मीरा का जीवन परिचय: कृष्ण भक्ति शाखा की महान हिन्दी कवयित्री मीरा का जन्म और मृत्यु दोनों ही विवादास्पद है।डॉ नगेन्द्र के अनुसार- मीरा का जन्म 1498 ई० में हुआ था।मीरा का निधन - 1558-1563 ई० के बीच हुआ होगा ऐसा माना जाता है।आचार्य रामचंद्र शुक्ल - मीरा का जन्म 1573 ई० मानते है।मीरा का… Continue reading मीरा पदावली (संपादक विश्वनाथ त्रिपाठी) पद : प्रारंभ से 20 तक, इकाई – 05
Author: इंदु सिंह
रानी बाघेली का त्याग
जिस तरह मेवाड़ राज्य की स्वामिभक्त पन्ना धाय अपने दूध पिते पुत्र का बलिदान देकर चितौड़ के राजकुमार की हत्या होने से बचा लिया था। ठीक उसी तरह राजस्थान के मारवाड़ (जोधपुर) राज्य के नवजात राजकुमार अजीतसिंह को औरंगजेब से बचाने के लिए मारवाड़ राज्य के बलुन्दा की रहने वाली रानी बाघेली ने अपनी नवजात… Continue reading रानी बाघेली का त्याग
विद्यापति की पदावली (संपादक- डॉ नरेन्द्र झा) पद सं 1-25 तक : इकाई – 5
विद्यापति का जन्म मधुबनी (बिहार) के बिपसी गाँव में हुआ था।इनका जन्म 14वीं -15वीं शदी के मध्य माना जाता है।कुछ विद्वानों के अनुसार- जन्मकाल (1350-1450) माना जाता है।इनके पितामह जयदत्त संत थे। वे योगेश्वर नाम से विख्यात थे। गुरु का नाम - पंडित हरि मिश्र था।पत्नी का नाम- चंदादेवी (चंपती) देवी था। ये तिरहुत… Continue reading विद्यापति की पदावली (संपादक- डॉ नरेन्द्र झा) पद सं 1-25 तक : इकाई – 5
सूरदास भ्रमरगीतसार (सं रामचंद शुक्ल – इकाई 5) पद संख्या 21- 70 तक
‘भ्रमरगीत सार’ आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा सम्पादित महाकवि सूरदास के पदों का संग्रह है। उन्होंने सूरदास के भ्रमरगीत से लगभग 400 पदों को छांटकर भ्रमरगीतसार के रूप में प्रकाशित किया था। आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद दिवेदी और श्यामसुन्दरदास के अनुसार- सूरदास का जन्म: 1474 ई० ‘रुनकता’ नामक गाँव में हुआ था। डॉ नगेन्द्र, डॉ… Continue reading सूरदास भ्रमरगीतसार (सं रामचंद शुक्ल – इकाई 5) पद संख्या 21- 70 तक
रामचरितमानस – तुलसीदास (उत्तरकाण्ड – इकाई 5)
तुलसीदास भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि कवि हैं। भारतीय संस्कृति को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कवि तुलसीदास हैं। अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔंध’ ने तुलसीदास जी के संबंध में लिखा है- “कविता करके तुलसी न लसै। कविता पा लसी तुलसी की कला।। राम को भज अमर न हुए तुलसी। तुलसी को पा अमर है रामलला”।। तुलसीदास… Continue reading रामचरितमानस – तुलसीदास (उत्तरकाण्ड – इकाई 5)
प्राचीन गुरुकुल पद्धति और गुरु-शिष्य परम्परा
भारत में गुरुकुल शिक्षा पद्धति की बहुत लंबी परंपरा रही है। शिक्षा से संबंधित प्राचीन भारत का दर्शन किसी एक ग्रंथ में सीमित नहीं है। विद्यार्थी गुरुकुल में विद्या अध्ययन करते थे। तपोस्थली में सभा, सम्मेलन और प्रवचन हुआ करते थे। विशेषज्ञों द्वारा परिषद में शिक्षा दी जाती थी। प्राचीन भारत के गुरुकुलों में ऋषियों… Continue reading प्राचीन गुरुकुल पद्धति और गुरु-शिष्य परम्परा
‘संत गुरुनानक देवजी’ का हिन्दी साहित्य को योगदान
भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्णिम काल कहा जाता है। हिन्दी साहित्य में गुरुनानक निर्गुण धारा के ज्ञानश्रयी शाखा से संबंधित थे। भक्तिकाल के साहित्य का उद्देश्य सर्वउत्थान था। उनकी कृति के संबंध में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘हिन्दी साहित्य के इतिहास’ में लिखा है कि भक्तिभाव से पूर्ण होकर वे जो भजन गाया करते… Continue reading ‘संत गुरुनानक देवजी’ का हिन्दी साहित्य को योगदान
फिर लौटूंगी (कविता)
सतरंगी रंगों की निशां देकर चली गई होली। अपनी निशान छोड़कर चली गई होली। दो दिन की खुशियाँ देकर चली गई होली। अगले वर्ष फिर आउंगी कह गई होली। ‘कोरोना’ से बचकर रहना फिर खेलने आऊँगी होली।
कैसे कहूँ? (कविता)
हँसकर आँसू छुपा लेती हूँ मुस्कुराकर दर्द सह लेती हूँ रात गम में गुजार लेती हूँ दिल को कैसे समझाऊं? सुनते तो सब हैं मुझे अपनी बात को कैसे बताऊँ? कोशिश तो की थी सुनाने की लेकिन किसी को कैसे सुनाऊं?
कदम का फूल ‘BUTTER FLOWER TREE’ (लेख)
‘कदम’ का नाम आते ही सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘कदम का पेड़’ की याद आ जाती है। उन्होंने इस कविता में बालक के मन की इच्छा को चित्रित किया है। जो कन्हैया बनकर कदंम के पेड़ पर खेलना चाहता है। बालक माँ से कहता है- “यह कदम का पेड़ अगर माँ होता यमुना… Continue reading कदम का फूल ‘BUTTER FLOWER TREE’ (लेख)