराज्य संबंधी)-
> रिपब्लिक ग्रंथ राजनीति चिंतन और आदर्श राज्य का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
> यह कविता और नाटकीय शैली में लिखी गई है।
> प्लेटो ने ‘रिपब्लिक’ में लिखा है कि, “दासता मृत्यु से भी भयावह है।”
2. ‘दि स्टेट्समैन’ (आदर्श राजनेता संबंध)
3. ‘दि लॉज’ (विधि संबंधी)
उपर्युक्त ग्रंथों में उन्होंने पाँच दार्शनिक विषयों का निरूपण किया है–
i. आदर्श राज्य ii. आत्मा की अमरत्व iii. प्रत्यय सिद्धांत iv. सृष्टि का शास्त्र v. ज्ञान मीमांसा
प्लेटो के काव्य सिद्धांत:
प्लेटो ने काव्य के दो सिद्धांत दिए – (i) काव्य की उत्पत्ति का सिद्धांत (ii) अनुकरण सिद्धांत
(i) काव्य की उत्पत्ति का सिद्धांत (दैवीय प्रेरणा का सिद्धांत)
“काव्य सृजन एक प्रकार से ईश्वरी उन्माद का परिणाम है।” – प्लेटो
(ii) कवि की काव्य चेतना एक बाँसुरी है, जिसमे स्वर फूँकने का काम ईश्वर करता है। अथवा काव्य एक वीणा है जिसके तार ईश्वर के स्पर्श से झंकृत हो उठते हैं। कवि केवल माध्यम है वास्तविक रचयिता ईश्वर है।” – प्लेटो
प्लेटो ने काव्य को नैतिकता वाद एवं उपयोगिता वादी दृष्टि से देखा है, उनके अनुसार काव्य ग्राह्य है जो मनुष्य में नैतिकता का संचार करे और उसे आदर्श नागरिक बनाए।
प्लेटो ने काव्य और कवि पर तीन गंभीर आरोप लगाए हैं–
1. काव्य अनुकृति की अनुकृति है।
2. कवि स्वयं अज्ञानी होने के साथ-साथ अज्ञानता का प्रसारक है।
3. कवि समाज में अनाचार का पोषण करनेवाला अपराधी है।
प्लेटो के अनुसार काव्य के तीन (3) भेद हैं:
1. अनुकरणात्मक काव्य (प्रहसन और दु:खांत नाटक)
अनुकरणात्मक काव्य के दो भेद है- प्रहसन (व्यंग्य / हास्य), दुखांत
2. वर्णात्मक/ प्रगीत (शब्द, माधुर्य, लय)
वर्णात्मक/ प्रगीत / डिथिरैब के तीन अंग माने है – शब्द, माधुर्य, लय
3. मिश्र (महाकाव्य)
जिसमे कवि कुछ अंश तक अपने माध्यम से और कुछ अंश तक पात्रों के माध्यम से अपनी बात कहता है।
प्लेटो के काव्य सिद्धांत के विशेष तथ्य:
> प्लेटो ने काव्य की देवी को ‘म्युजेज’ कहा है।
> प्लेटो ने ‘त्रासदी’ को दूषित विचारों का पोषण कर व्यक्ति को उन्माद ग्रस्त करनेवाली रचना माना है।
> प्लेटो काव्य को जला देनेवाली बात कहते है।
> प्लेटो ‘मोची’ का महत्व कवि की तुलना में अधिक देता है।
नोट– प्लेटो स्वयं एक कवि थे। उसकी काव्य रचनाएँ ‘ऑकस्फोर्ड बुक ऑफ वर्स’ में संकलित है।
प्लेटो का अनुकरण सिद्धांत:
प्लेटो के अनुसार वस्तु के तीन रूप होते है–
1. आदर्श रूप – ईश्वर बनाता है। (यह सत्य है।)
2. वास्तविक रूप – कारीगर बनाता है। (सत्य से दुगुना दूर है।)
3. अनुकृत रूप – कलाकार बनता है। (सत्य से तिगुना दूर है।)
क्योंकि यह अनुकरण का अनुकरण है
उदाहरण– ईश्वर ने पलंग का रूप बनाया अतः यह सत्य है। कारीगर ने आदर्श का नकल करते हुए वास्तविक पलंग बनाया और कलाकार ने उसका चित्र बनाया।
प्लेटो के अनुकरण सिद्धांत का विशेष तथ्य:
> प्लेटो की दृष्टि में अनुकरण का अर्थ ‘हु-बहू’ नक़ल है।
> प्लेटो के अनुसार कवि ‘अनुकरण का अनुकरण’ करता है। अतः काव्य या अन्य कलाएँ सत्य से तिगुना दूर है।
> काव्य एवं अन्य कलाएँ सत्य से तिगुना दूर होने के कारण ‘त्याज्य’ है।
प्लेटो के महत्वपूर्ण कथन:
> “गुलामी म्रत्यु से अधिक भयावह है।”
> “कविता भावों और संवेगों को उद्दीप्त करती है और तर्क एवं विचार शून्यता को प्रोत्साहन है।”
> “आदर्श गणराज्य में कवियों का कोई स्थान नहीं है?”
> “काव्य समाज के लिए हानिकारक है जिसका आधार ही मिथ्या है, वह उपयोगी कैसे हो सकता है।”