सुंदर विचार
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – संस्कृति के चार अध्याय Ramdhari Singh Dinkar – Sanskriti Ke Char Adhyay
विष्णु प्रभाकर – आवारा मसीहा : Vishnu Prabhakar – Awara Masiha
ध्वज बंदना – रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – Dhvaj Vandana – Ramdhari Singh Dinkar
रामवृक्ष बेनीपुरी – माटी की मूरतें Ramvriksha Benipuri – Maati Ki Mooraten
जीने की राह
जिन सपनों में जीना चाहीवे सपने बिखर गएदिल के अरमान अबआंसू बन बह गए। राह कौन सा अपनाऊं?यह सोचकर थक गई।दुनिया की भीड़ देखजीने की राह मिल गई।
रामनरेश त्रिपाठी जीवन परिचय
गर्मी
चढ़ा जेठ तपी धरा चहू दिशा बही गर्म बयार ताल-तलैया सूख रहे भीषण ताप से झूलस रहा है जन-जीवन अब तो करो रहम की दान। जय हिन्द
समय बलवान है
ऐ वक्त और कितना साधेगा चाहे तू जितना भी साध ले लेकिन याद रखना मैं भी जिद्दी हूं हार नही मानूंगी, कहीं किसी मोड़ पर तुझे बदलने के लिए मजबूर कर दूंगी विश्वास मुझे है तू मेरे साथ होगा। जय हिन्द
भारत का संविधान
तुम्हारी हर तकलीफों का, मैं मुक्कमल जबाब हूं। कभी वक्त मिले तो, मुझे पढ़ लेना, मैं भारत का संविधान हूं। हमारे संविधान निर्माता सही में ईमानदार थे।





