हिन्दी साहित्य की गद्य विधा ‘आलोचना’ उद्भव और विकास (इकाई-2)

‘आलोचना’ शब्द की व्युत्पति ‘आ’ (उपसर्ग) ‘लोच्’ (धातु) ‘अन’ + ‘आ’ (प्रत्यय) = से मिलकर आलोचना शब्द बना है। जिसका अर्थ होता है देखना, व्याख्या करना, मूल्यांकन करना आदि। केवल गुण का मूल्यांकन करना प्रशंसा करना और केवल दोष का मूल्यांकन करना निंदा करना है। गुण और दोष दोनों का मूल्यांकन करना आलोचना कहलाता है।

आलोचना की परिभाषाएँ:

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के शब्दों में- “साहित्य जीवन की व्याख्या है तथा आलोचना साहित्य की व्याख्या है।”

श्यामसुन्दर दास के शब्दों में- “यदि हम जीवन को साहित्य की व्याख्या माने तो आलोचना उस व्याख्या की व्याख्या का पैमाना होगा।”

गुलाबराय के शब्दों में- “साहित्य और साहित्यकार के रहस्य को उद्घाटित करना आलोचना है।”

गंणपतिचंद्र गुप्त के शब्दों में- “किसी रचना एवं रचनाकाल का शास्त्रीय एवं निजी मान्यताओं के आधार पर मूल्यांकन सही समीक्षा है।”

आलोचना के निम्नलिखित भेद हैं

रसवादी आलोचना- किसी रचना या रचनाकार का मूल्यांकन करते समय रस को सर्वाधिक महत्व देना रसवादी आलोचना कहलाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल रसवादी श्रेणी के आलोचक हैं।

मार्क्सवादी आलोचना- कार्लमार्क्स के दृष्टिकोण से रचनाकार एवं रचना की समीक्षा अथार्त शोषितों एवं दलितों के प्रति योगदान के संदर्भ में किसी का मूल्यांकन करना मार्क्सवादी आलोचना है। रामविलास शर्मा, नामवर सिंह, प्रकाशचंद्र गुप्त इसी श्रेणी के आलोचना में आते हैं।  

सैद्धांतिक आलोचना – काव्यशास्त्र या साहित्यशास्त्र में किसी सिद्धांत का वर्तमान संदर्भों में मूल्यांकन करना सैद्धांतिक आलोचना कहलाता है। इस श्रेणी के मुख्य आलोचना गणपतिचंद्र गुप्त हैं। भागीरथ मिश्र और बाबू गुलाबराय भी इसी श्रेणी में आते हैं।

सौष्ठववादी आलोचना- किसी रचना या रचनाकार का मूल्यांकन करते समय कला पक्ष को सर्वाधिक महत्व देना सौष्ठववादी आलोचना है। इस श्रेणी के प्रमुख आलोचक नंददुलारे वाजपेयी हैं।  

तुलनात्मक आलोचना- दो रचनाकारों या रचनाओं के बीच परस्पर तुलना करते हुए समीक्षा करना तुलनात्मक आलोचना है। तुलनात्मक आलोचना के प्रमुख आलोचक पदम् सिंह शर्मा हैं।    

मनोवैज्ञानिक आलोचना- इसके अंतर्गत वे आलोचनाएँ आती हैं, जिनमे किसी रचना का मूल्यांकन रचनाकार की जाति वर्ग और उसके समाज के आधार पर किया जाता है। इस आलोचना पद्धति का आरंभ प्रसिद्ध इतिहासकार तैन ने किया था। यह हिन्दी आलोचना की मूल्य निधि है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीरदास और नाथपंथियों का मूल्यांकन इसी आलोचना पद्धति से किया है।

प्रभाववादी आलोचना- युग, समाज एवं साहित्य के प्रभाव छोड़ने की दृष्टि रचना और रचनाकार मूल्यांकन करना प्रभावशाली आलोचना कहलाता है। इस श्रेणी में मिश्र बंधु, शांतिप्रिय द्विवदी आते हैं।

संश्चेतानावादी आलोचना- नवीन दृष्टिकोण से रचना और रचनाकार का मूल्यांकन करना। इसमें सभी तरह के आलोचना शैलियों का मिश्रण होता है।

हिन्दी के प्रथम आलोचक:

गुलाबराय के अनुसार- “भारतेंदु हरिश्चंद्र के ‘नाटक’ (1883 ई०) को हिन्दी की पहली आलोचनात्मक रचना माना जाता है।”

