ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं

अनेक बाहरी आक्रमणकारियों ने भारत पर राज करने के लिए, सबसे पहले हमारे भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म पर कुठाराघात किया। जिससे कि हम हिंदवासी अपनी संस्कृति को भूला कर उनकी पाश्चात्य संस्कृति को अपना ले। हमारी अपनी ही संस्कृति का पूर्णरूप से ज्ञान नहीं होने के कारण, हम भारतवासी 31 दिसंबर के रात्रि में… Continue reading ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं

हालावादी अप्रतिम कवि : हरिवंश राय बच्चन

भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला, कवि साक़ी बनकर आया है, भरकर कविता की प्याला; कभी न कण भर खाली होगा, लाख पिएँ, दो लाख पिएँ पाठक गण हैं पीनेवाले, पुस्तक मेरी मधुशाला!! आधुनिक काव्य में ‘हालावाद’ : आधुनिक काल में एक नई विचारधारा ‘हालावाद’ के प्रवर्तक हरिवंशराय राय बच्चन थे। हिन्दी साहित्य… Continue reading हालावादी अप्रतिम कवि : हरिवंश राय बच्चन

हिन्दी साहित्य के सन्दर्भ में पुरुष विमर्श : एक विवेचन

भूमिका- परिवर्तन, विकास, क्रांति ये प्रकृति के शाश्वत नियम हैं। हर युग में क्रांतियाँ और आंदोलन हुए हैं, आज भी हो रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे। जिसके फलस्वरूप व्यवस्था में परिवर्तन हुआ है और निरंतर विकास का मार्ग प्रसस्त होता रहा है। पृथ्वी पर जब से जीवन की उत्पत्ति हुई है, तब से… Continue reading हिन्दी साहित्य के सन्दर्भ में पुरुष विमर्श : एक विवेचन

हिन्दी भाषा के विकास में दक्षिण भारतीय लेखकों का योगदान

भाषा का कोई रंग, रूप, जाति या आकर नहीं होता है। इसे तो सिर्फ सुनकर, समझकर महसूस किया जा सकता है। हिन्दी भारत की एकमात्र ऐसी भाषा है, जिसे भारत के अधिकांश लोग जानते और समझते हैं। यह पूरे भारत की सम्पर्क भाषा है। हिन्दी भाषा अघोषित राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि राज्य भाषा और संपर्क… Continue reading हिन्दी भाषा के विकास में दक्षिण भारतीय लेखकों का योगदान

विषय: आत्मनिर्भर भारत ‘अवसर और चुनौतियाँ’

“जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा” राजेन्द्र कृष्ण जी का लिखा हुआ यह गीत सुनकर हमें लगता है कि आखिर भारत को किसकी नजर लग गई। इस ‘सोने की चिड़िया’ की जगह अब प्लास्टिक की चिड़िया पेड़ों को शोभायमान करने लगी है। यह सत्य है कि भारत… Continue reading विषय: आत्मनिर्भर भारत ‘अवसर और चुनौतियाँ’

जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद

भारतीय इतिहास में शंकराचार्य सबसे श्रेष्ठतम दार्शनिक थे। उन्होंने अद्वैतवाद को प्रचलित किया। उन्होंने उपनिषदों, श्रीमद्भागवत गीता एवं ब्रह्मसूत्र पर ऐसे भाष्य लिखे जो दुर्लभ हैं। वे अपने समय के उत्कृष्ट विद्वान एवं दार्शनिक थे। शंकराचार्य का जन्म ढ़ाई हजार साल पूर्व दक्षिण भारत के केरल में हुआ था। शंकराचार्य ने पूरे भारत की यात्रा… Continue reading जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद

चन्द्रमा का ‘पुत्र मोह’

महाभारत को धर्म युद्ध भी कहा जाता है लेकिन महाभारत पूर्णरूप से धर्मयुद्ध न होकर कर्मयुद्ध भी था। महाभारत से जुड़ी बहुत सी बातें हैं जो अपने आप में एक रहस्य हैं। भगवान होते हुए भी श्री कृष्ण अपने प्रिय अर्जुन और अपनी बहन सुभद्रा के पुत्र ‘अभिमन्यु’ को युद्ध में नहीं बचा पाए? उसे… Continue reading चन्द्रमा का ‘पुत्र मोह’

शकुनी के ‘पासा’ का रहस्य

महाभारत युद्ध होने के कई कारण थे। इसका मुख्य कारण कौरवों की उच्च महत्वाकांक्षाएँ और धृतराष्ट्र का पुत्र मोह के साथ शकुनी का ‘प्रण’ था। शकुनी चौसर के खेल में जिन पासों का प्रयोग करता था। वह मामूली पाशा नहीं था जिससे वह हमेशा अपनी चाल में सफल होता था। इन पासों के साथ जुड़ी… Continue reading शकुनी के ‘पासा’ का रहस्य

महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में ही क्यों हुआ?

कुरुक्षेत्र युद्ध कौरवों और पाण्डवों के मध्य कुरु साम्राज्य के सिंहासन की प्राप्ति के लिए लड़ा गया था। इस युद्ध में दोनों तरफ से करोड़ो योद्धा मारे गए थे। यह संसार का सबसे भीषण युद्ध था। भविष्य में ऐसा युद्ध होने की कोई संभावना नहीं है। महाभारत के अनुसार इस युद्ध में भारत के प्रायः सभी… Continue reading महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में ही क्यों हुआ?

चरणामृत और पंचामृत

चरणामृत मंदिर में या घर पर जब भी कोई पूजा-पाठ होती है, तो चरणामृत या पंचामृत जरुर दिया हैं। मगर बहुत लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। ‘चरणामृत’ का अर्थ है, भगवान के चरणों का अमृत जल। पंचामृत का अर्थ है पांच अमृत यानि पांच पवित्र वस्तुओं से बना… Continue reading चरणामृत और पंचामृत