संस्कृत की वे रचनाएँ जो रीतिकाल का आधार बनी
रचना और रचनाकार
1. कामसूत्र – वात्स्यायन
2. काव्य प्रकाश – मम्मट
3. चंद्रलोक एवं रतिमंजरी – जयदेव
4. साहित्य दर्पण – विश्वनाथ
5. वृत्त रत्नाकर – भट्ट केदार
6. छंदों मंजरी – गंगादास
7. शृंगार मंजरी – अकबर साह
8. शृंगार तिलक – रूद्र भट्ट
9. रस गंगाधर – पंडितराज जगन्नाथ
10. कुवलयानंद – अप्पय दीक्षित
11. चौरपंचाशिका – विल्हण
12. ध्वन्यालोक – आनंदवर्द्धन
13. प्रबोध चंद्रोदय – कृष्ण कवि
रीतिकाल के सर्वांग निरूपक ग्रंथ (सभी काव्यांगों की विवेचना हुआ है)
रचना और रचनाकार
1. कविकुल्कल्पतरु – चिंतामणि
2. कविकुल कंठाभरण – दूल्ह
3. सभामंडन – अमीरदास
4. काव्यनिर्णय – भिखारीदास
5. रस रहस्य – कुलपति मिश्र
6. रस पीयूस निधि- सोमनाथ
7. काव्य सरोज – श्रीपति
8. कविता रस विनोद- जनराज
9. शब्द रसायन/ काव्य रसायन- देव
नायिका भेद से संबंधित ग्रंथ:
रचना और रचनाकार
1. रसराज – मतिराम
2. भाषाभूषण – जसवंत सिंह
3. भारती भूषण – गिरिधर दास
4. शृंगार निर्णय – भिखारीदास
5. व्यंग्यार्थ कौमुदी – प्रतापसाही
6. राधामाधव विनोद, वारवधू विनोद – कालिदास त्रिवेणी
7. तुलसीभूषण – रसरूप
8. शृंगार रस माधुरी – कृष्ण भट्ट देव ऋषि
9. शृंगार निर्णय – भिखारीदास
रीतिकाल के शृंगाररस निरूपक ग्रंथ:
रचना और रचनाकार
1. रस शिरोमणि – रामसिंह
2. रसिक प्रिया – केशवदास
3. रसिक रंजन – कुमारमणि
4. शृंगार विलास – सोमनाथ
5. रसिक गोविंदनंद घन – रसिक गोविंद
रीतिकाल के रसनिरुपक ग्रंथ (इनमें सभी रसों का विवेचन)
रचना और रचनाकार
1. रस सरांश – भिखारीदास
2. रसिक प्रिया – केशवदास
3. रसार्णव – सुखदेव
4. जगत विनोद – पद्माकर
5. रसराज – मतिराम
6. रसिक विनोद – चन्द्रशेखर वाजपेयी
7. भावविलास और रसविलास – देव कवि
8. जुगल रस प्रकाश और रस चंद्रिका – उजियारे कवि
9. नवरस तरंग – बेनी प्रवीण
10. सुधानिधि – तोष कवि
11. रस भूषण – याकूब खाँ
12. रसरंग – ग्वाल कवि (रीतिकाल का अंतिम रचना माना है)
रीतिकाल के अलंकार निरूपक ग्रंथ:
रचना और रचनाकार
1. कविकुल कंठभरण – दूलह
2. पद्माभरण – पद्माकर
3. अलंकार दर्पण – रामसिंह
4. अलंकार पंचाशिका, ललितललाम – मतिराम
5. रामालंकार – गोपकवि
6. अलंकार कलानिधि माधुरी – कृष्णभट्ट देव ऋषि
7. भारती भूषण – गरिधरदास
8. कर्णाभरण – गोविंद कवि
9. कविप्रिया – केशवदास
10. शिवराज – भूषण
11. अलंकार चंद्रोदर – रसिक सुमति
12. अलंकार प्रकाश – मुरलीधर भूषण
13. अलंकार रत्नाकर – दलपति राम
14. भाषाभूषण – जशवंत सिंह
15. कर्णाभरण, श्रुतिभरण, भूपभरण – करनेश
16. भाषाभरण – वैरीसाल
17. अलंकार भ्रम भंजन – ग्वाल कवि
रीतिकाल के प्रबंधकाव्य (अधिक महत्वपूर्ण है)
रचना और रचनाकार
1. सुजान चरित – सूदन
2. रामायण, कृष्ण चरित, रामाश्वमेघ – चिंतामणि
3. नैषध चरित – गुमान मिश्र
4. छत्रप्रकाश – लाल कवि
5. संग्राम सार – कुलपति मिश्र
6. जुगल विलास – रामसिंह
7. सुजान विलास – सोमनाथ
8. पंचाध्यायी – सोमनाथ
9. हम्मीर हठ – ग्वाल कवि
10. हम्मीर हठ – चन्द्रशेखर वाजपेयी
11. रामायण – सूचनिका – रसिक गोविंद
12. जानकी जू का व्याह – मंडन
13. पुरंदर माया- मंडन
14. हिम्मत बहादुर विरुदावली – पद्माकर
15. विजय विनोद – ग्वाल कवि
16. गोप पचीसी – ग्वाल कवि
17. इश्क लहर दरवाय – ग्वाल कवि
18. जय सिंह प्रकाश – प्रताप साही
19. रामचंद्रिका, विज्ञान गीता, रतन बावनी, वीरसिंह देव चरित, जहाँगीर जस चंद्रिका, केशवदास ये सभी प्रबंधकाव्य हैं।
जय हिंद