हिंदी व्याकरण में अर्थ भेद वाले शब्द

हिंदी में कुछ शब्द एक दूसरे के पर्याय प्रतीत होते हैं। परंतु वास्तव में इनमें अर्थ का अंतर होता है। नीचे कुछ महत्वपूर्ण शब्द-युग्म अर्थों के साथ दिए जा रहें है, जिन्हें वाक्य प्रयोग के द्वारा समझा जा सकता है।

1. अवस्था-आयु- अवस्था शब्द से उम्र का पता चलता है, तथा आयु का संबंध पुरे जीवन काल से होता है, जैसे –

अवस्था- राम-लक्ष्मण जब छोटी अवस्था में थे तभी गुरु विश्वामित्र उन्हें अपने यहाँ ले गए थे।

आयु- ज्योतिषी ने कहा कि श्याम की आयु बहुत लंबी है।

2. अस्त्र-शस्त्र- जिन हथियारों को फेंक कर चलाया जाता है वे अस्त्र कहलाते हैं तथा जिनको हाथ में पकड़कर वार किया जाता है, वे शस्त्र कहलाते हैं, जैसे-

अस्त्र- रॉकेट, मिसाइल तथा प्रक्षेपात्र अस्त्र के उदाहरण हैं।

शस्त्र- तलवार, भाला, फरसा आदि शस्त्र के उदाहरण हैं। 

3. अमूल्य-बहुमूल्य- जिसका मुल्यांकन न किया जाये वह ‘अमूल्य’ और जिसका मूल्यांकन वास्तविक मूल्य से अधिक किया जाए वह बहुमूल्य हैं, जैसे-

अमूल्य – आपने अपने मित्र की जो सेवा की वह अमूल्य है।

बहुमूल्य – उसके घर में सभी सजावट की वस्तुएँ बहुमूल्य है।

4. अनुरूप-अनुकूल- अनुरूप शब्द से समानता का बोध होता है जबकि अनुकूल शब्द से अनुसार या पक्ष का भावा प्रकट होता है। जैसे-

अनुरूप – आप निश्चिंत रहें आपके वैभव के अनुसार ही हम आपका सम्मान करेंगे।

अनुकूल- अनुकूल परिस्थितियों में तो सभी जी लेते हैं लेकिन जो विषम परिस्थितियों में जीता है, वही सफल होता है।

5. अपराध-पाप- गैर क़ानूनी कार्य अपराध है जबकि सामाजिक/ धार्मिक दृष्टि से किया गया अनुचित कार्य पाप हैं, जैसे

अपराध – चोरी-डकैती या दूसरे को धोखा देना अपराध है।

पाप – किसी के बारे में बुरा सोचना पाप है।

6. आधि-व्याधि- मानसिक तकलीफें ‘आधि’ के अंतर्गत आती है तथा शारीरिक कष्ट ‘व्याधि’ के अंतर्गत आती है, जैसे-

 आधि – चिंता, घुटन, फ्रस्टेशन ‘आधि’ के उदाहरण हैं

 व्याधि – बुखार, सिरदर्द, दस्त, उलटी व्याधि के उदाहरण हैं।

7. अर्पण- दान- अपने से बड़ों को स्वेच्छापूर्वक कुछ देना अर्पण है तथा अपने से छोटे को कोई भी वस्तु देना ‘दान’ है।

अर्पण- सैनिकों ने अपने देश के लिए अपनी जान ‘अर्पित’ कर दी।

दान- राम सिंह गरीबों को हमेशा सैकड़ों रूपये ‘दान’ दे देते हैं।

8. प्रेम- भक्ति- संसार में एक मानव का दूसरे मानव के साथ प्यार का भाव ‘प्रेम’ कहलाता है जबकि ईश्वर अथवा गुरु से किया गया प्रेम ‘भक्ति’ कहलाता है।

प्रेम – हमें आपस में प्रेम से रहना चाहिए।

भक्ति – मीरा कृष्ण की भक्ति में पागल थी।

9. प्रेम-प्रणय – जन सामान्य के बीच परस्पर प्रेम होता है तथा पति-पत्नी के बीच के प्यार को प्रणय कहते हैं।

प्रेम- पाठशाला में सभी बच्चे आपस में प्रेम से रहते हैं।

प्रणय- श्याम और शीला का प्रेम प्रणय बंधन में परिणत हो गया।

10. श्रद्धा-भक्ति – अपने से बड़ों के प्रति आदर-सम्मान का भाव श्रद्धा कहलाता है तथा ईश्वर और गुरु के प्रति प्रेम भक्ति कहलाता है।

श्रद्धा – सभी भारतीय गाँधी और सुभाष चंद्रबोस के प्रति श्रद्धा रखते हैं।

भक्ति – हनुमान राम भक्त हैं।

11. स्त्री-पत्नी – किसी भी महिला को स्त्री कहा जा सकता है पर किसी की विवाहिता स्त्री उसकी पत्नी कहलाती है, जैसे-

स्त्री – मोहन की स्त्री बहुत सुशील है।

पत्नी – सोहन की पत्नी मेहनती और सर्वगुण संपन्न है।

जय हिन्द

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