आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग- 4

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1,2 और भाग-3 में दिया गया है, कृपया इस विडिओ को देखने से पहले, इसके पहले के विडिओ में भाग-1,2 और भाग-3 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – चमत्कारवाद काव्य के संबंध में चमत्कार’ अनूठापन आदि शब्द बहुत दिनों से लाए जाते हैं। चमत्कार… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग- 4

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-3

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1 और भाग-2 में दिया गया है, कृपया इस विडिओ को देखने से पहले, इसके पहले के विडिओ में भाग-1 और भाग-2 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – मनुष्यता की उच्च भूमि मनुष्य की चेष्टाओं और कर्मकलाप से भावों का मूल-संबंध निरूपित हो चुका… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-3

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-2

इस पाठ का प्रथम अंश भाग-1 में दिया गया है – मार्मिक तथ्य मनुष्येतर प्रकृति के बीच के रूप-व्यापार कुछ भीतरी भावों या तथ्यों की भी व्यंजना करते हैं। पशु-पक्षियों के सुख-द:ख, हर्ष-विषाद, राग-द्वेष, तोष-क्षोभ, कृपा-क्रोध इत्यादि भावों की व्यंजना जो उनकी आकृति, चेष्टा, शब्द आदि से होती है, वह तो प्राय: बहुत प्रत्यक्ष होती… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-2

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-1

यह पाठ बहुत बड़ा है इसलिए विडिओ को छोटा रखने के लिए हमने इसे पाँच भागों में बाँट दिए हैं, यह पहला भाग है - मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों को लिए दिए दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलाता और कहीं लड़ाता हुआ अंत तक चला चलता है और इसी… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘कविता क्या’ है? निबंध भाग-1

गूंगी प्रजा का वकील : शिवशंभु शर्मा (भूमिका) भाग-5

हिन्दी में व्यंग्य-विनोद की सजीव शैली के पुरस्कर्ताओं में बाबू बालमुकुंद गुप्त के 'शिवशंभु के चिट्ठे' अपना अप्रतिम स्थान रखते हैं। शिवशम्भु के कल्पित नाम से, गुप्तजी ने लार्ड कर्जन के शासनकाल में, भारतीय जनता की दुर्दशा को प्रकट करने के लिए आठ चिट्ठे लिखे थे। ये चिट्ठे उस समय की राजनीतिक गुलामी और लार्ड… Continue reading गूंगी प्रजा का वकील : शिवशंभु शर्मा (भूमिका) भाग-5

बालमुकुंद गुप्त शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-4

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1, भाग-2 और भाग-3 में दिया गया है, कृपया इस भाग-4 को देखने से पहले, इसके पहले भाग-1, भाग-2 और भाग-3 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – 7. बिदाई संभाषण माई लार्ड! अंत को आपके शासन-काल का इस देश में अंत हो गया। अब आप इस… Continue reading बालमुकुंद गुप्त शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-4

बालमुकुंद गुप्त – ‘शिवशंभू के चिट्ठे’ (निबंध) भाग-3

इस पाठ का पूर्व अंश भाग-1 और भाग-2 में दिया गया है, कृपया इस भाग-3 को देखने से पहले, इसके पहले भाग-1 और भाग-2 को अवश्य देख लें जिससे कि विषय की निरंतरता बनी रहे – 5. आशा का अन्त! माई लार्ड! अब के आपके भाषण ने नशा किरकिरा कर दिया। संसार के सब दुःखों… Continue reading बालमुकुंद गुप्त – ‘शिवशंभू के चिट्ठे’ (निबंध) भाग-3

प्रताप नारायण मिश्र : ‘शिवमूर्ति’ (निबंध)

हमारे ग्रामदेव भगवान भूतनाथ सब प्रकार से अकथ्य अप्रतर्क्य एवं अचिन्त्य हैं। तौ भी उनके भक्त जन अपनी रुचि के अनुसार उनका रूप, गुण, स्वभाव कल्पित कर लेते हैं। उनकी सभी बातें सत्य हैं, अतः उनके विषय में जो कुछ कहा जाय सब सत्य है। मनुष्य की भांति वे नाड़ी आदि बंधन से बद्ध नहीं… Continue reading प्रताप नारायण मिश्र : ‘शिवमूर्ति’ (निबंध)

बालमुकुंद गुप्त – शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-2

इस पाठ का प्रथम अंश भाग-1 में दिया गया है – 3. वैसराय का कर्त्तव्य माई लार्ड! आपने इस देश में फिर पदार्पण किया, इससे यह भूमि कृतार्थ हुई। विद्वान, बुद्धिमान और विचार शील पुरुषों के चरण जिस भूमि पर पड़ते हैं, वह तीर्थ बन जाती है। आपमें उक्त तीन गुणों के सिवा चौथा गुण… Continue reading बालमुकुंद गुप्त – शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-2

बालमुकुंद गुप्त – शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-1

1. बनाम लार्ड कर्जन माई लार्ड! लड़कपन में इस बूढ़े भंगड़ को बुलबुल का बड़ा चाव था। गाँव में कितने ही शौक़ीन बुलबुलबाज़ थे। वह बुलबुलें पकड़ते थे, पालते थे और लड़ाते थे, बालक शिवशम्भु शर्मा बुलबुलें लड़ाने का चाव नहीं रखता था। केवल एक बुलबुल को हाथ पर बिठाकर ही प्रसन्न होना चाहता था।… Continue reading बालमुकुंद गुप्त – शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध) भाग-1