Author: इंदु सिंह
छायावाद पर आधारित प्रश्नोत्तरी भाग-3 ।। Chhayavad par adharit prshn
आलोचना का अर्थ, परिभाषा, स्वरुप तथा साहित्य और आलोचना के अंतःसंबंध
'आलोचना' शब्द 'लोच्' धातु से बना है, लोच् का अर्थ है देखना। अतः आलोचना का अर्थ है 'देखना'। किसी वस्तु या कृति की सम्यक् व्याख्या, उसका मूल्याङ्कन आदि करना आलोचना ही आलोचना है। साहित्य के विश्व प्रसिद्ध आलोचक 'रोमन याकोब्सन' ने कहा था- "अगर मनुष्य ना होता, तब भी यह दुनिया होती। इसी… Continue reading आलोचना का अर्थ, परिभाषा, स्वरुप तथा साहित्य और आलोचना के अंतःसंबंध
छायावाद पर आधारित प्रश्नोत्तरी भाग-2 ।। Chhayavad par adharit prshn
सगुण भक्ति की विशेषताएँ तथा सूरदास और तुलसीदास
ईश्वर की 'सगुण' और 'साकार' रूप में विश्वास करने वाले भक्त कवियों को 'सगुण' भक्ति का नाम दिया गया है। वैष्णव भक्ति के उद्भव के साथ ही सगुण भक्तिधारा विकसित हो गई थी। भक्ति प्राचीनकालीन भारतीय वैदिक भक्ति का हि विकसित रूप है। 'सगुण' का अर्थ होता है परमसत्ता के सभी गुणों से संपन्न।… Continue reading सगुण भक्ति की विशेषताएँ तथा सूरदास और तुलसीदास
हिंदी गद्य के उद्भव और विकास
हिंदी साहित्य का आधुनिक काल भारत के इतिहास के बदलते हुए स्वरूप से प्रभावित था। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीयता की भावना का प्रभाव साहित्य पर भी पड़ा। भारत में औद्योगीकरण का प्रारंभ होने लगा था। आवागमन के साधनों का विकास हुआ। अंग्रेज़ी और पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव बढ़ा और जीवन में बदलाव आने लगा। भावना… Continue reading हिंदी गद्य के उद्भव और विकास






