प्राचीन गुरुकुल पद्धति और गुरु-शिष्य परम्परा

भारत में गुरुकुल शिक्षा पद्धति की बहुत लंबी परंपरा रही है। शिक्षा से संबंधित प्राचीन भारत का दर्शन किसी एक ग्रंथ में सीमित नहीं है। विद्यार्थी गुरुकुल में विद्या अध्ययन करते थे। तपोस्थली में सभा, सम्मेलन और प्रवचन हुआ करते थे। विशेषज्ञों द्वारा परिषद में शिक्षा दी जाती थी। प्राचीन भारत के गुरुकुलों में ऋषियों… Continue reading प्राचीन गुरुकुल पद्धति और गुरु-शिष्य परम्परा

‘संत गुरुनानक देवजी’ का हिन्दी साहित्य को योगदान

भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्णिम काल कहा जाता है। हिन्दी साहित्य में गुरुनानक निर्गुण धारा के ज्ञानश्रयी शाखा से संबंधित थे। भक्तिकाल के साहित्य का उद्देश्य सर्वउत्थान था। उनकी कृति के संबंध में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘हिन्दी साहित्य के इतिहास’ में लिखा है कि भक्तिभाव से पूर्ण होकर वे जो भजन गाया करते… Continue reading ‘संत गुरुनानक देवजी’ का हिन्दी साहित्य को योगदान

कदम का फूल ‘BUTTER FLOWER TREE’ (लेख)

‘कदम’ का नाम आते ही सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘कदम का पेड़’ की याद आ जाती है। उन्होंने इस कविता में बालक के मन की इच्छा को चित्रित किया है। जो कन्हैया बनकर कदंम के पेड़ पर खेलना चाहता है। बालक माँ से कहता है-   “यह  कदम  का पेड़ अगर माँ होता यमुना… Continue reading कदम का फूल ‘BUTTER FLOWER TREE’ (लेख)

महेशदास उर्फ़ बीरबल (कहानी)

अकबर हमेशा अपने टेढ़े-मेढ़े सवालों से बीरबल को फ़साने का प्रयास किया करता था। परन्तु बीरबल अपनी चतुराई से अकबर की टोपी घुमाकर उसी को पहना दिया करते थे। अकबर खुद तो पढ़ालिखा नहीं था लेकिन उसके दरवार में योग्य और बुद्धिमान दरवारी थे, जिन्हें अकबर के नवरत्नों के नाम से जाना जाता था। उसके… Continue reading महेशदास उर्फ़ बीरबल (कहानी)

एक रहस्मय कुआँ (अगम कुआँ)

बिहार की राजधानी पटना एक खुबसूरत ऐतिहासिक शहर है। पहले इसे पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। पटना दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। एक समय ऐसा भी था जब पटना की गिनती सबसे बड़े शहरों में होती थी। मौर्यकाल में पटना पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। इसी शहर… Continue reading एक रहस्मय कुआँ (अगम कुआँ)

महुआ (लेख)

पेड़-पौधे हम सभी जीव-जंतुओं के लिए प्रकृति के तरफ से दिया गया अनमोल उपहार है। इसके बिना हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। यह हमें जीवनदायनी वायु ऑक्सीजन से हमारा भरण-पोषण भी करती हैं। हम यह सब जानते हुए भी अपने सुख के लिए इन्हें उजाड़ रहे हैं। अर्थात हम जिस डाली पर… Continue reading महुआ (लेख)

पलाश के फूल

पलाश ‘फबासी’ परिवार का एक फूल है, जिसका वैज्ञानिक नाम ‘ब्यूटिया मोनोस्पर्मा’ है। इस फूल को इसके आकर्षक सुर्ख लाल रंग के कारण इसे ‘जंगल का आग’ भी कहा जाता है। पलाश का यह फूल उत्तर प्रदेश का ‘राज्य पुष्प’ है। इस पुष्प को ‘भारतीय डाकतार विभाग’ के द्वारा डाक टिकट पर प्रकाशित कर सम्मानित… Continue reading पलाश के फूल

यात्रावृतांत (Travelogue)

यात्रावृतांत किसी स्थान में बाहर से आये व्यक्ति या व्यक्तियों के अनुभवों के बारे में लिखे वृतांत को कहते है। इसका प्रयोग पाठक मनोरंजन के लिए या फिर उसी स्थान में स्वयं यात्रा के लिए जानकारी प्राप्त करने के लिए करते है। हिन्दी में यात्रावृतांत लिखने की परम्परा सूत्रपात भारतेंदु युग से माना जाता है।… Continue reading यात्रावृतांत (Travelogue)

प्राकृतिक चिकत्सा और गाँधी जी

कोई नहीं समस्या जिसका, समाधान न हो योग से, सतयुग  में वापसी हो सकती है, योग के प्रयोग से  प्रस्तावना- प्राकृतिक चिकित्सा, चिकित्सा के साथ एक जीवन पद्धति भी है। जिसमे प्राकृतिक विधि-विधानों के द्वारा मानव के शरीर में होने वाले रोगों का उपचार किया जाता है। यह चिकित्सा पद्धति आज की सभी चिकित्सा पद्धतियों… Continue reading प्राकृतिक चिकत्सा और गाँधी जी

कृष्णा सोबती कृत ‘सिक्का बदल गया’ (कहानी)

कृष्णा सोबती कृत ‘सिक्का बदल गया’ कहानी की समीक्षा और अध्ययन कृष्णा सोबती का संक्षिप्त परिचय- (जन्म 18 फरवरी 1925 - 25 जनवरी 2018) कृष्णा सोबती का जन्म 18 फरवरी, 1925 को पंजाब के शहर गुजरात में हुआ था। जो अब पाकिस्तान में है। विभाजन के बाद वे दिल्ली आकर बस गई थी। इन्होने पचास… Continue reading कृष्णा सोबती कृत ‘सिक्का बदल गया’ (कहानी)