डॉ बच्चन सिंह जी ने – “बालकृष्ण भट्ट को प्रथम आलोचक माना है। बालकृष्ण भट्ट ने ‘संयोगिता स्वंयवर, (श्रीनिवासदास नाटक 1885 ई०) की आलोचना हिन्दी प्रदीप में 1886 ई० में ‘सच्ची समालोचना’ शीर्षक नाम से किया था। (सर्वमान्य मत है।)

  • ‘पुस्तकाकार’ रूप में लिखी गई हिन्दी की पहली आलोचनात्मक
  • रचना- ‘हिन्दी कालिदास की आलोचना’
  • रचनाकाल- (1901 ई०)
  • रचनाकार- महावीर प्रसाद द्विवेदी थे, इसमें लाला सीताराम जी के द्वारा कालिदास के हिन्दी में अनुदित नाटकों की समीक्षा है।

हिन्दी आलोचना का विकासक्रम:

1. भारतेंदु युग

2. द्विवेदी युग (हिन्दी आलोचना का वास्तविक सूत्रपात)

3. शुक्ल युग

4. शुक्लोत्तर युग 

5. नयी समीक्षा / अदद्दतन समीक्षा

  1. भारतेंदु युग

भारतेंदु को आधुनिक हिन्दी आलोचना का जन्मदाता माना जाता है। भारतेंदु ने 1883 ई० में नाटक शीर्षक नाम से आलोचनात्मक ग्रंथ लिखा। इसी लेख से हिन्दी में सैद्धांतिक- समीक्षा का श्रीगणेश हुआ। भारतेंदु युग में ही बालकृष्ण भट्ट ने लाला श्रीनिवास दास के नाटक ‘संयोगिता स्वयंवर’ की समीक्षा अपने पत्र हिन्दी प्रदीप में किया।

भारतेंदु युग के आलोचक और उनके आलोचनात्मक ग्रंथ:

भारतेंदु – नाटक

जगन्नाथ प्रसाद – छंद प्रभाकर

प्रतापनारायण मिश्र – रस कुसुकुमार

शिवसिंह सेंगर – शिवसिंह सरोज

लल्लूलाल – लाल चन्द्रिका (बिहारी सतसई)

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔंध – रसकलस

बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’- संयोगता स्वयंवर

बालकृष्ण भट्ट – सच्ची समालोचना

  • द्विवेदी युग (हिन्दी आलोचना का वास्तविक सूत्रपात)

द्विवेदी युग में आलोचना की नई पद्धतियों के साथ-साथ व्यवहारिता का भी विकास हुआ।

निर्मला जैन के अनुसार- “द्विवेदी युग के आलोचक प्राचीन भारत के ज्ञान-विज्ञान की खोज करना चाहते थे और पश्चिम के स्वरुप को समझ कर अपने देश वासियों को अपने इस ज्ञान से परिचित करवाना चाहते थे।” द्विवेदी युग में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार के आलोचना पद्धतियों का विकास हुआ।

महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864 – 1838 ई०)

जन्म: 15 मई (1864 ई०), जिला रायबरेली 

निधन: 21 दिसंबर (1838 ई०)

नैषधचरित-चर्चा

हिन्दी कालिदास की समालोचना

कालिदास की निरंकुशता

आलोचनांजलि समुच्चय

साहित्यालाप

बाबू श्यामसुंदर दास (1875 – 1922 ई०)

जन्म: 15 जुलाई (1875 ई०) काशी

निधन: (1945 ई०)

साहित्यालोचन (1922 ई०)

भारतीय नाट्यशास्त्र (1926 ई०)

गोस्वामी तुलसीदास (1927 ई०)

हिन्दी भाषा और साहित्य (1930 ई०)

रूपक रहस्य(1931 ई०)

3. आचार्य शुक्ल युग (रसवादी आलोचक)

आचार्य रामचंद्र शुक्ल (1884 – 1941 ई०)

जन्म: 4 ऑक्तुबर (1884 ई०) अगोना, बसती जिला, उ.प्र.

