महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (संस्मरण)

रचना – ठकुरी बाबा (संस्मरण)

रचनाकार – महादेवी वर्मा (1907 – 1987 ई.)

* महादेवी ने अपने रेखाचित्र में, अपने संपर्क में आनेवाले शोषित व्यक्तियों, दीन-हीन नारियों, साहित्यकारों, जीव-जंतुओं आदि का संवेगात्मक चित्रण किया है।

* महादेवी के रेखाचित्र में अनुभूति की अभिव्यक्ति, चित्र का बिंब-विधान और सूक्ति का प्रभाव एक साथ दिखाई देता है।

* ‘ठकुरी बाबा’ स्मृति की रेखाएँ (1943 ई) में संकलित है।

* सात संस्मरणों में से यह ‘ठकुरी बाबा’ पाँचवाँ संस्मरण है।  

स्मृति की रेखाएँ में संकलित निम्नलिखित संस्मरण हैं –

* भक्तिन, चीनीफेरीवाला, पर्वत पुत्र, मुन्नु की माई, ठकुरी बाबा, बिबिया, गुंगिया आदि है।

* ‘ठकुरी बाबा’ का चरित्र ग्रामीण वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। जिसे रसिया, बिरहा इत्यादि गाने, आल्हा, आलाप या नौटंकी आदि में भाग लेने और भाँति-भाँति के स्वांग रचने के कारण उन्हें समाज हेय दृष्टि से देखता है।

* लेखक का उद्देश्य भारतीय ग्रामीण समाज के सबसे दरिद्र, उत्पीड़ित लोगों के प्रति सहानुभूति जागृत करना है।

विशेष तथ्य:

* ठकुरी बाबा से महादेवी वर्मा की भेंट प्रयाग के कल्पवास के दौरान हुई थी।

* ठकुरी बाबा भाट वंश में पैदा हुए थे।

* ठकुरी बाबा के पुत्री का नाम बेला था।

* शादी के डेढ़ वर्ष बाद ही उनकी पत्नी का देहांत हो गया था।

* ठकुरी बाबा सैदपुर गाँव के रहने वाले थे, वहाँ से माघ मेला, प्रयाग 33 मिल दूर था।

ठकुरी बाबा संस्मरण के मुख्य पात्र:

      भक्तिन (महादेवी वर्मा की परिचारिका), वृद्धा ठकुराइन, सहुआइन, विधुर काछी, ब्राहमण दम्पत्ति।

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