श्रीरामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि ‘पराधीन सपनेहुं सुख नाहीं’ यानी दूसरे के अधीन, परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ा व्यक्ति तो सपने में भी सुखी नहीं रह सकता। हमारा अतीत भी उस दर्द का साक्षी रहा है, जब इतिहास के एक लंबे कालखंड तक देश को गुलामी का दंश झेलना पड़ा। प्रधानमंत्री… Continue reading भारत की आजादी का अमृत महोत्सव
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बारीन्द्र नाथ घोस (स्वतंत्रता सेनानी तथा पत्रकार)
बारीन्द्र नाथ घोष भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार तथा ‘युगांतर’ के संस्थापको में से एक थे। वे ‘बारिन घोष’ के नाम से अधिक लोकप्रिय थे। बारिन घोस अध्यात्मवादी अरविंद घोष के छोटे भाई थे। बंगाल में क्रांतिकारी विचारधारा को फैलाने का श्रेय बारीन्द्र नाथ घोष और भूपेन्द्र नाथ दत्त को जाता है। भूपेन्द्र नाथ… Continue reading बारीन्द्र नाथ घोस (स्वतंत्रता सेनानी तथा पत्रकार)
मैना कुमारी (बाल वीरांगना)
सन् 1857 ई० के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सेनानियों का नेतृत्व नाना साहब पेशवा कर रहे थे। देश को आजाद कराने के लिए हजारों-लाखों क्रांतिकारियों ने अपने-अपने ढंग से अपनी-अपनी भूमिका निभाया था। उन्हीं में से एक क्रांतिकारी नाना साहेब पेशवा द्वितीय भी थे। वे 1857 के प्रथम शिल्पकार थे। इस दौरान नाना… Continue reading मैना कुमारी (बाल वीरांगना)
ढाई आखर का रहस्य
संत कबीरदास जी का यह दोहा हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं। पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सु पंडित होय।। इस ढाई अक्षर के रहस्य को हम समझ नहीं पाएँ हैं। कबीर का मानना था कि प्रेम तत्व ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है। सच्चा प्रेम ज्ञान… Continue reading ढाई आखर का रहस्य
महाप्रभु जगन्नाथ जी (श्री कृष्ण)
भगवान विष्णु के अवतारों में से एक अवतार श्रीकृष्ण का भी है। कृष्ण ने इस अवतार में भागवान विष्णु का विराट रूप धारण किया था लेकिन ऐसा माना जाता है कि श्रीकृष्ण के अंतिम संस्कार के बाद उनके शरीर का एक अंग नहीं जला था। कृष्ण का जन्म मथुरा में और उनका बचपन गोकुल में… Continue reading महाप्रभु जगन्नाथ जी (श्री कृष्ण)
महामृत्युंजय मंत्र की महिमा
ऋषि मृकण्ड भगवान भोलेनाथ के अनन्य भक्त थे। वे संतानहीन होने के कारण दुःखी रहा करते थे। मान्यता है कि विधाता ने उन्हें संतान के योग नही दिए थे। एक दिन ऋषि मृकण्ड ने सोंचा कि महादेव संसार के सभी विधान को बदल सकते हैं। इसलिए हमें भी भोलेनाथ को प्रसन्न करके इस विधान को… Continue reading महामृत्युंजय मंत्र की महिमा
ताश के बावन पत्तों का रहस्य
हम सब जानते हैं कि ताश के 52 पत्ते होते हैं। इन बावन पत्तों के साथ खेलकर लोग अपना मोरंजन करते हैं। सम्भव है बहुत से लोग ताश के बावन पत्तों की इस रोचक जानकारी से सहमत होंगे जिसे यहाँ मैं सबके साथ साझा करना चाहती हूँ। ताश का आधार वैज्ञानिक और प्रकृति से भी… Continue reading ताश के बावन पत्तों का रहस्य
ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं
अनेक बाहरी आक्रमणकारियों ने भारत पर राज करने के लिए, सबसे पहले हमारे भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म पर कुठाराघात किया। जिससे कि हम हिंदवासी अपनी संस्कृति को भूला कर उनकी पाश्चात्य संस्कृति को अपना ले। हमारी अपनी ही संस्कृति का पूर्णरूप से ज्ञान नहीं होने के कारण, हम भारतवासी 31 दिसंबर के रात्रि में… Continue reading ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं
हालावादी अप्रतिम कवि : हरिवंश राय बच्चन
भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला, कवि साक़ी बनकर आया है, भरकर कविता की प्याला; कभी न कण भर खाली होगा, लाख पिएँ, दो लाख पिएँ पाठक गण हैं पीनेवाले, पुस्तक मेरी मधुशाला!! आधुनिक काव्य में ‘हालावाद’ : आधुनिक काल में एक नई विचारधारा ‘हालावाद’ के प्रवर्तक हरिवंशराय राय बच्चन थे। हिन्दी साहित्य… Continue reading हालावादी अप्रतिम कवि : हरिवंश राय बच्चन
हिन्दी साहित्य के सन्दर्भ में पुरुष विमर्श : एक विवेचन
भूमिका- परिवर्तन, विकास, क्रांति ये प्रकृति के शाश्वत नियम हैं। हर युग में क्रांतियाँ और आंदोलन हुए हैं, आज भी हो रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे। जिसके फलस्वरूप व्यवस्था में परिवर्तन हुआ है और निरंतर विकास का मार्ग प्रसस्त होता रहा है। पृथ्वी पर जब से जीवन की उत्पत्ति हुई है, तब से… Continue reading हिन्दी साहित्य के सन्दर्भ में पुरुष विमर्श : एक विवेचन