निधन: (1941 ई०)

हिन्दी में वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा माना जाता है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पहली सैद्धांतिक आलोचना ‘काव्य में रहस्यवाद’ है।

इनके अन्य सैद्धांतिक समीक्षा संबंधी लेख ‘रस मीमांसा’ तथा ‘चिंतामणि’ (दो भागों) में संकलित हैं।

आचार्य शुक्ल की व्यावहारिक समीक्षा का प्रौढ़तम रूप ‘तुलसी’ ‘भ्रमरगीत’ और ‘जायसी ग्रंथावली’ की भूमिकाओं में मिलता है।

आलोचक और आलोचनात्मक ग्रंथ

आचार्य रामचंद्र शुक्ल–

तुलसी ग्रंथावली (1923 ई०)

जायसी ग्रंथावली (1925 ई०)

भ्रमरगीत-सार (1926 ई०)

हिन्दी साहित्य का इतिहास (1929 ई०)

रहस्य मीमांसा (1929 ई०)

काव्य में रहस्यवाद (1929 ई०)

त्रिवेणी (सूर,तुलसी जायसी)

डॉ० कृष्णशंकर शुक्ल – (1885 – 1976 ई०)

जन्म: (1885 ई०) काशी, उत्तर प्रदेश

निधन: (1976 ई०)

केशव की काव्य कला, कवि रत्नाकर

बाबु गुलाबराय – (1888 – 1963 ई०)

जन्म: 17 जनवरी (1888 ई०) जलेसर

निधन: 13 अप्रैल (1963 ई०) आगरा

महत्वपूर्ण आलोचनाएँ:

नवरस (1933 ई०)

हिन्दी साहित्य का सुबोध इतिहास (1940 ई०)

हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास (1943 ई०)

हिन्दी नाट्य विमर्श (1947 ई०)

आलोचना कुसुमांजलि, काव्य के रूप (1947 ई०)

सिधान्त और अध्ययन (1946 ई०)

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (1894 – 1971 ई०)

जन्म: 17 मई (1894 ई०) राजनांदगांव, छतीसगढ़

निधन: 28 दिसंबर (1971 ई०) रायपुर, छतीसगढ़

महत्वपूर्ण आलोचनाएँ:

हिन्दी साहित्य का विमर्श (1924 ई०)

विश्व साहित्य (1924 ई०)

हिन्दी कहानी साहित्य

हिन्दी उपन्यास साहित्य

प्रदीप (प्राचीन तथा अर्वाचीन कविताओं का आलोचनात्मक अध्ययन)

समस्या

समस्या और समाधान

पंचपात्र, पंचरात्र, नवरात्र

यदि मैं लिखता (कुछ प्रसिद्ध कृतियों पर कथात्मक विचार)

हिन्दी-साहित्य: एक ऐतिहासिक समीक्षा

विनय मोहन शर्मा – (1905 – 1993 ई०)

मूलनाम: पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी

इन्होंने ‘विरात्मा’ उपनाम नाम से भी कुछ कविताएँ लिखी हैं 

जन्म: 16 ओक्तुबर (1905 ई०) करकबेल, मध्य प्रदेश   

महत्वपूर्ण आलोचनाएँ:

हिन्दी को मराठी संतों की देन, कवि प्रसाद, आँसू तथा अन्य कृतियाँ

डॉ सत्येन्द्र (1958 ई०)

जन्म: 5 अगस्त (1958 ई०) उत्तर प्रदेश

महत्वपूर्ण आलोचनाएँ:

ब्रजलोक साहित्य का अध्ययन

प्रेमचंद और उनकी कहानी कला

गुप्त जी की कला

साहित्यिकी संचारिणी

विश्वनाथ प्रसाद मिश्र – (1906 – 1982 ई०)

जन्म: (1906 ई०) बनारस, उत्तर प्रदेश

निधन: 12 जुलाई (1982 ई०) काशी

महत्वपूर्ण आलोचनाएँ:

हिन्दी में नाट्य साहित्य का विकास

काव्यांग कौमुदी

बिहारी की वाग्विभूति

वांग्मय विमर्श

बिहारी

हिन्दी का सामयिक साहित्य

हिन्दी साहित्य का अतीत (2 भागों में)

तुलसी की साधना

बिहारी प्रकास

गोस्वामी तुलसीदास

फादर कामिल बुल्के – (1909 ई० – 1982 ई०)

जन्म: 1 सितंबर (1909 ई०) बेल्जियम

निधन: 17 अगस्त (1982 ई०) दिल्ली, भारत

महत्वपूर्ण आलोचनाएँ:

रामकथा और तुलसीसदास

रामकथा और हिन्दी

एक इसाई की आस्था

पीताम्बर दत्त बडथ्वाल – (1901 – 1944 ई०)

जन्म: 13 दिसंबर (1901 ई०), पौड़ी जनपद के लैंसडाउन से तीन किलोमीटर दूर कोडिया पट्टी के पाली ग्राम में हुआ था।

