सुंदर विचार

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – बांधों न नाव इस ठाँव बंधु (कविता)

‘बाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु!’ कविता निराला जी के ‘अर्चना’ कविता संग्रह में संकलित है। ‘अर्चना’ का प्रकाशन 1950 में हुआ था। ‘बाँधो न नाव इस ठाँव बंधु!’ कविता में कवि ‘डलमऊ’ के पक्के घाट पर गुंबद के नीचे बैठकर अपनी पत्नी को याद करके यह कविता लिखते हैं। कवि नाविक को अपनी नाव… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – बांधों न नाव इस ठाँव बंधु (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- जागो फिर एक बार (कविता)

‘जागो फिर एक बार’ कविता के रचयिता सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी है। निराला जी की यह कविता ‘परिमल’ कविता संग्रह में संकलित है। जिसका प्रकाशन 1930 में हुआ था। इस कविता में कवि ने भारत के अतीत का गौरवमय चित्रण किया है। इसी संदर्भ में कवि भारतियों को जागते रहने का संदेश देते हुए कहते… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- जागो फिर एक बार (कविता)

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’-अंधरे में (कविता)

हिन्दी साहित्य की लम्बी कविताओं में गजानन माधव मुक्तिबोध जी की कविता ‘अंधेरे में’ का विशेष स्थान है। ये कविता मुक्तिबोध की श्रेष्ठतम कविताओं में से एक है। इसकी रचना मुक्तिबोध जी ने राजनांद गाँव में रहते हुए किया था। वे उस समय वहीं पर दिग्विजय कॉलेज में व्याख्याता के तौर पर कार्य कर रहे… Continue reading गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’-अंधरे में (कविता)

महेशदास उर्फ़ बीरबल (कहानी)

अकबर हमेशा अपने टेढ़े-मेढ़े सवालों से बीरबल को फ़साने का प्रयास किया करता था। परन्तु बीरबल अपनी चतुराई से अकबर की टोपी घुमाकर उसी को पहना दिया करते थे। अकबर खुद तो पढ़ालिखा नहीं था लेकिन उसके दरवार में योग्य और बुद्धिमान दरवारी थे, जिन्हें अकबर के नवरत्नों के नाम से जाना जाता था। उसके… Continue reading महेशदास उर्फ़ बीरबल (कहानी)

अज्ञेय – यह दीप अकेला (कविता)

‘यह दीप अकेला’ कविवर अज्ञेय जी की प्रसिद्ध कविताओं में से एक है। अज्ञेय एक मनोविश्लेषणवादी और व्यक्तिवादी कवि हैं। इस कविता का प्रकाशन एवं संकलन नई दिल्ली ‘आल्पस कहवा घर’ में (18 ऑक्तुबर 1953) ‘बावरी अहेरी’ नामक कविता संग्रह में किया गया है। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज दोनों एक… Continue reading अज्ञेय – यह दीप अकेला (कविता)

अज्ञेय – कलगी बाजरे की (कविता)

‘कलगी बाजरे की’ कविता अज्ञेय जी की प्रसिद्ध कविताओं में से एक है। यह कविता ‘हरि घास में क्षण भर’ काव्य संग्रह से लिया गया है। इसका प्रकाशन 1949 में हुआ था। इस कविता में कवि ने अपनी प्रेमिका की तुलना तारा, कुमुदनी या चम्पे की कली जैसी पुराने प्रतीकों को छोड़कर ‘चिकनी हरि घास’… Continue reading अज्ञेय – कलगी बाजरे की (कविता)

अज्ञेय–असाध्य वीणा (कविता)

प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक ‘अज्ञेय’ जी ने अपनी सभी विधाओं में अद्भूत प्रयोगात्मक प्रगति का परिचय दिया है। साहित्य सृजन के क्षेत्र में अज्ञेय जी ने एक साथ कवि, कथाकार, आलोचक, संपादक आदि विविध रूपों में साहित्य प्रेमियों को चौकाया तथा व्यावहारिक जगत में भी उन्होंने फोटोग्राफी, चर्म-शिल्प, पर्वतारोहन आदि से भी लोगों… Continue reading अज्ञेय–असाध्य वीणा (कविता)

एक रहस्मय कुआँ (अगम कुआँ)

बिहार की राजधानी पटना एक खुबसूरत ऐतिहासिक शहर है। पहले इसे पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। पटना दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। एक समय ऐसा भी था जब पटना की गिनती सबसे बड़े शहरों में होती थी। मौर्यकाल में पटना पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। इसी शहर… Continue reading एक रहस्मय कुआँ (अगम कुआँ)

महुआ (लेख)

पेड़-पौधे हम सभी जीव-जंतुओं के लिए प्रकृति के तरफ से दिया गया अनमोल उपहार है। इसके बिना हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। यह हमें जीवनदायनी वायु ऑक्सीजन से हमारा भरण-पोषण भी करती हैं। हम यह सब जानते हुए भी अपने सुख के लिए इन्हें उजाड़ रहे हैं। अर्थात हम जिस डाली पर… Continue reading महुआ (लेख)

पलाश के फूल

पलाश ‘फबासी’ परिवार का एक फूल है, जिसका वैज्ञानिक नाम ‘ब्यूटिया मोनोस्पर्मा’ है। इस फूल को इसके आकर्षक सुर्ख लाल रंग के कारण इसे ‘जंगल का आग’ भी कहा जाता है। पलाश का यह फूल उत्तर प्रदेश का ‘राज्य पुष्प’ है। इस पुष्प को ‘भारतीय डाकतार विभाग’ के द्वारा डाक टिकट पर प्रकाशित कर सम्मानित… Continue reading पलाश के फूल