‘विराम’ का अर्थ होता है- ‘रुकना या ठहरना।’ भिन्न-भिन्न भावों और विचारों को स्पष्ट करने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग वाक्य के बीच में या अंत में किया जाता है, उसे विराम चिह्न कहते हैं।
परिभाषा– जब हम अपने भावों को भाषा के द्वारा व्यक्त करते हैं, तब एक भाव की अभिव्यक्ति के बाद कुछ देर रुकते हैं, यह रुकना ही ‘विराम’ कहलाता है। विराम चिह्नों के प्रयोग से भावों में स्पष्टता आती है और कथन भावपूर्ण बन जाता है।
कामता प्रसाद गुरु के शब्दों में- “शब्दों और वाक्यों का परस्पर संबंध बताने तथा किसी विषय को भिन्न-भिन्न भागों में बाँटने और पढ़ने में ठहरने के लिए, लेखों में जिन चिह्नों का उपयोग किया जाता है, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं।”
सरल शब्दों में- वाक्य को बोलते अथवा लिखते समय कहीं कम, कहीं बहुत कम रुकना पड़ता है। इससे भाषा स्पष्ट, अर्थवान और भावपूर्ण हो जाती है। लिखित भाषा में इस ठहराव को दिखाने के लिए कुछ विशेष प्रकार के चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। उन चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं। लेखन को प्रभावी बनाने के लिए लेखक द्वारा कई प्रकार के विराम चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। लेखन के भावों की “अभिव्यक्ति”, वाक्य का अर्थ स्पष्ट करने, उतार-चढ़ाव और ठहराव को दर्शाने के लिए आवश्यक होता है। यदि विराम चिह्न का प्रयोग नहीं किया जाए तो वाक्य अर्थहीन या अस्पष्ट हो जाएगा। जैसे-
राम श्याम के घर जा रहा है तुम्हारा नाम क्या है
हिंदी में प्रचलित ‘विराम चिह्न’ निम्नलिखित है-
| 1 | पूर्ण विराम (full stop) | । |
| 2. | अल्प विराम (Comma) | , |
| 3. | अर्द्धविराम (Semi Colon) | ; |
| 4. | प्रश्नवाचक चिह्न (Q.Mark) | ? |
| 5. | अवतरण चिह्न (उद्धरण) (Iverted Comma) | ‘ ’ या “ ” लेखक जब पुस्तक, शीर्षक आदि का नाम उद्धृत करने हेतु या किसी कथन को ‘ज्यों का त्यों’ प्रकट करने हेतु |
| 6. | कोष्टक (Brackets) | (), [ ], { } |
| 7. | निर्देशक (Dash) | – |
| 8. | विस्मय बोधक (S of Excl.) | ! |
| 9. | योजक या विभाजक | – |
| 10. | अपूर्ण विराम | : |
| 11. | विवरण चिन्ह | :- |
| 12. | लाघव चिह्न | ० |
| 13. | तुल्यता सूचक | = |
| 14. | स्थान पूरक चिह्न(रिक्तस्थान | …………. |
| 15. | रेखांकन चिह्न (Underline) | गोदान उपन्यास |
1. पूर्ण विराम (Full-Stop) (।)
जहाँ पर वाक्य पूर्ण या समाप्त हो जाता है, वहाँ पूर्ण विराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
(क) पूर्ण विराम चिह्न का प्रयोग प्रश्न सूचक और विस्मयादि सूचक वाक्यों को छोड़कर बाकी सभी प्रकार के वाक्यों के अंत में किया जाता है। जैसे-
1. सोहन ने खाना खा लिया।
2. हमारे विधालय में शनिवार को भी अवकाश रहता है।
3. मैं कल घर जाऊँगा।
4. तुम घर चले जाओ।
(ख) इसका प्रयोग कविता की दो पंक्तियों (अर्धाली) के अंत में भी प्रयुक्त होता है। जैसे-
मैं रोया इसको तुम कहते हो गाना,
मैं फुट पड़ा तुम कहते छंद बनाना।
2. अल्प विराम (Comma) (,)
किसी वाक्य को लिखते या पढ़ते समय जहाँ बहुत कम या थोड़ा समय के लिए रुकते हैं। वहाँ अल्प विराम का प्रयोग किया जाता है।
अधिक वस्तुओं, व्यक्तियों आदि को अलग करना हो, वहाँ पर भी अल्पविराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
1. उसने आने को कहा था, अतः उसकी प्रतीक्षा करूँगा।
2. हाँ, मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा।
3. भारत में चना, मक्का, जौ, बाजरा आदि बहुत सी फसलें उगाई जाती हैं।
जब संवाद लिखते हैं, तब अल्पविराम का प्रयोग किया जाता है; जैसे-
नेताजी ने कहा, “तुम मुझे खुन दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”
संवाद लिखते समय ‘हाँ’ और ‘नहीं’ के पश्चात भी अल्पविराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है; जैसे-
मोहन : सोहन, क्या तुम कल गाँव जा रहे हो?
