रचना - 'एक कहानी यह भी' (2007 ई.) रचनाकार - मन्नू भंडारी (1931-2021 ई.) यह आत्मकथात्मक कहानी है। इस आत्मकथात्मक कहानी के निम्न चार भाग है: मन्नू भंडारी की कहानी जन्म - मध्यप्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था। मन्नू भंडारी 5 भाई बहन थे। मन्नू भंडारी सबसे छोटी थी। साहित्य से… Continue reading मन्नू भंडारी : एक कहानी यह भी
सुंदर विचार
शिवरानी देवी : प्रेमचंद घर में
रचना - 'प्रेमचंद घर में '1944 ई, (जीवनी विधा) रचनाकार - शिवरानी देवी * शिवरानी देवी ने 'प्रेमचंद घर में' नाम से प्रेमचंद की जीवनी लिखी। उन्होंने उनके व्यक्तित्व के उस हिस्से को उजागर किया जिससे लोग अनभिज्ञ थे। * प्रेमचंद ने अपनी पत्नी को हमेशा प्रेरित किया कि वे लिखें और सामाजिक… Continue reading शिवरानी देवी : प्रेमचंद घर में
तुलसीराम : मुर्दहिया
रचना - मुर्दहिया, (1910 ई.), दूसरा भाग- मणिकर्णिका (2014 ई.) रचनाकार - तुलसीराम (दलित आत्मकथा) * संभवतः यह हिंदी की पहली आत्मकथा है, जिसमें केवल दलित ही नहीं अपितु गाँव का संपूर्ण लोक जीवन ही केंद्र में है। * 'मुर्दहिया' दलित समाज की त्रासदी और भारतीय समाज की विडंबना का सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और… Continue reading तुलसीराम : मुर्दहिया
महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (संस्मरण)
रचना - ठकुरी बाबा (संस्मरण) रचनाकार - महादेवी वर्मा (1907 - 1987 ई.) * महादेवी ने अपने रेखाचित्र में, अपने संपर्क में आनेवाले शोषित व्यक्तियों, दीन-हीन नारियों, साहित्यकारों, जीव-जंतुओं आदि का संवेगात्मक चित्रण किया है। * महादेवी के रेखाचित्र में अनुभूति की अभिव्यक्ति, चित्र का बिंब-विधान और सूक्ति का प्रभाव एक साथ दिखाई देता है।… Continue reading महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (संस्मरण)
रामवृक्ष बेनीपुरी : माटी की मूरतें (रेखाचित्र)
1. रचना - माटी की मूरतें (रेखाचित्र) रचनाकार - रामवृक्ष बेनीपुरी जन्म - 1902 ई. बेनीपुर, मुजफ्फ़र (बिहार) निधन - ( 1968 ई.) > 'माटी की मूरतें' 1941 ई. से 1945 ई. के बीच में लिखें गए संस्मरणात्मक रेखाचित्रों का संग्रह है। > इन सभी संस्मरणात्मक रेखाचित्रों को बेनीपुरी जी ने स्वयं 'शब्दचित्र' कहा है।… Continue reading रामवृक्ष बेनीपुरी : माटी की मूरतें (रेखाचित्र)
काव्य-प्रयोजन
काव्य प्रयोजन - (काव्य प्रयोजन का उद्देश्य) काव्य प्रयोजन का तात्पर्य - 'काव्य रचना के उद्देश्य से है। 1. संस्कृत के आचार्यो के अनुसार काव्य प्रयोजन 2. हिंदी के आचार्यो के अनुसार काव्य प्रयोजन 3. पाश्चात्य आचार्यो के अनुसार काव्य प्रयोजन संस्कृत के आचार्यो के अनुसार काव्य के प्रयोजन: 1. भरतमुनि के… Continue reading काव्य-प्रयोजन
पाश्चात्य काव्यशास्त्र: प्लेटो का काव्य सिद्धांत
'पाश्चात्य' साहित्यशास्त्र की परंपरा अत्यंत प्राचीन व समृद्ध रही है। पाश्चात्य साहित्य का प्रारंभ ईसा की पाँचवीं शताब्दी पूर्व सुप्रसिद्ध यूनानी चिंतक प्लेटो से माना जाता है। प्लेटो से पहले वहाँ अनेक चिंतकों और दार्शनिकों का अविर्भाव हो चुका था। प्राचीन ग्रीक साहित्य चिंतन का प्रादुर्भाव नाटकों के संदर्भ में हुआ था। प्राचीन ग्रीस में… Continue reading पाश्चात्य काव्यशास्त्र: प्लेटो का काव्य सिद्धांत
रूपवाद (Formalism)
प्रथम विश्वयुद्ध के समय रूस में रूपवाद का आरंभ हुआ। इसलिए इसे रुसी रुपवाद भी कहा जाता है। रुपवाद के मुख्य दो केंद्र थे- पहला- मॉस्को - मॉस्को में इसकी शुरुआत 1915 ई. में हुई दूसरा- सेंट पीटर्सबर्ग - सेंट पीटर्सबर्ग में इसकी शुरुआत 1916 ई. से मानी जाती है। सोवियत संघ के गठन के पश्चात् रूपवादियों का… Continue reading रूपवाद (Formalism)
फैंटेसी (Fantasy)
काव्यशास्त्र में 'फैंटेसी' शब्द यूनानी भाषा के 'फैंटेसिया' से बना है, जिसका अर्थ होता है- कोरी कल्पना, तृष्णा, कपोल कल्पना, भ्रम, दिवास्वपन आदि। फैंटेसी की परिभाषाएँ- मानविकी कोश के अनुसार - "फैंटेसी स्वप्न चित्र मूलक साहित्य है, जिसमे असंभाव्य संभावनाओं का प्राथमिकता दी जाती है।" फ्रायड के अनुसार - "काव्य में शब्द बद्ध… Continue reading फैंटेसी (Fantasy)
बिंब (Image)
'बिंब' वह शब्दचित्र है जो कल्पना द्वारा ऐन्द्रिक (इन्द्रियों से संबंधित) अनुभवों के आधार पर निर्मित होता है। विश्वकोष के अनुसार - "बिंब चेतन स्मृतियाँ हैं, जो मौलिक उत्तेजना के अभाव में उस विचार को संपूर्ण या आंशिक रूप से प्रस्तुत करती है।" 'बिंब' अंग्रेजी के 'Image' इमेज शब्द का हिंदी रूपांतरण है।… Continue reading बिंब (Image)