निधन: 24 जुलाई (1944 ई०) गढ़वाल, उत्तराखंड

पीताम्बर दत्त बडथ्वाल शोधवृति के समीक्षक थे।

इन्होंने योग ‘प्रवाह नामक’ ग्रंथ में सर्वप्रथम संत कवियों का संबंध नाथ सम्प्रदाय  

से जोड़ा। जिसका प्रभाव सभी समकालीन आलोचकों पर पड़ा।

पीताम्बर दत्त बडथ्वाल ने ‘संक्षिप्त रामचंद्रिका’ की भूमिका में केशवदास का बहुत ही विद्वतापूर्ण विवेचन किया है। 

4. शुक्लोत्तर युग- (1940 – अद्दतन)

शांतिप्रिय द्विवेदी (प्रभाववादी आलोचक)

जन्म: (1906 ई०) काशी

निधन: 27 अगस्त (1967 ई०)

हमारे साहिय निर्माता (1934 ई०)

कवि और काव्य (1936 ई०)  

साहित्यिकी (1938 ई०)

संचारिणी (1939 ई०)

युग और साहित्य (1941 ई०)

सामयिकी (1944 ई०)

धरातल (1948 ई०)

ज्योतिविहग (1951 ई०)

प्रतिष्ठान (1953 ई०)

साकल्य (1955 ई०)

पद्मनाभिका (1956 ई०)

आधान (1957 ई०)

वृंत और विकास (1959 ई०)

समवेत (1960ई०)

ये सभी शांतिप्रिय द्विवेदी जी के आलोचनात्मक पुस्तकें हैं निबंध नहीं

शांतिप्रिय द्विवेदी जी के आलोचनात्मक विशेषताएँ:

शांतिप्रिय द्विवेदी मूलतः ‘सौंदर्यवादी’ समीक्षक हैं, किन्तु  ‘युग और साहित्य’ में वे प्रगतिवाद का समर्थन करते हुए दिखाई देते है।

शांतिप्रिय द्विवेदी सौंदर्य को वस्तु में नहीं सामजिक मन में स्थित मानते है।

शांतिप्रिय द्विवेदी जी के छायावाद के समर्थक प्रभावशाली आलोचक है

गांधीवाद में इनकी आस्था थी

काव्य और कला के शाश्वत उपादानों का विश्लेषण

काव्य प्रवृतियों का की विवेचना

गद्य विधाओं की समुक्षा

संस्कृति और उसके उपादानों की व्याख्या

कवियों एवं लेखकों का व्यावहारिक मूल्यांकन

शांतिप्रिय द्विवेदी जी के महत्वपूर्ण कथन:

“कविता मनुष्यों की ही नहीं अपितु चराचर में व्याप्त प्रकृति की साँस है।”

“विज्ञान मस्तिष्क का चरम उत्कर्ष है, काव्य हृदय का परम उत्थान है।”

“कला साहित्य का बाह्य रूप है और जीवन उसका अंतः स्वरुप, कला अभिव्यक्ति है और जीवन अभिव्यक्त है।”

“कविता अंतर्जगत् की वाणी और भावनाओं का सुघरतम रूप है।”

आचार्य नंददुलारे वाजपेयी (सौष्ठववादी आलोचक)

जन्म: (1906 ई०) मगरायपुर उन्नाव (उ. प्र.)

निधन: (1967 ई०)

आलोचनात्मक रचनाएँ:

जयशंकर प्रसाद (1940 ई०)

हिन्दी साहित्य: बीसवीं शताब्दी (1942 ई०)

प्रेमचंद (1942 ई०)

आधुनिक साहित्य (1950 ई०)

महाकवि सूरदास (1952 ई०)

नया साहित्य (1955 ई०)

महाकवि निराला (1965 ई०)

नयी कविता (1973 ई०)

कवि सुमित्रानंदन पंत (1976 ई०)

रस सिद्धांत (1977 ई०)

साहित्य का आधुनिक युग (1978 ई०)

आधुनिक साहित्य सृजन और समीक्षा (1978 ई०)

रीति और शैली (1979ई०)

आचार्य नंददुलारे वाजपेयी की आलोचनात्मक विशेषताएँ:

समन्वयशीलता (प्राचीन एवं नवीन, भारतीय एवं पाश्चात्य काव्य सिद्धान्तों में समन्वय)

स्वच्छन्दतावादी एवं सौष्ठववादी समीक्षक

प्रसाद, पंत, निराला एवं छायावाद के समर्थ आलोचक

रचनात्मक क्रियाशील जनतंत्र पर बल दिया

प्राचीन कवियों में सूरदास को सबसे ज्यादा महत्व दिया

सामजिक मानव जीवन एवं स्वरुप के समर्थक थे

विश्वम्भरनाथ उपाध्याय (मार्क्सवादी, प्रगतिवादी, साम्यवादी आलोचक)

जन्म: (1925 ई०)

निधन: (2008 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

पंतजी का नूतन काव्य और दर्शन (पहली, 1955 ई०)

हिन्दी की दार्शनिक पृष्ठभूमि (1957 ई०)

निराला की साहित्यिक साधना (1958 ई०)

आधुनिक कविता सिद्धांत और समीक्षा (1960 ई०)

कबीरदास (1961 ई०)

समकालीन सिद्धांत और साहित्य (1973 ई०)

जलते और उबलते प्रश्न (1976 ई०)

स्वातंत्र्योतर कथा साहित्य (1978 ई०)

भारतीय काव्यशास्त्र का द्वंदात्मक आलोक में (1980 ई०)

मीमांसा और पुनर्मूल्यांकन (1986 ई०)

समकालीन मार्क्सवाद (1987 ई०)

सिद्धसरहपा (2004 ई०)

भारतीय काव्यशास्त्र का इतिहास (2005 ई०)

शिवकुमार मिश्र (मार्क्सवादी, प्रगतिवादी आलोचक)

जन्म: (1930 ई०) महोली कानपुर (उ. प्र.)

निधन: (2013 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

कामायनी और प्रसाद की कविता गंगा (1954 ई०)

वृंदावनलाल वर्मा उपन्यास और कला (1956 ई०)

नया हिन्दी काव्य (1962 ई०)

आधुनिक हिन्दी कविता: युग और द्रष्टि (1966 ई०)

प्रगतिवाद (1966 ई०)

मार्क्सवादी साहित्य चिंतन: इतिहास तथा सिद्धांत (1973 ई०)

यथार्थवाद (1975 ई०)

साहित्य और सामाजिक संदर्भ (1977 ई०)

प्रेमचंद विरासत का सवाल (1981 ई०)

दर्शन साहित्य और समाज (1981 ई०)

भक्तिकाल और लोकजीवन (1983 ई०)  

हिन्दी आलोचना की परंपरा और रामचंद्र शुक्ल (1986 ई०)

आलोचना के प्रगतिशील आयाम (1987 ई०)

मार्क्सवाद देव मूर्तियाँ नहीं गढ़ता (2005 ई०)

साहित्य इतिहास और संस्कृति (2010 ई०)

सांप्रदायिक और हिन्दी उपन्यास (1915 ई०)

विश्वनाथ त्रिपाठी

जन्म: (1931 ई०) 

निधन: (नहीं हुआ)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

लोकवादी तुलसीदास (1974 ई०)

मीरा का काव्य (1979 ई०) 

देश के इस दौड़ में (1998 ई०)

कुछ कहानियाँ: कुछ विचार (1998 ई०)

हरिशंकर परसाई (2007 ई०)

केदारनाथ अग्रवाल का रचनालोक (2013 ई०)

उपन्यास का अंत नहीं हुआ है (2015 ई०)

कहानी के साथ-साथ (2016 ई०)

आलोचना का सामाजिक दायित्व (2016 ई०)

शम्भुनाथ

जन्म: 21 मई (1948 ई०) देवघर झारखण्ड

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

दिनकर कुछ पुनर्विचार (1976 ई०)

साहित्य और जन संधर्ष (1980 ई०)

तीसरा यथार्थ (1984 ई०)

मिथक और आधुनिक कविता (1985 ई०)

बौद्धिक उपनिवेशवाद की चुनौति और रामचंद्र शुक्ल (1988 ई०)  

प्रेमचंद्र का पुनर्मूल्यांकन (1988 ई०) 

दूसरे नवजागरण की ओर (1993 ई०) 

धर्म का दुखांत (2000 ई०) 

संस्कृति की उत्तर कथा (2000 ई०) 

दुस्समय में साहित्य (2002 ई०) 

हिन्दी नवजागरण और संस्कृति (2004 ई०) 

सभ्यता से संवाद (2008 ई०) 

रामविलास शर्मा (2011 ई०) 

भारतीय अस्मिता और हिन्दी (2012 ई०) 

कवि की नई दुनिया (2013 ई०) 

राष्ट्रीय पुनर्जागरण और रामविलास शर्मा (2013 ई०) 

उपनिवेश और हिन्दी आलोचना (2014 ई०) 

