आदिकाल (रास/जैन साहित्य) : इकाई- 2

12वीं शताब्दी से 13वीं शताब्दी के मध्य जैन कवियों के द्वारा जो साहित्य अपने धर्म के प्रचार-प्रसार करने के लिए जन-भाषा में लिखा गया, उसे रास साहित्य के नाम से जाना जाता है। रास का अर्थ: जिसमे नृत्य, संगीत, क्रीड़ा, खेल आदि की प्रधानता हो उसे रास कहते है। रास शब्द का उल्लेख सबसे पहले… Continue reading आदिकाल (रास/जैन साहित्य) : इकाई- 2

आदिकाल (नाथ साहित्य) : इकाई- 2

परिभाषा: आदिकाल में भगवान शिव के उपासक कवियों के द्वारा जनभाषा में जिस साहित्य की रचना की गई उसे नाथ साहित्य के नाम से जाना जाता है। ‘नाथ’ शब्द के ‘ना’ का अर्थ ‘अनादि’ और ‘थ’ का अर्थ ‘भूवनत्रय’ होता है। इस प्रकार नाथ शब्द का अर्थ है- वह अनादि धर्म, जो भूवनत्रय के स्थिति… Continue reading आदिकाल (नाथ साहित्य) : इकाई- 2

आदिकाल (सिद्ध साहित्य) : इकाई- 2

बौद्धधर्म अनेक शाखाओं-प्रशाखाओं में विभाजित हुआ। महायान और हीनयान। महायान शाखा से वज्रयान और सहजयान शाखाएँ पनपी। सहजयान के अनुयायी सिद्ध कहलाए। सिद्ध शब्द से अभिप्राय है- साधना में दक्ष साधक। जिन्होंने विलक्षण सिद्धियाँ प्राप्त कर लिया हो। वह अपनी मंत्र शक्ति से चमत्कार पैदा कर सकता है वही सिद्ध है। बौद्धधर्म महात्मा बुद्ध के… Continue reading आदिकाल (सिद्ध साहित्य) : इकाई- 2

आदिकालीन काव्य की धाराएँ: इकाई- 2

 आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने आदिकाल के काव्य को पाँच भागों में बाँटा है: 1.रासो साहित्य, चारण साहित्य, वीरगाथात्मक साहित्य   2. रास साहित्य/जैन साहित्य 3. सिद्ध साहित्य/ बौद्ध साहित्य 4. नाथ साहित्य /शैव साहित्य 5. लौकिक साहित्य 6. अपभ्रंश प्रभावित हिन्दी की रचनाएँ रासो साहित्य: आदिकाल में चारण कवियों के द्वारा अपने आश्रयदाता राजाओं की… Continue reading आदिकालीन काव्य की धाराएँ: इकाई- 2

हिन्दी साहित्य का काल विभाजन और नामकरण इकाई- 2

काल विभाजन: काल (समय) के आधार पर: आदिकाल, पूर्व मध्यकाल, उत्तरमध्य काल, आधुनिक काल। प्रवृति के आधार पर: वीरगाथा काल, भक्ति काल, रीतिकाल, गद्यकाल। साहित्यकार के नाम पर: भारतेन्दु युग, दिवेदी युग। सुधार आंदोलन के आधार पर: पुनर्जागरण काल, जागरण सुधार काल। विभिन्न इतिहासकारों के द्वारा किया गया हिन्दी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन … Continue reading हिन्दी साहित्य का काल विभाजन और नामकरण इकाई- 2

हिन्दी साहित्य का इतिहास (इकाई-2)

इतिहास शब्द की व्युत्पति संस्कृत भाषा के तीन शब्दों से (इति+ह+आस) हुआ है। ‘इति’ का अर्थ है ‘जैसा हुआ वैसा ही’ ‘ह’ का अर्थ है, ‘सत्य या सचमुच’ तथा ‘आस’ का अर्थ है, ‘निश्चित घटित होना’। अथार्त जो घटनाएँ अतीत काल में निश्चित रूप से घटी है, वही इतिहास है।’ इतिहास का अर्थ- इतिहास दो… Continue reading हिन्दी साहित्य का इतिहास (इकाई-2)

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (उर्वशी- तृतीय अंक) इकाई-5

उर्वशी: यह रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित एक काव्य नाटक है। यह 1961 ई० में प्रकाशित हुआ था। इस काव्य में दिनकर ने उर्वशी और पुरुरवा के प्राचीन आख्यान को एक नये अर्थ से जोड़ना चाहा है। इसके लिए 1972 ई० में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। इस कृति में पुरुरवा और उर्वशी दोनों अलग-अलग तरह की प्यास लेकर आये हैं। पुरुरवा धरती पुत्र है और उर्वशी देवलोक… Continue reading रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (उर्वशी- तृतीय अंक) इकाई-5

जायसी ग्रंथावली (संपादक- रामचंद्र शुक्ल) ‘नागमती वियोग खंड’ (इकाई- 5)

मलिक मुहम्मद जायसी भक्तिकाल के निर्गुण प्रेमाश्रयी धारा के कवि थे। जायसी का जन्म सनˎ1500ई० के आसपास माना जाता है। वे उत्तर प्रदेश में ‘जायस’ स्थान के रहने वाले थे। उन्होंने स्वयं इस दोहे में कहा है, “जायस नगर मोर अस्थानू। नगरक नांव आदि उदयानू। तहाँ देवस दस पहुने आएउं। भा वैराग बहुत सुख पाएऊँ।।” … Continue reading जायसी ग्रंथावली (संपादक- रामचंद्र शुक्ल) ‘नागमती वियोग खंड’ (इकाई- 5)

‘कितनी नावों में कितनी बार’ (कविता) – सच्चितानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (इकाई-5)

यहकविता अज्ञेय जी की 1962 से 1966 के बीच की रचित कविताओं का संग्रह है। इस कविता के लिए उन्हें (1978) में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस कविता में कवि ने यह स्पष्ट किया है कि व्यक्ति कई बार सत्य की खोज में भटक जाता है। वह सत्य को अपने पास खोजने… Continue reading ‘कितनी नावों में कितनी बार’ (कविता) – सच्चितानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (इकाई-5)

‘हरि घास पर क्षण भर’ (कविता) –सच्चितानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (इकाई-5)

‘हरि घास पर क्षण भर’ अज्ञेय जी की एक प्रमुख कविता संग्रह है। इस कविता संग्रह में ‘हरि घास पर क्षण भर’ भी एक कविता है। यह कविता इलाहाबाद में 14 औक्तुबर 1949 में रची गई थी। अज्ञेय प्रयोगवादी कवि थे अतः उनकी कविताओं में प्रयोग का होना स्वाभाविक है। यह कविता अज्ञेय की नई… Continue reading ‘हरि घास पर क्षण भर’ (कविता) –सच्चितानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (इकाई-5)