सुंदर विचार
असाध्य वीणा – स.ही.वा. अज्ञेय | Asadhya Veena – S.H.V Agyeya
प्रथम रश्मि – सुमित्रानंदन पंत | Pratham Rashmi – Sumitra Nandan Pant
आँसू – जयशंकर प्रसाद | Ansoo | आँसू | Jaishankar Prasad
दलित साहित्य
'मुर्दहिया'-तुलसीराम (आत्मकथा) एक समीक्षा 'दलित' वर्ग के लिए भारतीय समाज में अनेक शब्दों का प्रयोग किया जाता रहा है। जैसे- शूद्र, अछूत, बहिष्कृत, अंत्यज, पददलित, दास, दस्यु, अस्पृश्य, हरिजन आदि। दलित शब्द का शब्दिक अर्थ है- मसला हुआ, रौंदा या कुचला हुआ, नष्ट किया हुआ, दरिद्र और पीड़ित, दलित वर्ग का व्यक्ति। 'संक्षिप्त हिंदी… Continue reading दलित साहित्य
रिपोर्ताज
'रिपोर्ताज' गद्य-लेखन की एक विधा है। हिंदी में रिपोर्ताज को 'सूचनिका' और 'रूपनिका' भी कहा जाता है। परन्तु इसका प्रचलित शब्द 'रिपोर्ताज' है। रिपोर्ताज 'फ़्रांसिसी' भाषा का शब्द है। फ़्रांस में यह शब्द अंग्रेजी के 'रिपोर्ट' शब्द के आधार पर द्वितीय विश्व युद्ध के समय बनाया गया। रिपोर्ताज की परिभाषाएँ: हिंदी साहित्य कोश के अनुसार-… Continue reading रिपोर्ताज
सिद्ध साहित्य
आदिकालीन साहित्य: आदिकालीन साहित्य केकाव्य की निम्नलिखित धाराएँ हैं - 1. सिद्ध साहित्य 2. नाथ साहित्य 3. रास साहित्य 4. रासों साहित्य 5. लौकिक साहित्य 6. गद्य साहित्य 7. अपभ्रंश साहित्य सिद्ध साहित्य- परिभाषा- आदिकाल में बौद्ध धर्म की महायान शाखा के वज्रयानी कवियों द्वारा अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए जो साहित्य जनभाषा… Continue reading सिद्ध साहित्य
नाथ साहित्य
परिभाषा- आदिकाल में भगवान 'शिव' के उपासक भक्त कवियों के द्वारा जनभाषा में जिस साहित्य की रचना की गई या हुई उसे नाथ साहित्य के नाम से जाना जाता है। नाथ संप्रदाय को सिद्धों की परंपरा का विकसित रूप माना जाता है। नाथ साहित्य के प्रवर्तक गोरखनाथ को माना जाता है। इनकी साधना सिद्ध साधना… Continue reading नाथ साहित्य