हिन्दी उपन्यास: राष्ट्र और हसिया (2016 ई०)

डॉ बच्चन सिंह (नई समीक्षा से संबंधित)

जन्म: (1919 ई०) जौनपुर (उ. प्र)

निधन: (2008 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

हिन्दी नाटक (1954 ई०)

रीतिकालीन कवियों की प्रेम व्यंजना (1956 ई०)

बिहारी का नया मूल्यांकन (1957 ई०)

समकालीन साहित्य की आलोचना और चुनौति (1968 ई०)

आलोचक और आलोचना (1970 ई०)

आधुनिक हिन्दी साहित्य का इतिहास (1978 ई०)

आधुनिक हिन्दी आलोचना के बीज-शब्द (1983 ई०)

साहित्य का समाजशास्त्र और रुपवाद (1984 ई०)

भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन (1987 ई०)

आचार्य शुक्ल का इतिहास बढ़ते हुए (1989 ई०)

कथाकार जैनेन्द्र (1993 ई०)

हिन्दी साहित्य का दूसरा इतिहास (1996ई०)

उपन्यास का काव्यशास्त्र (2008 ई०)

रामस्वरूप चतुर्वेदी (नई समीक्षा से संबंधित आलोचक)

जन्म: (1931 ई०) कानपुर

निधन: (2003 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

हिन्दी नवलेखन (1960 ई०)

भाषा और संवेदना (1964 ई०)

अज्ञेय और आधुनिक रचना की समस्या (1968 ई०)

हिन्दी साहित्य की अधुनातन प्रवृतियाँ (1969 ई०)

कामायनी का पुनर्मूल्यांकन (1970 ई०)

मध्यकालीन हिन्दी काव्य भाषा (1974 ई०)

कविता यात्रा रत्नाकर से अज्ञेय तक (1976 ई०)

सर्जन और भाषिक संरचना (1980 ई०)

इतिहास और आलोचक दृष्टि (1982 ई०)

हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास (1986 ई०)

काव्य भाषा पर तीन निबंध (1989 ई०)

प्रसाद, निराला और अज्ञेय (1989 ई०)

कविता का पक्ष (1994 ई०)

हिन्दी गद्य विन्यास और विकास (1996 ई०)

आधुनिक कविता यात्रा (1998 ई०)

आचार्य रामचंद्र शुक्ल: आलोचना का अर्थ और अर्थ की आलोचना (2001 ई०)

भक्ति क्काव्य यात्रा (2002 ई०)

डॉ नगेन्द्र (1915 – 1999 ई०)

(ये रसवादी माने जाते हैं)

जन्म: 9 मार्च (1915 ई०), अतरौली अलीगढ़

निधन: 27 ऑक्तुबर (1999 ई०)

  • शुक्लोत्तर युग में सैद्धांतिक समीक्षा के क्षेत्र में डॉ नगेन्द्र का सर्वोत्तम स्थान है।
  • डॉ. नगेन्द्र पाश्चात्य आलोचकों में ‘आई.ए.रिचर्ड्स’ और ‘क्रोचे’ से विशेष प्रभावित थे।
  • डॉ नगेन्द्र हिन्दी आलोचन के क्षेत्र में सर्वाधिक समर्थ लेखक थे
  • इनका साहित्यिक जीवन कवि के रूप में आरम्भ हुआ
  • इनकी पहली काव्य संग्रह ‘वनबाला’ (1937 ई०) में प्रकाशित हुआ  
  • उन्होंने समीक्षा का आरम्भ छायावाद पर स्फुट निबंध किया।
  • 1937 ई० में उनका पहला निबंध ‘सुमित्रानंदन पंत’ ‘हंस में’ प्रकाशित हुआ।
  • इन्होंने फ्रायड के मनोविश्लेषण शास्त्र के आधार पर नाटक और नाटककारों की आलोचनाएँ लिखी।

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

सुमित्रानंदन पंत (1938 ई०)

साकेत: एक अध्ययन (1939 ई०)

आधुनिक हिन्दी नाटक (1940 ई०)

विचार और विवेचन (1944 ई०)

रीतिकाव्य की भूमिका (1949 ई०)

देव और उनकी कविता (1949 ई०)

विचार और अनुभूति (1949 ई०)

आधुनिक हिन्दी कविता की मुख्य प्रवृतियाँ (1951ई०)

विचार और विश्लेषण (1955 ई०)

भारतीय काव्यशास्त्र की भूमिका (1955 ई०)

अरस्तु का काव्यशास्त्र (1957 ई०)

