1.भीष्म साहनी ‘तमस’ भीष्म साहनी का जन्म: 8 अगस्त 1915 ई० रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था। निधन: 11 जुलाई 2003 ई० दिल्ली उपन्यासकार: भीष्म साहनी उपन्यास: ‘तमस” प्रकाशन वर्ष: (1973 ई०) ‘तमस’ भीष्म साहनी का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है।तमस को 1975 ई० में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।इसकी कथा 1947 ई०… Continue reading हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (देश विभाजन पर आधारित उपन्यास) इकाई-2
सुंदर विचार
हिन्दी साहित्य की गद्य विधा: उपन्यास (इकाई-2)
उपन्यास: उपन्यास आधुनिक युग की देन है। उपन्यास दो शब्दों के मेल से बना है। उप+न्यास = ‘उप’ का अर्थ ‘समीप’ और ‘न्यास’ का अर्थ ‘धरोहर’ होता है। आधुनिक उपन्यास के जनक ‘डेनियल डिफो’ को माना जाता है। शाब्दिक अर्थ- मनुष्य के समीप उसी की भाषा में रखी हुई धरोहर होता है। परिभाषाएँ: श्यामसुंदर दास… Continue reading हिन्दी साहित्य की गद्य विधा: उपन्यास (इकाई-2)
मैथिलीशरण गुप्त ‘साकेत’-‘नवम सर्ग’ (महाकाव्य- इकाई-5 )
(जन्म 3 अगस्त 1886 - 12 दिसंबर 1964) रचनाकाल: ‘साकेत’ 1931ई० में प्रकाशित कूल सर्ग 12 है। महाकाव्यों की परम्परा में ‘रामचरित चिंतामणि’ के बाद मैथिलीशरण गुप्त के ‘साकेत’ का नाम आता है। यह एक सर्गबद्ध रचना है। ‘साकेत’ राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी का प्रसिद्ध काव्य है। गुप्त जी के समस्त कृतियों में साकेत को… Continue reading मैथिलीशरण गुप्त ‘साकेत’-‘नवम सर्ग’ (महाकाव्य- इकाई-5 )
जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय
जयशंकर प्रसाद (3 जनवरी 1889 - 15 नवंबर 1937ई०) जन्म: 1889 ई० काशी के गोवर्धनसराय में हुआ था। उनका परिवार ‘सूंघनी साहू’ के नाम से जाना जाता है। निधन: 1937 ई० पिता: देवीप्रसाद और माता का नाम मुन्नी देवी था। उपनाम: बचपन का नाम ‘झारखंडी’‘आधुनिक कविता के सुमेरु’इलाचंद्र जोशी और डॉ गंपतिचंद्र ने इन्हें ‘छायावाद… Continue reading जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय
साहित्यिक विधाएँ ‘आत्मकथा’ (इकाई – 2)
जब कोई लेखक अपने जीवन की कहानी स्वयं लिखता है। तब उसे आत्मकथा कहते हैं। हिन्दी के प्रसिद्ध आत्मकथाएँ: क्रम सं०रचनाकाररचनारचनाकालटिप्पणियाँ1.बनारसी दास जैन ब्रज भाषाअर्धकथा1641 ई०हिन्दी भाषा की प्रथम आत्मकथा, भाषा ब्रज में यह पद्य में रचित है।2.भारतेंदु हरिश्चंद्रकुछ आप बीती कुछ जग बीतीअज्ञात (अपूर्ण) 3.नरदेव शास्त्रीआपबीती जग बीती1957 ई० 4.अंबिकादत्त व्यासनिज वृत्तांतअज्ञात 5.राधागोस्वामीआत्म चरितअज्ञात 6.स्वामीश्रद्धा नंदकल्याण मार्ग का… Continue reading साहित्यिक विधाएँ ‘आत्मकथा’ (इकाई – 2)
हिन्दी के साहित्यकारों के साहित्यिक उपनाम
साहित्यकारों के मूल नाम से भिन्न वह नाम जिससे साहित्यकार, साहित्य जगत को अपना परिचय देता है। उपनाम का प्रयोग रचना के ‘छाप’ (पहचान) के लिए भी किया जाता है। कवि, कहानीकार, साहित्यकार, उपन्यासकार आदि कोई भी अपना ‘उपमान’ रख सकता है। ‘छद्मनाम’ और ‘उपनाम’ ‘छद्मनाम’ और ‘उपनाम’ में अंतर होता है। ‘छद्मनाम’ में लेखक… Continue reading हिन्दी के साहित्यकारों के साहित्यिक उपनाम
हरिवंशराय राय ‘बच्चन’
हरिवंशराय ‘बच्चन’ हिन्दी कविता के उत्तर छायावादी युग के प्रमुख कवि थे। पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव और माता सरस्वती देवी थी। बाल्यावस्था से ही इन्हें ‘बच्चन’ के नाम पुकारा जाता था। जन्म: 27 नवंबर 1909 ई० इलाहबाद (उत्तर प्रदेश) निधन: 18 जनवरी 2003 ई० सन् 1926 ई० में इनका विवाह श्यामादेवी के साथ हुआ… Continue reading हरिवंशराय राय ‘बच्चन’
हिन्दी साहित्य की ‘महिला’ कहानीकार
हिन्दी की प्रथम महिला कहानीकार - बंग महिला (राजेन्द्रबाला घोष) है। बंग महिला बचपन में - ‘रानी’ और ‘चारुबाला’ के नाम से पुकारा जाता था। गोपालराय के अनुसार - ''सुमित्रा कुमार सिन्हा हिन्दी में प्रथम 'नारीवादी' कहानीकार मानी जा सकती हैं।'' राजेन्द्रबाला घोष: जन्म: 1882 ई० वाराणसी में हुआ था। निधन: 1951 ई०। महत्वपूर्ण कहानियाँ:… Continue reading हिन्दी साहित्य की ‘महिला’ कहानीकार
हिन्दी साहित्य की अन्य गद्य विधाएँ (जीवनी) इकाई-2
जीवनी की परिभाषा: किसी व्यक्ति विशेष के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत को जीवनी कहते हैं। जीवनी का अंग्रेजी नाम ‘बायोग्राफी’ है। परिभाषा: जब किसी व्यक्ति के विषय में कोई अन्य रचनाकार संपूर्ण परिचय साहित्यिक दृष्टीकोण से प्रदान करे, उस विधा को जीवनी या ‘परिकथा’ कहते हैं। हिन्दी भाषा की प्रथम जीवनी: दयानंद दिग्विजय: (1881ई०), यह स्वामी… Continue reading हिन्दी साहित्य की अन्य गद्य विधाएँ (जीवनी) इकाई-2
जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद
भारतीय इतिहास में शंकराचार्य सबसे श्रेष्ठतम दार्शनिक थे। उन्होंने अद्वैतवाद को प्रचलित किया। उन्होंने उपनिषदों, श्रीमद्भागवत गीता एवं ब्रह्मसूत्र पर ऐसे भाष्य लिखे जो दुर्लभ हैं। वे अपने समय के उत्कृष्ट विद्वान एवं दार्शनिक थे। शंकराचार्य का जन्म ढ़ाई हजार साल पूर्व दक्षिण भारत के केरल में हुआ था। शंकराचार्य ने पूरे भारत की यात्रा… Continue reading जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद