रेखाचित्र (Drawing, Sketch)

हिंदी साहित्य के गद्य में अनेक विधाएँ हैं। रेखाचित्र गद्य साहित्य की आधुनिक विधा है। इस विधा में लेखक रेखाचित्र के माध्यम से शब्दों का ढाँचा तैयार करता है। लेखक किसी सत्य घटना की वस्तु का या व्यक्ति का चित्रात्मक भाषा में वर्णन करता है। इसमें शब्द चित्रों का प्रयोग आवश्यक होता है। रेखाचित्रकारों में महादेवी वर्मा, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’, बनारसीदास चतुर्वेदी, रामवृक्ष बेनीपुरी और डॉ० नागेंद्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

‘रेखाचित्र’ शब्द अंग्रेजी के ‘स्कैच’ शब्द का हिंदी अनुवाद है। यह दो शब्दों ‘रेखा’ और ‘चित्र’ के मिलने से बना है। जैसे ‘स्कैच’ के माध्यम से किसी व्यक्ति या वस्तु का चित्र प्रस्तुत किया जाता है, ठीक उसी तरह शब्द रेखाओं के माध्यम से किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को उसके समग्र रूप में पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। ये व्यक्तित्व वे होते है जिनसे लेखक किसी न किसी रूप में प्रभावित रहा हो या जिनसे लेखक की घनिष्टता अथवा समीपता हो।

परिभाषा- “रेखाचित्र किसी व्यक्ति, वस्तु, घटना या भाव का कम से कम शब्दों में मर्मस्पर्शी भावपूर्ण एवं सजीव अंकन है।” रेखाचित्र एक भावप्रधान रचना है, जिसमे एक ही वस्तु विषय का भावपूर्ण, मार्मिक एवं प्रभावी किन्तु शाब्दिक रेखाओं में अंकन होता है। रेखाचित्र के मुख्यतः पाँच प्रकार माने गए हैं। वर्णात्मक, संस्मरणात्मक, चरित्रप्रधान, मनोवैज्ञानिक और व्यंग्यात्मक आदि। हिन्दी के प्राख्यात रेखाचित्रकार श्रीराम शर्मा थे।

बनारसीदास चतुर्वेदी के शब्दों में- “संस्मरण, रेखाचित्र और आत्मचरित इन तीनों में एक दुसरे से इतना घनिष्ठ संबंध है कि एक की सीमा-दूसरे से कहाँ मिलती हैं और कहाँ अलग हो जाती है? इसका निर्णय करना कठिन है।”

लेखक रेखाचित्र और वर्ष  

पदमसिंह शर्मा:      पदमपराग (1929 हिन्दी का प्रथम रेखाचित्र संग्रह )

श्रीराम शर्मा:  बोलती प्रतिमा (1937), प्राणों का सौदा (1939), जंगल के जीव (1949),

वे जीते कैसे है? (1957)

महादेवी वर्मा: अतीत के चलचित्र (1941), स्मृति के रेखाएँ (1947), पथ के साथी (1956),

स्मारिका (1971), मेरा परिवार (1972)

बनारसी दास चतुर्वेदी:  हमारे अराध्य (1952), रेखाचित्र (1952), सेतुबंध (1962),

बनारसी दास का पहला रेखाचित्र ‘औरंगजेब’ (1919 में प्रकाशित हुआ)

रामवृक्ष बेनीपुरी: लालतारा (1938), माती की मूरतें (1946), गेहूँ और गुलाब (1950),

मील के पत्थर (1957)

प्रकाशचंद्र गुप्त:      रेखाचित्र (1940), पुरानी स्मृतियाँ (1947)

विनयमोहन शर्मा:    रेखा और रंग (1955)

कन्हैयालाल मिश्र:    ‘प्रभाकर’ भूले हुए चहरे (1953), जिंदगी मुसकराई (1953), माटी हो गई सोना (1959), दीप जले शंख बजे (1959), बाजे पायलिया के घुंघरू (…), क्षण बोले कण मुस्काए (…)

डॉ नागेंद्र:    चेतना के बिम्ब (1967)

उपेन्द्रनाथ अश्क: रेखाएँ और चित्र (1955), मंटो मेरा दुश्मन (1956)

देवेन्द्र सत्यार्थी:  रेखाएँ बोल उठीं (1949)

वृन्दालाल वर्मा:  हल्कू (…)

शिवपूजन सहाय: वे दिन वे लोग (1946)

सेठ गोविन्ददास:  स्मृतिकण (1959), चेहरे जाने पहचाने (1966)

विष्णु प्रभाकर: जाने-अनजाने (1962), कुछ शब्द कुछ रेखाएँ (1965), हँसते निर्झर:दहकती भट्ठी

माखनलाल चतुर्वेदी: समय के पाँव (1962)

जगदीश चन्द्र माथुर: दस तस्वीरें (1962), जिन्होंने जीना जाना (1971)

गुलाबराय: ठलुआ क्लब

डॉ रामविलास शर्मा: पंचरत्न, विरामचिन्ह

डॉ रांगेय राघव: पाँच गदहे

कृष्णा सोबती: हम हाश्मद (2000)

सत्यवती मल्लिक: अमित रेखाएँ

प्रतापनारायण टंडन: रेखाचित्र

महेंद्र भटनागर: विकृत रेखाएँ; धुँधले चित्र (1966)

ओंकार शरद: ‘लंका माहाराजिन (1950)

कैलाशनाथ काटजू: मैं भूल नहीं सकता (1955)

संपूर्णानंद:  कुछ स्मृतियाँ और स्फुट विचार (1962)

हरिभाऊ उपाध्याय: मेरे हृदयदेव (1965)

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