काव्य में उदात्त तत्व (1958 ई०)

अनुसंधान और आलोचना (1961 ई०)

कामायनी के अध्ययन की समस्याएँ (1962 ई०)

रस सिद्धांत (1964 ई०)

आलोचना की आस्था (1966 ई०)

आस्था के चरण (1968 ई०)

नयी समीक्षा नए संदर्भ आस्था के चरण (1970 ई०)

भारतीय सौंदर्यशास्त्र की भूमिका (1972 ई०)

काव्य बिम्ब (1976 ई०)

चेतना के बिम्ब (1976 ई०)

शैली विज्ञान (1976 ई०)

मिथक और साहित्य (1979 ई०)

साहित्य का समाजशास्त्र (1982 ई०)

भारतीय समीक्षा और आचार्य शुक्ल की काव्यदृष्टि (1985 ई०)

मैथिलीशरण गुप्त का काव्य: पुनर्मूल्यांकन (1986 ई०)

प्रसाद और कामायनी: मूल्यांकन का प्रश्न (1990 ई०)

डॉ नामवर सिंह (1926 – 2019 ई०)

जन्म: 28 जुलाई (1926 ई०) जीयनपुर, चंदौली (उ.प्र.)

निधन: 19 फ़रवरी (2019 ई०) नई दिल्ली

डॉ० नामवर सिंह रुपवाद या कलावाद के खतरों के प्रति उतने ही सचेत है जितने आचार्य रामचंद्र शुक्ल

‘रेने वेलक’ और ‘एफ. आर. लीविस’ की तरह डॉ. नामवर सिंह भी सिद्धांतशास्त्री न होकर आलोचक है। जिनके लिए आलोचना आस्वाद भी है, सार्थक विश्लेषण और मूल्यांकन भी।

डॉ. नामवर सिंह के शब्दों में- “सौंदर्यशास्त्र मार्क्सवाद के मूल में है, उसका बाई-प्रोडक्ट नहीं है, फ़ोकट का माल नहीं है।”

‘एक साहित्य की डायरी’ की समीक्षा में डॉ नामवर सिंह ने स्पष्ट किया है जो नई कविता निम्न वर्ग के जीवन-संघर्ष को यथार्थ के धरातल पर व्यक्त करती है, उसके केन्द्र में ‘अज्ञेय’ नहीं ‘मुक्तिबोध’ है।

दूसरी परंपरा की खोज में डॉ नामवर सिंह ने पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी पर विचार के बहाने भारतीय संस्कृति की लोकोन्मुक्ति क्रांतिकारी परम्परा को खोजने का प्रयास किया है।

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग (1952 ई०)

छायावाद (1955 ई०)

इतिहास और आलोचना (1957 ई०)

आधुनिक साहित्य की प्रवृतियाँ (1962 ई०)

कहानी: नई कहानी (1965 ई०)

कविता के नए प्रतिमान (1968 ई०) साहित्य अकादमी पुरस्कार 1971 ई० में मिला

दूसरी परम्परा की खोज (1982 ई०)

वाद-विवाद-संवाद (1989 ई०)

आलोचना के मुख से (2005 ई०)

प्रमुख्य तथ्य:

नामवर सिंह की आलोचना जीवन्त आलोचना है भले ही लोग सहमत हो अथवा असहमत लेकिन उनकी कभी उपेक्षा नहीं हुई।

हिन्दी आलोचक के ‘शकाला’ पुरुष थे।

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ (1917 – 1664 ई०)

जन्म: 13 नवंबर (1917 ई०) श्योरपुर, (म.प्र.)

निधन: 11 सितंबर (1964 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

कामायनी: एक पुनर्विचार (1961 ई०)

नयी कविता आत्मसंघर्ष (1964 ई०)

नए साहित्य का सौंदर्यशास्त्र (1971 ई०)

डॉ० शिवदान सिंह चौहान (1918 – 2000 ई०)

जन्म: 15 मार्च (1918 ई०)

निधन: 29 अगस्त (2000 ई०), आगरा, उ. प्र.

