सुंदर विचार

भक्तिकालीन संत काव्यधारा

रचना- अभंगपद रचनाकार- नामदेव नामदेव संत काव्य के प्रवर्तक है।आरम्भ ये सगुणोंपासक रहें थे। बाद में निर्गुणोपासक हो गए।इन्हें ‘बरकरी’ संप्रदाय का प्रवर्तक भी माना जाता है।इनके सगुण पदों की भाषा ब्रजभाषा के समीप रही है।निर्गुण बानियों की भाषा खड़ी बोली मिश्रित साधुक्कड़ी कही जा सकती है।इसके अभंग पद  प्रसिद्ध है।इनका समय 1270 ई० से… Continue reading भक्तिकालीन संत काव्यधारा

भक्तिकालीन रचनाकारों में सूफी काव्य की महत्वपूर्ण पंक्तियाँ

1. रचना- हंसावली (1370 ई०) रचनाकार: असाइत भाषा: राजस्थानी हिन्दी नायक: राजकुमार नायिका हंसावली कथा का आधार: इसमें विक्रम और बैताल की कथा है। महत्वपूर्ण पंक्तियाँ: 1. बावन वीर कथा रस लीड। ऐह पावहु असाइत कहिउ।। 2. देवी अव्रधारु मुझ विनती। पेलि भवि हूं पंखिणी हती।।    इडा मेहला सेवन किउ। दव बलतउ तेणि बनि… Continue reading भक्तिकालीन रचनाकारों में सूफी काव्य की महत्वपूर्ण पंक्तियाँ

छायावाद (इकाई – 2)

‘छायावाद’ हिन्दी साहित्य के रोमांटिक उत्थान की काव्यधारा है। जिसका समय लगभग 1918 – 1936 ई० तक चला। इस काव्यधरा के प्रतिनिधि कवि जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा को माना जाता है। छायावाद के नामकरण का श्रेय मुकुटधर पांडेय को जाता है। ‘छायावाद’ ने हिन्दी में ‘खड़ीबोली’ कविता को पूर्णतः… Continue reading छायावाद (इकाई – 2)

राजभाषा के रूप में हिन्दी (इकाई-1)

संविधान के द्वारा जिस भाषा में शासक या शासन का कामकाज होता है उसे ‘राजभाषा’ कहते हैं।संविधान के द्वारा स्वीकृत सरकारी भाषा को ‘राजभाषा’ कहते हैं।हिन्दी को राजभाषा बनाने की माँग सबसे पहले श्री गोपाल स्वामी आयंगर ने ‘संविधान निर्मात्री सभा’ के समक्ष 14 सितंबर, 1949 ई० में रखी। इसी दिन इस सभा के द्वारा… Continue reading राजभाषा के रूप में हिन्दी (इकाई-1)

हिन्दी भाषा के विकास में दक्षिण भारतीय लेखकों का योगदान

भाषा का कोई रंग, रूप, जाति या आकर नहीं होता है। इसे तो सिर्फ सुनकर, समझकर महसूस किया जा सकता है। हिन्दी भारत की एकमात्र ऐसी भाषा है, जिसे भारत के अधिकांश लोग जानते और समझते हैं। यह पूरे भारत की सम्पर्क भाषा है। हिन्दी भाषा अघोषित राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि राज्य भाषा और संपर्क… Continue reading हिन्दी भाषा के विकास में दक्षिण भारतीय लेखकों का योगदान

विषय: आत्मनिर्भर भारत ‘अवसर और चुनौतियाँ’

“जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा” राजेन्द्र कृष्ण जी का लिखा हुआ यह गीत सुनकर हमें लगता है कि आखिर भारत को किसकी नजर लग गई। इस ‘सोने की चिड़िया’ की जगह अब प्लास्टिक की चिड़िया पेड़ों को शोभायमान करने लगी है। यह सत्य है कि भारत… Continue reading विषय: आत्मनिर्भर भारत ‘अवसर और चुनौतियाँ’

महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाएँ : इकाई – 2

बंगाल गजट/ कलकाता जनरल एडवर्टाइजर/ हिक्की गजट 29 जनवरी, 1780 ई० (साप्ताहिक) संपादक- जेम्स आगस्टस हिक्की भारत का पहला समाचार पत्र ‘बंगाल गजट’ था। जो अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होता था। उदंत मार्तंड (प्रति मंगलवार, मूल्य 2 रु० )  यह भारत का प्रथम साप्ताहिक हिन्दी समाचार पत्र था। प्रकाशन वर्ष - 30 मई (1826 ई०)… Continue reading महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाएँ : इकाई – 2

भक्ति काव्यधारा के दर्शन पंथ और मत : इकाई-2

द्वैतवाद (ब्रह्म संप्रदाय) - मध्वाचार्यअद्वैतवाद (स्मार्त संप्रदाय) - शंकराचार्यद्वैताद्वैतवाद (सनकादिक, रसिकसंप्रदाय) - निंबार्काचार्यविशिष्टाद्वैतवाद (श्री संप्रदाय) - रामानुजाचार्यअंचित्यभेदाभेदवाद (गौडीय संप्रदाय) - चैतन्य महाप्रभुरूद्र संप्रदाय - विष्णु स्वामीसखी, हरिदासी, टट्टी संप्रदाय - स्वामी हरिदासविश्नोई संप्रदाय - जंभानाथ (जंभोजी)रामवत संप्रदाय – रामानंदसिक्ख संप्रदाय – गुरुनानकउदासी संप्रदाय - श्रीचंदसत्यनामी संप्रदाय – संत जगजीवनदासराधावल्लभ संप्रदाय – स्वामी हितहरिवंशनिरंजनी संप्रदाय –… Continue reading भक्ति काव्यधारा के दर्शन पंथ और मत : इकाई-2

बिहारी सतसई : इकाई–5

(सं० जगन्नाथ दास रत्नाकर दोहा 1 से 50) बिहारी का जन्म: 1595 ई० में बसवा, गोविंदपुर, ग्वालियर में हुआ था। इस दोहा से भी  प्रमाण मिलता है। “जन्म ग्वालियर जानिए, खंड बुंदेले बाल। आई तरुनाई सुखद, मथुरा बसे ससुराल।।” बिहारी का निधन: 1663 ई० में हुआ था। पिता का नाम- केशवराय था। गुरु का नाम-… Continue reading बिहारी सतसई : इकाई–5

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’- ‘ब्रह्मराक्षस’ (कविता)

जन्म: (13 नवंबर 1917 – 11 सितंबर 1964 ई०) ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता ‘फैंटसी’ शिल्प पर आधारित है। फैंटसी शिल्प का प्रयोग मुक्तिबोध की कविताओं की विशेषता रही है। इस कविता की रचना 1957ई० में हुई थी। ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता ‘चाँद का मुँह टेढ़ा’ में संकलित है, जो सनˎ1964ई० में प्रकाशित हुआ था। प्रकाशन के पाँच वर्ष बाद… Continue reading गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’- ‘ब्रह्मराक्षस’ (कविता)