Author: इंदु सिंह
खुरदरे पैर – नागार्जुन ।। Khurdare Pair – Nagarjun
पिता
‘माँ’ विश्व की अद्भूत और अनोखी देन है क्योंकि वह अपने बच्चों को नौ महीनों तक कोख में रखकर पालती-पोषती है और उसे इस नयी दुनिया से परिचित करवाती है। यानी उसे जन्म देती है, उसे अपना दूध पिलाकर उस पौधा रूपी बालक को सींचती और संवारती हैं। उसी प्रकार पिता का भी स्थान हमारे… Continue reading पिता
दादी
वृद्धाश्रम इस नाम को सुनकर ना तो किसी को बुरा लगता है, और ना ही कोई आश्चर्य होता है, अब तो आदत सी पड़ गई है। फौजी महेश्वर सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी के दो बच्चे थे। एक बेटा और एक बेटी भगवान ने उनकी दोनों मनोकामना पूरी कर दी थी। दोनों बहुत खुश थे।… Continue reading दादी
हरी घास पर क्षण भर – स.ही.वा. अज्ञेय | Hari Ghas Par Kshan Bhar – SHV Agyeya
कितनी नावों में कितनी बार – स.ही.वा. अज्ञेय | Kitani Navon Men Kitani Bar
असाध्य वीणा – स.ही.वा. अज्ञेय | Asadhya Veena – S.H.V Agyeya
प्रथम रश्मि – सुमित्रानंदन पंत | Pratham Rashmi – Sumitra Nandan Pant
आँसू – जयशंकर प्रसाद | Ansoo | आँसू | Jaishankar Prasad
दलित साहित्य
'मुर्दहिया'-तुलसीराम (आत्मकथा) एक समीक्षा 'दलित' वर्ग के लिए भारतीय समाज में अनेक शब्दों का प्रयोग किया जाता रहा है। जैसे- शूद्र, अछूत, बहिष्कृत, अंत्यज, पददलित, दास, दस्यु, अस्पृश्य, हरिजन आदि। दलित शब्द का शब्दिक अर्थ है- मसला हुआ, रौंदा या कुचला हुआ, नष्ट किया हुआ, दरिद्र और पीड़ित, दलित वर्ग का व्यक्ति। 'संक्षिप्त हिंदी… Continue reading दलित साहित्य