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

प्रगतिवाद (1946 ई०)

साहित्य की परख (1946 ई०)

हिन्दी साहित्य के अस्सी वर्ष (1954 ई०)

साहित्यानुशीलन (1955 ई०)

आलोचना के मान (1958 ई०)

साहित्य की समस्याएँ (1958 ई०)

परिप्रेक्ष्य को सही करते हुए (1999 ई०)

इलाचंद्र जोशी (1908 -1982 ई०)

जन्म: 13 दिसंबर (1908 ई०)

निधन: (1982 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

साहित्य सर्जना (1940 ई०)

विवेचना (1943 ई०)

विश्लेषण (1954 ई०)

साहित्य चिंतन (1954 ई०)

देखा-परखा (1957 ई०)

प्रकाशचंद्र गुप्त (1908 – 1970 ई०)

जन्म: 16 मार्च (1908 ई०), भक्कर पाकिस्तान

निधन: (1970 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

नया हिन्दी साहित्य (1941 ई०)

आधुनिक हिन्दी साहित्य: एक दृष्टि (1952 ई०)

हिन्दी साहित्य की जनवादी परंपरा (1953 ई०)

साहित्य धारा (1955 ई०)

नयी समीक्षा  

सच्चितान्न्द हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (1911 – 1987 ई०)

जन्म: 7 मार्च (1911 ई०) कुशीनगर जिला

निधन: 4 अप्रैल (1987 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

त्रिशंकु (1945 ई०)

आत्मनेपद (1960 ई०)

भवन्ति (1971 ई०)

अद्दतन (1971 ई०)

गजानन माधव मुक्तिबोध (1917 – 1964 ई०)

जन्म: 13 नवंबर (1917 ई०), चंबल संभाग

निधन: 11 सितंबर (1964 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

नयी कविता का आत्मसंघर्ष

भारत: इतिहास और संस्कृति

कामायनी: एक पुनर्विचार   

गिरजा कुमार माथुर (1919 – 1994 ई०)

जन्म: 22 अगस्त (1919 ई०), जिला, गुणा (म. प्र.)

निधन: 10 जनवरी (1994 ई०) नई दिल्ली

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

नयी कविता: सीमाएँ और संभावनाएँ (1966 ई०)

इसमें कविता की आलोचना उन्होंने “अस्वीकृति का नवोन्मेष” नामक निबंध में लिखा।   

शमशेरबहादुर सिंह (1911 – 1993 ई०)

जन्म:13 जनवरी (1911 ई०), देहरादून

निधन: 12 मई (1993 ई०) अहमदाबाद

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

दोआब (1947 ई०)

शमशेर बहादुर सिंह की कुछ गद्य रचनाएँ (1989 ई०)

कुछ और गद्य रचनाएँ (1992 ई०) 

धर्मवीर भारती (1926 – 1997 ई०)

जन्म: 25 दिसंबर (1926 ई०), प्रयागराज

निधन: 4 सितंबर (1997 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

प्रगतिवाद: एक समीक्षा

मानव मूल्य और साहित्य

नलिन विलोचन शर्मा (1916 – 1961 ई०)

जन्म: 18 फ़रवरी (1916 ई०), पटना

निधन: 12 सितंबर (1961 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

मानदंड (1963 ई०)

हिन्दी उपन्यास: विशेषतः प्रेमचंद (1968 ई०)

साहित्य: तत्व और आलोचना (1995 ई०)

नेमिचंद्र जैन (1919 – 2005 ई०)

जन्म: 16 अगस्त (1919 ई०), आगरा

निधन: (2005 ई०)

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

अधूरे साहित्यकार (1966 ई०)

रंगदर्शन (1967 ई०)

बदलते परिप्रेक्ष्य (1968 ई०)

जनांतिक (1981 ई०)

भारतीय नाट्य परंपरा (1989 ई०)

दृश्य अदृश्य (1993 ई०)

रंगपरंपरा (1996 ई०)

रंगकर्म की भाषा (1996 ई०)

तीसरा पाठ (1998 ई०)

विजय देव नारायण साही (1924 – 1982 ई०)

जन्म: 7 ऑक्तुबर (1924 ई०), काशी

निधन: 5 नवंबर (1982 ई०) इलाहबाद

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

छठवाँ दशक (1987 ई०)

साहित्य क्यों? (1988 ई०)

लघु मानव के बहाने हिन्दी कविता पर एक बहस (1960-61 ई०)

मैनेजर पाण्डेय

जन्म: 23 सितंबर (1941 ई०), बिहार, गोपालगंज, गाँव ‘लोहटी’

प्रमुख आलोचनात्मक रचनाएँ:

साहित्य और इतिहास दृष्टि (1981 ई०)

शब्द और कर्म (1981 ई०)

साहित्य के समाजशास्त्र की भूमिका (1989 ई०)

भक्ति आन्दोलन और सूर के काव्य (1993 ई०) आलोचना और सामाजिकता (2000 ई०)

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