सुंदर विचार

बंग महिला की ‘दुलाईवाली’ (कहानी)

बंग महिला की कहानी ‘दुलाईवाली’ का मुख्य बिंदु और सारांश : हिन्दी की प्रथम कहानीकार राजेन्द्र बाला घोष (छद्दम नाम- बंग महिला) श्रीमती राजेन्द्र बाला घोष का जन्म 1882 ई० में बनारस में और मृत्यु 1912 में हुआ था। बंग महिला घोष द्वारा लिखित ‘दुलाईवाली’ कहानी 1907 की ‘सरस्वती’ पत्रिका के  भाग-8, संख्या 5 में… Continue reading बंग महिला की ‘दुलाईवाली’ (कहानी)

राजेन्द्रबाला घोष (बंग महिला) की ‘चंद्रदेव से मेरी बातें’ (कहानी)

‘चंद्रदेव से मेरी बातें’ कहानी – राजेन्द्रबाला घोष (बंग महिला) की समीक्षा और पात्र परिचय -  लेखिका का परिचय- हिन्दी की प्रथम कहानीकार श्रीमती राजेन्द्र बाला घोष (छद्दम नाम- बंग महिला) का जन्म 1882ई० में बनारस में हुआ था। बंग महिला हिंदी- नवजागरण की पहली छापामार लेखिका थी। उनके पिता का नाम रामप्रसन्न घोष और… Continue reading राजेन्द्रबाला घोष (बंग महिला) की ‘चंद्रदेव से मेरी बातें’ (कहानी)

धनतेरस

 धनतेरस कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष के ‘त्रयोदशी’ तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। कई जगहों पर इसे ‘जमदियारी’ भी कहते हैं। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान… Continue reading धनतेरस

उस पीढ़ी के लोग

हम उस पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन को हर मुश्किलों में जीते हुए यहाँ तक पहुंचा है। शायद हमारे पूर्वजों ने इसतरह के दिन नहीं देखें होंगे जो हम देख रहे हैं। हमने जो अपने जीवन में देखा है हमारे बच्चों ने उसे नहीं देखा और आने वाली पीढ़ियाँ भी उसे नहीं देखेंगी।… Continue reading उस पीढ़ी के लोग

लोकोक्तियाँ (proverbs)

‘लोकोक्ति’ दो शब्दों के मेल से बना है - ‘लोक+उक्ति’। लोक का अर्थ होता है ‘लोक’ और ‘उक्ति’ का अर्थ होता है ‘कथन’। अथार्त लोक में प्रचलित उक्ति या कथन। लोकोक्ति के रचनाकार का पता नहीं होता है। इसलिए अंग्रेजी में इसकी परिभाषा दी गई है - ‘A proverb is a saying without an author’।… Continue reading लोकोक्तियाँ (proverbs)

रामरस (नमक) salt

हमारे जीवन में रामरस का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। जिस प्रकार राम के बिना जीवन अधूरा है। उसी प्रकार रामरस के बिना भोजन अधूरा है। हम चाहे जितना भी जायकेदार भोजन बना ले और उसमे नमक नहीं डाले तो भोजन का जायका ही बिगड़ जाता है। नमक रसोईघर की सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है। यह… Continue reading रामरस (नमक) salt

नमस्कार का मीठा फल

‘नमस्कार’ या ‘प्रणाम’ करना ‘संस्कार’ और ‘सम्मान’ दोनों है। प्रणाम एक यौगिक और मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया भी है। भारत में दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार और प्रणाम करने की परम्परा रही है। नमस्कार करने से सामने वाला व्यक्ति अपने आप विनम्र हो जाता है। ‘नमस्कार’ ‘नमः’ धातु से बना है। नमः का अर्थ होता है ‘नमन करना’… Continue reading नमस्कार का मीठा फल

सुशीला (संस्मरण)

सावन का महीना था। गांव में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखाई दे रही थी। कभी रिमझिम हल्की सी फुहार, कभी जोर से बरसात, कभी काली घटाओं का घिरना और चले जाना तो कभी बिजली कड़कना और जोर से बरसना। ये सभी प्राकृतिक क्रियाएं मन को बहुत ही लुभा रही थी। गाँव के सभी लोग… Continue reading सुशीला (संस्मरण)

खुद्बुदी चिरैया

प्रकृति का हर प्राणी, हर जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में एक दूसरे पर निर्भर हैं। हमारे देश में पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियाँ पाई जाती है। गौरया उनमे एक छोटी सी चिड़िया है। यह एक घरेलू चिड़िया है। जहाँ लोग रहते है, वही पर यह नन्हीं चिड़िया रहना पसंद करती है। गौरया मानव के… Continue reading खुद्बुदी चिरैया

ईश्वर के नाम पत्र

हे परमेश्वर!   चरण स्पर्श  हे प्रभू! बहुत दिनों से मेरे मन में कुछ विचार आ रहे थे। मन बहुत ही चिंतित और व्याकुल था। मैं अपने अंतर्मन की बात किससे कहूँ। यह समझ में नहीं आ रहा था। लोगों से कहने पर वे तो हँसेंगे या मजाक उड़ाएंगे। रहीम कवि ने कहा था- “रहिमन… Continue reading ईश्वर के नाम पत्र