सुंदर विचार

साहित्यिक विधाएँ ‘आत्मकथा’ (इकाई – 2)

जब कोई लेखक अपने जीवन की कहानी स्वयं लिखता है। तब उसे आत्मकथा कहते हैं। हिन्दी के प्रसिद्ध आत्मकथाएँ: क्रम सं०रचनाकाररचनारचनाकालटिप्पणियाँ1.बनारसी दास जैन ब्रज भाषाअर्धकथा1641 ई०हिन्दी भाषा की प्रथम आत्मकथा, भाषा ब्रज में यह पद्य में रचित है।2.भारतेंदु हरिश्चंद्रकुछ आप बीती कुछ जग बीतीअज्ञात (अपूर्ण) 3.नरदेव शास्त्रीआपबीती जग बीती1957 ई० 4.अंबिकादत्त व्यासनिज वृत्तांतअज्ञात 5.राधागोस्वामीआत्म चरितअज्ञात 6.स्वामीश्रद्धा नंदकल्याण मार्ग का… Continue reading साहित्यिक विधाएँ ‘आत्मकथा’ (इकाई – 2)

हिन्दी के साहित्यकारों के साहित्यिक उपनाम

साहित्यकारों के मूल नाम से भिन्न वह नाम जिससे साहित्यकार, साहित्य जगत को अपना परिचय देता है। उपनाम का प्रयोग रचना के ‘छाप’ (पहचान) के लिए भी किया जाता है। कवि, कहानीकार, साहित्यकार, उपन्यासकार आदि कोई भी अपना ‘उपमान’ रख सकता है। ‘छद्मनाम’ और ‘उपनाम’ ‘छद्मनाम’ और ‘उपनाम’ में अंतर होता है। ‘छद्मनाम’ में लेखक… Continue reading हिन्दी के साहित्यकारों के साहित्यिक उपनाम

हरिवंशराय राय ‘बच्चन’

हरिवंशराय ‘बच्चन’ हिन्दी कविता के उत्तर छायावादी युग के प्रमुख कवि थे। पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव और माता सरस्वती देवी थी। बाल्यावस्था से ही इन्हें ‘बच्चन’ के नाम पुकारा जाता था।   जन्म: 27 नवंबर 1909 ई० इलाहबाद (उत्तर प्रदेश) निधन: 18 जनवरी 2003 ई० सन् 1926 ई० में इनका विवाह श्यामादेवी के साथ हुआ… Continue reading हरिवंशराय राय ‘बच्चन’

हिन्दी साहित्य की ‘महिला’ कहानीकार

हिन्दी की प्रथम महिला कहानीकार - बंग महिला (राजेन्द्रबाला घोष) है। बंग महिला बचपन में - ‘रानी’ और ‘चारुबाला’ के नाम से पुकारा जाता था। गोपालराय के अनुसार - ''सुमित्रा कुमार सिन्हा हिन्दी में प्रथम 'नारीवादी' कहानीकार मानी जा सकती हैं।'' राजेन्द्रबाला घोष: जन्म: 1882 ई० वाराणसी में हुआ था। निधन: 1951 ई०।  महत्वपूर्ण कहानियाँ:… Continue reading हिन्दी साहित्य की ‘महिला’ कहानीकार

हिन्दी साहित्य की अन्य गद्य विधाएँ (जीवनी) इकाई-2

जीवनी की परिभाषा: किसी व्यक्ति विशेष के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत को जीवनी कहते हैं। जीवनी का अंग्रेजी नाम ‘बायोग्राफी’ है। परिभाषा: जब किसी व्यक्ति के विषय में कोई अन्य रचनाकार संपूर्ण परिचय साहित्यिक दृष्टीकोण से प्रदान करे, उस विधा को जीवनी या ‘परिकथा’ कहते हैं। हिन्दी भाषा की प्रथम जीवनी: दयानंद दिग्विजय: (1881ई०), यह स्वामी… Continue reading हिन्दी साहित्य की अन्य गद्य विधाएँ (जीवनी) इकाई-2

जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद

भारतीय इतिहास में शंकराचार्य सबसे श्रेष्ठतम दार्शनिक थे। उन्होंने अद्वैतवाद को प्रचलित किया। उन्होंने उपनिषदों, श्रीमद्भागवत गीता एवं ब्रह्मसूत्र पर ऐसे भाष्य लिखे जो दुर्लभ हैं। वे अपने समय के उत्कृष्ट विद्वान एवं दार्शनिक थे। शंकराचार्य का जन्म ढ़ाई हजार साल पूर्व दक्षिण भारत के केरल में हुआ था। शंकराचार्य ने पूरे भारत की यात्रा… Continue reading जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद

चन्द्रमा का ‘पुत्र मोह’

महाभारत को धर्म युद्ध भी कहा जाता है लेकिन महाभारत पूर्णरूप से धर्मयुद्ध न होकर कर्मयुद्ध भी था। महाभारत से जुड़ी बहुत सी बातें हैं जो अपने आप में एक रहस्य हैं। भगवान होते हुए भी श्री कृष्ण अपने प्रिय अर्जुन और अपनी बहन सुभद्रा के पुत्र ‘अभिमन्यु’ को युद्ध में नहीं बचा पाए? उसे… Continue reading चन्द्रमा का ‘पुत्र मोह’

हिन्दी सहित्य के प्रथम रचनाकार एवं उनकी रचनाएँ

हिन्दी भाषा के लिए हिन्दी ‘शब्द’ का प्रथम प्रयोग- ‘शर्फूद्दीन यज्दी’ ने ‘जफ़रनामा’ में 1424 ई० में किया था।हिन्दी का प्रथम कवि-  सरहपाहिन्दी में दोहा-चौपाई का सबसे पहले प्रयोग- सरहपाखड़ीबोली गद्य की प्रथम रचना- चंद छंद बरनन की महिमा (गंग कवि, 17वीं शदी)हिन्दी की प्रथम रचना- श्रावकाचार (933 ई०) रचनाकार- आचार्य देवसेनहिन्दी के प्रथम महाकवि-… Continue reading हिन्दी सहित्य के प्रथम रचनाकार एवं उनकी रचनाएँ

शकुनी के ‘पासा’ का रहस्य

महाभारत युद्ध होने के कई कारण थे। इसका मुख्य कारण कौरवों की उच्च महत्वाकांक्षाएँ और धृतराष्ट्र का पुत्र मोह के साथ शकुनी का ‘प्रण’ था। शकुनी चौसर के खेल में जिन पासों का प्रयोग करता था। वह मामूली पाशा नहीं था जिससे वह हमेशा अपनी चाल में सफल होता था। इन पासों के साथ जुड़ी… Continue reading शकुनी के ‘पासा’ का रहस्य

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔंध’ प्रियप्रवास (महाकाव्य) इकाई-5

(जन्म 15 अप्रैल, 1865 -16 मार्च, 1947) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔंध’ जन्म : उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले के निजामाबाद में हुआ था। पिता का नाम : पंडित भोला नाथ उपाध्याय माता का नाम : रुक्मिणी देवी था। निधन : 16 मार्च,1947 को हुआ। पहली रचना : ब्रजभाषा में ‘कृष्णशतक’ (1882 ई०) दूसरी रचना : ब्रजभाषा… Continue reading अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔंध’ प्रियप्रवास (महाकाव्य) इकाई-5