सोहन : नहीं, दो दिन के बाद जाऊँगा।
हिन्दी में अल्पविराम चिह्न का प्रयोग निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जाता है-
अंकों को लिखते समय-1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 आदि।
एक ही प्रकार के शब्दों के प्रयोग या एक ही प्रकार के वाक्यांश की पुनरावृति होने पर जैसे-
मैं दौड़, दौड़कर थक गया।
तारीख और महीने का नाम लिखने के बाद जैसे-
2 फरवरी, 2020
3 मार्च, 2020
8 जून 2020 आदि।
3. अर्द्धविराम चिह्न (Semi Colon) (;)
जहाँ अल्प विराम की अपेक्षा कुछ ज्यादा देर तक रुकना हो वहाँ अर्ध विराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जब किसी वाक्य को पढ़ते या कहते हुए बीच में हल्का सा विराम लेना हो लेकिन वहाँ वाक्य खत्म नहीं हो रहा हो, तब वहाँ पर अर्द्धविराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि एक वाक्य के साथ दूसरे वाक्य का संबंध बताना हो तो वहाँ अर्द्धविराम का प्रयोग होता है। इस प्रकार के वाक्यों में दूसरे से अलग होते हुए भी दोनों में कुछ न कुछ संबंध रहता है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं। जैसे-
1. राम तो अच्छा बालक है; किन्तु उसकी दोस्ती अच्छों के साथ नहीं है।
2. विकास को मैंने अपना दोस्त समझा; किन्तु वह आस्तीन का साँप निकला।
3. दो या दो से अधिक उपाधियों के बीच अर्द्धविराम का प्रयोग किया जाता है; जैसे- एम.ए; बी.एड; एम.एस.सी
4. प्रश्नवाचक चिह्न (Question Mark) (?)
बातचीत के दौरान जब किसी से कोई बात पूछी जाती है या कोई प्रश्न किया जाता है तब वाक्य के अंत में प्रश्नसूचक-चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
1. तुम कहाँ जा रहे हो?
2. तुम्हारा नाम क्या है?
3. तुम क्या खा रहे हो ?
इस चिह्न का प्रयोग निम्नलिखित अवस्थाओं में किया जाता है–
जहाँ प्रश्न करने का बोध होता हो। जैसे-
क्या आप पटना से आ रहे हैं?
जहाँ स्थिति निश्चित न हो। जैसे-
आप शायद दिल्ली के रहने वाले हैं?
जहाँ व्यंग्य किया जा रहा हो। जैसे-
भ्रष्टाचार इस युग का सबसे बड़ा उत्तम शिष्टाचार है न?
जहाँ ईमानदारी होगा वहाँ बेईमानी कैसे टिक सकती है?
इस चिह्न का प्रयोग संदेह प्रकट करने के लिए भी किया जाता है;
जैसे- क्या कहा, वह प्रतिष्ठित है?
