विद्यानिवास मिश्र : ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है’ (निबंध)

महीनों से मन बेहद-बेहद उदास है। उदासी की कोई खास वजह नहीं, कुछ तबीयत ढीली, कुछ आसपास के तनाव और कुछ उनसे टूटने का डर, खुले आकाश के नीचे भी खुलकर साँस लेने की जगह की कमी, जिस काम में लगकर मुक्ति पाना चाहता हूँ, उस काम में हज़ार बाधाएँ; कुल ले-देकर उदासी के लिए… Continue reading विद्यानिवास मिश्र : ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है’ (निबंध)

हजारीप्रसाद द्विवेदी ‘नाख़ून क्यों बढ़ते हैं’ निबंध

बच्चे कभी-कभी चक्कर में डाल देनेवाले प्रश्न कर बैठते हैं। अल्पज्ञ पिता बड़ा दयनीय जीव होता है। मेरी छोटी लड़की ने जब एक दिन पूछ दिया कि आदमी के नाख़ून क्यों बढ़ते हैं, तो मैं कुछ सोच ही नहीं सका। हर तीसरे दिन नाख़ून बढ़ जाते हैं, बच्चे कुछ दिन तक अगर उन्हें बढ़ने दें,… Continue reading हजारीप्रसाद द्विवेदी ‘नाख़ून क्यों बढ़ते हैं’ निबंध

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग- 5

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1,2,3 और भाग-4 में दिया गया है, कृपया इस विडिओ को देखने से पहले, इसके पहले के विडिओ में भाग-1,2,3 और भाग-4 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे– कविता की भाषा कविता में कही गई बात चित्र-रूप में हमारे सामने आनी चहिए, यह हम पहले… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग- 5

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग- 4

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1,2 और भाग-3 में दिया गया है, कृपया इस विडिओ को देखने से पहले, इसके पहले के विडिओ में भाग-1,2 और भाग-3 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – चमत्कारवाद काव्य के संबंध में चमत्कार’ अनूठापन आदि शब्द बहुत दिनों से लाए जाते हैं। चमत्कार… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग- 4

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-3

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1 और भाग-2 में दिया गया है, कृपया इस विडिओ को देखने से पहले, इसके पहले के विडिओ में भाग-1 और भाग-2 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – मनुष्यता की उच्च भूमि मनुष्य की चेष्टाओं और कर्मकलाप से भावों का मूल-संबंध निरूपित हो चुका… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-3

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-2

इस पाठ का प्रथम अंश भाग-1 में दिया गया है – मार्मिक तथ्य मनुष्येतर प्रकृति के बीच के रूप-व्यापार कुछ भीतरी भावों या तथ्यों की भी व्यंजना करते हैं। पशु-पक्षियों के सुख-द:ख, हर्ष-विषाद, राग-द्वेष, तोष-क्षोभ, कृपा-क्रोध इत्यादि भावों की व्यंजना जो उनकी आकृति, चेष्टा, शब्द आदि से होती है, वह तो प्राय: बहुत प्रत्यक्ष होती… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-2

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-1

यह पाठ बहुत बड़ा है इसलिए विडिओ को छोटा रखने के लिए हमने इसे पाँच भागों में बाँट दिए हैं, यह पहला भाग है - मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों को लिए दिए दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलाता और कहीं लड़ाता हुआ अंत तक चला चलता है और इसी… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-1

गूंगी प्रजा का वकील : शिवशंभु शर्मा (भूमिका) भाग-5

हिन्दी में व्यंग्य-विनोद की सजीव शैली के पुरस्कर्ताओं में बाबू बालमुकुंद गुप्त के 'शिवशंभु के चिट्ठे' अपना अप्रतिम स्थान रखते हैं। शिवशम्भु के कल्पित नाम से, गुप्तजी ने लार्ड कर्जन के शासनकाल में, भारतीय जनता की दुर्दशा को प्रकट करने के लिए आठ चिट्ठे लिखे थे। ये चिट्ठे उस समय की राजनीतिक गुलामी और लार्ड… Continue reading गूंगी प्रजा का वकील : शिवशंभु शर्मा (भूमिका) भाग-5

बालमुकुंद गुप्त शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-4

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1, भाग-2 और भाग-3 में दिया गया है, कृपया इस भाग-4 को देखने से पहले, इसके पहले भाग-1, भाग-2 और भाग-3 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – 7. बिदाई संभाषण माई लार्ड! अंत को आपके शासन-काल का इस देश में अंत हो गया। अब आप इस… Continue reading बालमुकुंद गुप्त शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-4

बालमुकुंद गुप्त – ‘शिवशंभू के चिट्ठे’ (निबंध) भाग-3

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1 और भाग-2 में दिया गया है, कृपया इस भाग-3 को देखने से पहले, इसके पहले भाग-1 और भाग-2 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – 5. आशा का अन्त! माई लार्ड! अब के आपके भाषण ने नशा किरकिरा कर दिया। संसार के सब दुःखों… Continue reading बालमुकुंद गुप्त – ‘शिवशंभू के चिट्ठे’ (निबंध) भाग-3