संगाई (भू-श्रंगी हिरण)

संगाईयह भारत के मणिपुर में पाया जाने वाला एक मृग-हिरण है। यह हिरण केवल मणिपुर में ही पाया जाता है। यह मणिपुर का ‘राज्य पशु’ भी है। पहले यह हिरन पूरे मणिपुर में पाया जाता था परन्तु अब सिर्फ ‘केईबुल लम्जाओं राष्ट्रीय उधान’ में ही दिखाई देता है। केईबुल लम्जाओं राष्ट्रीय उधान विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उधान है।

मणिपुर की लोक कथाओं में संगाई का बहुत ही सम्मानित स्थान है। कहते हैं एक बार मणिपुर का राजकुमार जंगलों में शिकार करने गया था। शिकार करते हुए उसने एक संगाई हिरन को पकड़ लिया। इसकी सुन्दरता से प्रभावित होकर उसने इस हिरण को अपनी प्रेमिका को भेंट के रूप में दे दिया। उसके बाद राजकुमार को युद्ध के लिए जाना पड़ा। कुछ दिनों बाद जब राजकुमार युद्ध जीतकर लौटे तब उन्हें पता चला कि उनकी प्रेमिका का विवाह किसी दूसरे राजा के साथ सम्पन्न हो गया है। राजकुमार ने सोचा शायद मैंने ‘संगाई’ को गुलाम बनाया था, उसी की सजा मुझे मिली है। यह सोचकर दुःखी राजकुमार ने संगाई को आजाद कर दिया। उसी समय से मणिपुर के लोग संगाई को बंधनों में बांधकर नहीं रखते हैं।

संगाई की सबसे बड़ी खूबी है कि यह मौसम के अनुसार अपना रंग बदलता है। सर्दियों में यह गहरा भूरा रंग का तथा गर्मियों में यह हल्का भूरा रंग का हो जाता है। संगाई को भू-श्रंगी हिरण भी कहा जाता है। संगाई विभिन्न प्रकार के जल में रहने वाले पौधों, घासों, और अंकुरों का भोजन करता हैं। संगाई के सिंग शुरू से लेकर अंतिम छोर तक घुमावदार होता है यह दूर से देखने पर सांभर की तरह ही दिखता है। लेकिन यह सांभर से छोटे आकार का होता है। मणिपुर के एक अन्य लोककथा में, लुवांग कबीले के पुदंगकोई नामक एक राजकुमार ने एक दिव्य इकाई की कृपा से खुद को एक हिरण में बदल दिया, जो बाद में संगाई कहलाया।  पूरी दुनिया में सबसे दुर्लभ जानवरों की प्रजातियों में से एक रूप में पहचानी जाने वाली यह  संगाई लोगों के लिए आंख का तारा है।

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