5. अवतरण या उद्धरण चिह्न (Inverted Comma) (“….” ‘….’ )
इस चिह्न का प्रयोग किसी कथन के मूल अंश को उद्धृत करने तथा व्यक्ति, पुस्तक, उपनाम आदि के लिए किया जाता है।
उद्धरण चिह्न के दो भेद हैं-
इकहरा उद्धरण चिह्न ( ‘….’ ) इकहरा चिह्न का प्रयोग किसी के उपनाम रचना या पुस्तक के शीर्षक आदि के लिए करते है। जैसे-
‘प्रियतम’ कविता के रचयिता श्री सूर्य कान्त त्रिपाठी ‘निराला’ हैं।
‘कुरुक्षेत्र’ कविता के रचयिता रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।
सन् 1930 में ‘हँस’ पत्रिका और 1932 में ‘जागरण’ पत्रिका निकला था।
‘रामचरित मानस’ तुलसीदास की विश्वप्रसिद्ध रचना है।
दोहरा उद्धरण चिह्न ( “……” )
किसी पुस्तक के कोई खास वाक्य या किसी के द्वारा कहे हुए वचन को ज्यों का त्यों लिखने के लिए दोहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
लाल लाजपत राय ने कहा, “स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है”।
6. कोष्ठक (Bracket) (), [ ], { }
कोष्ठक का प्रयोग निम्न स्थितियों में किया जाता है।
एकांकी अथवा नाटक में रंगमंचीय संकेतों को स्पष्ट करने के लिए। जैसे- सैनिक (प्रणाम करते हुए) महाराज की जय हो।
किसी पद का अर्थ स्पष्ट करने के लिए:
जैसे- सावित्री ने सत्यवान (अपने पति) के प्राणों की रक्षा की।
राष्ट्रीय त्योहार (स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस) राष्ट्रीय एकता बढ़ाने में सहायक हैं।
यहाँ लेखन सामग्री (रजिस्टर, कलम, स्याही आदि) सब मिल जाएगी।
7. निर्देशक चिन्ह (Dash) या रेखिका (-)
इस चिह्न का प्रयोग भिन्न-भिन्न स्थानों और आगे आने वाले विवरण को सांकेतिक करने के लिए किया जाता है।
वार्तालाप में वक्ता के आगे यह चिह्न प्रयुक्त होता है। जैसे-
ग्राहक- इस बैग का क्या मूल्य है?
दूकानदार- यह सौ रुपया का है।
मैंने कहा- तुमसे ऐसी आशा नहीं थी।
कृष्ण- हे अर्जुन! सुनो
विषय- निर्देशक शब्दों (यथा, जैसे, प्रसंग, उदाहरण, अर्थ, व्याख्या, निम्नलिखित है, प्रस्तुत है आदि) अथवा तत्संबंधी शब्दों के साथ जिनसे कुछ आगे लिखने की संभावना सूचित हो। जैसे-
हिमालय का अर्थ है- हिम का घर।
अब मैं अपने विचार प्रस्तुत करता हूँ-
व्याकरण का लक्षण निम्नलिखित है-
8. विस्मय या विस्मयादि बोधक (Sign of Interjection) (!)
विस्मयादि बोधक चिह्न का प्रयोग हर्ष, विषाद, घृणा, आश्चर्य, करुणा, भय इत्यादि का बोध होने के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे- वाह! आपका यहाँ कैसे आना हुआ?
आदर सूचक शब्दों, पदों और वाक्यों के अंत में इसका प्रयोग किया जाता है। जैसे- वाह! तुम्हारे क्या कहने!
बड़ों का आदर संबोधित करने में इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
जैसे- हे राम! मेरा दुःख दूर करो। हे ईश्वर! सबका कल्याण करो।
अपने से छोटे के प्रति शुभ कामनाएँ देने के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
जैसे- भगवान तुम्हारा भला करे! यशस्वी रहो!
