कारक (Case)

कारक (case) के प्रकार और विभक्ति चिन्ह  कारक की परिभाषा- संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसके संबंध का बोध होता है, उसे कारक कहते हैं। हिन्दी में आठ (8) कारक हैं- कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध, अधिकरण और सम्बोधन कारक के विभक्ति चिन्ह  कारक के विभक्ति… Continue reading कारक (Case)

विराम चिन्ह (Punctuation Mark)

विराम (Punctuation Mark) - विराम का अर्थ होता है- रुकना या ठहरना। भिन्न-भिन्न भावों और विचारों को स्पष्ट करने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग वाक्य के बीच में या अंत में किया जाता है, उसे विराम चिन्ह कहते हैं। परिभाषा- जब हम अपने भावों को भाषा के द्वारा व्यक्त करते हैं, तब एक भाव… Continue reading विराम चिन्ह (Punctuation Mark)

बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

लोक साहित्य की जब भी बात चलती है, तब मन लौट कर लोक जन-जीवन की ओर पहुँच जाता है। जहाँ जाकर लोकगीत, लोक-कला, कथा-कहावतों और लोकोक्तियों का दिव्य दर्शन होता है। मन आनंद विभोर हो जाता है। यह अलिखित लोक साहित्य जन-जीवन के जिह्वा पर होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है।… Continue reading बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

बाणों की शय्या (कहानी)

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। भीष्म पितामह गंगा तथा शांतनु के आठवीं संतान थे। उनका मूलनाम देवव्रत था। भीष्म ने अपने पिता शांतनु का सत्यवती से विवाह करवाने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ किया था। अपने पिता के लिए इस तरह की पितृभक्ति देखकर… Continue reading बाणों की शय्या (कहानी)

शापित कुन्ति

कुन्ति महाभारत में वर्णित पांडवों की माता थी। वे वासुदेवजी की बहन और भगवान श्री कृष्णा की बुआ थी। महाराज कुन्तिभोज ने कुंती को गोद लिया था। कुन्तिभोज के परम मित्र शूरसेन थे। वे बड़े ही धर्मात्मा थे। कुन्तिभोज के पास सब कुछ तो था किन्तु संतान नहीं थी। राजा कुन्तिभोज संतान के अभाव में… Continue reading शापित कुन्ति

संजय की दिव्यदृष्टि

महाभारत एक ऐसा ग्रन्थ है, जिसमें भारत का ही नहीं, विश्व इतिहास का भी रहस्य छुपा हुआ है। संजय महाभारत का महत्वपूर्ण पात्र और अंधे कौरव राजा धृतराष्ट्र के सारथी थे। संजय महर्षि व्यास के शिष्य और धृतराष्ट्र की राज्यसभा के सम्मानित सदस्य थे। संजय विद्वान गावाल्गण नामक सूत के पुत्र थे। वे विनम्र और… Continue reading संजय की दिव्यदृष्टि

अंगद उवाच

यह बात लंका काण्ड की है। राम और रावण का युद्ध चल रहा था। उस समय रावण को अंगद ने कहा, हे रावण! तू तो मरा हुआ है। तुझे मारने से क्या फायदा...! अंगद की बात सुनकर रावण बोला, मैं तो जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे हूँ? अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वाले को जीवित… Continue reading अंगद उवाच

हिन्दी वर्णमाला

वर्ण- भाषा की सबसे छोटी इकाई जिसके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं, उसे वर्ण कहते हैं। जैसे- अ, आ, इ, ई आदि। वर्णमाला- वर्णों की व्यवस्थित समूह को ‘वर्णमाला’ कहते हैं। वर्णमाला में वर्णों की कुल संख्या 52 है। हिन्दी वर्णमाला के समस्त वर्णों को दो भागों में विभक्त किया गया है-… Continue reading हिन्दी वर्णमाला

कैकेयी के पुत्र प्रेम

रामायण सनातन धर्म का प्रमुख ग्रन्थ है। इसे पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और दार्शनिक ग्रन्थ मना जाता है। रामायण की एक बड़ी घटना भगवान श्री राम का वन जाना था। राजा दशरथ से विवाह के पहले रानी कैकेयी महर्षि दुर्वासा की सेवा किया करती थी। कैकेयी की सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि दुर्वासा ने उनका एक… Continue reading कैकेयी के पुत्र प्रेम