सुंदर विचार
देखें भी तो कैसे (कविता) || Dekhen Bhi to Kaise || Senior Citizen Home
परिवर्तन – सुमित्रानंदन पंत, भाग-1 | Parivartan – Sumitra Nandan Pant
आदिकाल प्रश्नोत्तरी – भाग-4 ।। Aadikal Prashnottari Part-4
मनुष्य हूँ – नागार्जुन ।। Manushya Hoon – Nagarjun
शासन की बंदूक – नागार्जुन ।। Shasan Ki Bandook – Nagarjun
खुरदरे पैर – नागार्जुन ।। Khurdare Pair – Nagarjun
पिता
‘माँ’ विश्व की अद्भूत और अनोखी देन है क्योंकि वह अपने बच्चों को नौ महीनों तक कोख में रखकर पालती-पोषती है और उसे इस नयी दुनिया से परिचित करवाती है। यानी उसे जन्म देती है, उसे अपना दूध पिलाकर उस पौधा रूपी बालक को सींचती और संवारती हैं। उसी प्रकार पिता का भी स्थान हमारे… Continue reading पिता
दादी
वृद्धाश्रम इस नाम को सुनकर ना तो किसी को बुरा लगता है, और ना ही कोई आश्चर्य होता है, अब तो आदत सी पड़ गई है। फौजी महेश्वर सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी के दो बच्चे थे। एक बेटा और एक बेटी भगवान ने उनकी दोनों मनोकामना पूरी कर दी थी। दोनों बहुत खुश थे।… Continue reading दादी