जहाँ मन की हँसी-खुशी को व्यक्त करना हो।
जैसे- तुम्हारी जीत होगी, शाबाश! वाह! वाह! तुमने बहुत अच्छा गीत गाया।
विस्मयादि बोधक चिह्न में प्रश्नकर्ता उत्तर की अपेक्षा नहीं करता है।
संबोधनसूचक शब्द के बाद में; जैसे-
मित्रों! आज अभी मैं जो आप सब को कहने जा रहा हूँ।
साथियों! आज हमें अपने देश के लिए कुछ करने का समय आ गया है।
9. योजक या विभाजक चिह्न (Hyphen) (-)
इस चिह्न का प्रयोग सामासिक शब्दों, सा, सी, से आदि से पहले, शब्द युग्मों, द्वित्व शब्दों, पूर्णांक से कम संख्या, भाग बताने के लिए किया जाता है। जैसे-
सुख-दुःख, आगमन-प्रस्थान, यश-अपयश आदि
हिरनी-सी आँखें, मोती-से अक्षर, फूल-सा बच्चा आदि
एक-तिहाई, एक-चौथाई आदि।
10. अपूर्ण विराम या उप विराम (Colon) (:)
जहाँ वाक्य पूरा नहीं होता हो, बल्कि किसी वस्तु अथवा विषय के बारे में बताया जाता है, वहाँ उप विराम या अपूर्ण विराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
शंकर भगवान के अनेक नाम हैं : भोलेनाथ, शम्भू, शिव, नीलकंठ, नागेश्वर आदि।
कृष्ण भगवान के अनेक नाम हैं : गोपाल, गिरिधर, वंशीधर, मुरलीधर, आदि।
11 . विवरण चिह्न या आदेश चिह्न (Sign of Following) (:-)
जब किसी विषय को क्रम से लिखना हो तो विषय-क्रम व्यक्त करने से पहले आदेश सूचक चिह्न (:-) का प्रयोग किया जाता है। जैसे- क्रिया के दो भेद हैं :- अकर्मक क्रिया और सकर्मक क्रिया
वचन के दो भेद हैं :- एकवचन और बहुवचन
12. लाघव चिह्न (Abbreviation Sign) (०)
किसी बड़े तथा प्रसिद्ध शब्द को संक्षेप में लिखने के लिए, उस शब्द का पहला अक्षर लिखकर उसके आगे शून्य (०) लगाया जाता हैं। यह शून्य ही लाघव-चिह्न लहलाता है। जैसे-
पंडित का लाघव- चिह्न पं०
डॉक्टर का लाघव- चिह्न डॉ०
प्रोफेसर का लाघव- चिह्न प्रो० होगा
13. तुल्यता सूचक (=)
इसे ‘समानता सूचक’ भी कहा जाता है। इस चिह्न का प्रयोग सबसे अधिक गणित में किया जाता है। शब्दार्थ अथवा गणित की तुल्यता सूचित के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है; जैसे-
1 रूपया = 100 पैसे
2 रुपया = 200 पैसे
जलज = कमल
जलद = बादल आदि।
14. स्थान पूरक या लोप चिह्न (Mark of Omission) (………)
जब वाक्य या अनुछेद में कुछ अंश छोड़ कर लिखना होता है तब लोप चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
जैसे- गांधी जी ने कहा, “परीक्षा की घड़ी आ गई है………………हम करेंगे या मरेंगे”।
15. रेखांकन चिह्न (Underline) ( _ ) जब वाक्य में महत्वपूर्ण शब्द, पद, वाक्य रेखांकित करना होता है तब इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे- गोदान उपन्यास, प्रेमचंद द्वारा लिखित सर्वश्रेष्ठ कृति है।
विशेष नोट- पूर्णविराम को छोड़कर प्रायः सभी विराम चिह्न अंग्रेजी से ग्रहण किए गए हैं।
जय हिंद