हिन्दी की गद्य विधाएँ ‘कहानी’ (इकाई- 2) भाग – 1

हिन्दी कहानी का विकास क्रम:

  1. प्रारंभिक काल की कहानियाँ  (1900 ई० पूर्व)
  2. द्विवेदी युगीन कहानियाँ 1900 -1916 ई०)

कहानी’ गद्य साहित्य की सबसे अधिक रोचक एवं लोकप्रिय विधा है, जो जीवन के किसी विशेष पक्ष का मार्मिक, भावनात्मक और कलात्मक वर्णन करती है।

“हिन्दी गद्य की वह विधा है, जिसमे लेखक किसी घटना, पात्र अथवा समस्या का क्रमबद्ध ब्यौरा देता है, जिसे पढ़कर एक समन्वित प्रभाव उत्पन्न होता है, उसे कहानी कहते हैं”।

कहानी ‘अंग्रेजी’ भाषा के ‘स्टोरी’ शब्द का हिन्दी रूपान्तर है।

हिन्दी में कहानी शब्द का प्रयोग सबसे पहले डॉ गोपाल राय के अनुसार मुंशी प्रेमचंद ने ‘सोजे वतन’ संग्रह की भूमिका में किया था। कहानी का अर्थ है। रोचकता के साथ कहना।

‘सोजे वतन’ में पाँच कहानियाँ संकलित है- सोजे वतन, दुनिया का सबसे अनमोल रतन, शेख मखमूर, यही मेरा वतन है तथा सांसारिक प्रेम और देश प्रेम।

विद्धनों द्वारा दिया गया कहानी के नाम:

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहानी को ‘आख्यायिका’ कहा है।
  • आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने ‘गल्प’ कहा है।
  • अज्ञेय ने कहानी को ‘सूक्ष्मदर्शी’ यंत्र कहा है।
  • प्रेमचंद ने कहानी को ‘गल्प’ और ‘कहानी’ दोनों कहा है।
  • हिन्दी में कहानी का आगमन ‘संस्कृत’ से हुआ है।

कहानी की परिभाषा:

प्रेमचंद के शब्दों में- “गल्प एक ऐसी रचना है जिसमे जीवन के किसी एक अंग या मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य होता है।”

प्रेमचन्द के अनुसार- “कहानी वह ‘ध्रुपद’ की तान है, जिसमें गायक महफिल शुरू होते ही अपनी संपूर्ण प्रतिभा दिखा देता है, एक क्षण में चित्त को इतने माधुर्य से परिपूर्ण कर देता है, जितना रात भर गाना सुनने से भी नहीं हो सकता।”

जयशंकर प्रसाद के अनुसार- “सौंदर्य की एक झलक का चित्रण करना और उसके द्वारा इसकी सृष्टि करना ही कहानी है।”

जैनेन्द्र के अनुसार- “कहानी मानव मान की भूख है, जो निरंतर जो निरंतर समाधान पाने की कोशिश करती रहती है।”

डॉ० गणपतिचंद्र गुप्त के अनुसार- “प्राचीन कहानी स्वर्गलोक की कल्पना थी तो आधुनिक कहानी हमें धरती के सुख-दुःख स्मरण कराती है।” 

एच० जी० वेल्स के अनुसार- “कहानी तो बस वही है, जिसे 20 मिनट में साहस और कल्पना के साथ पढ़ी जाए।”

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार- “आख्यायिका या कथा वह है, जिसमे जीवन के किसी एक पक्ष का रोचक विवरण हो तथा जिसके माध्यम से किसी चरित्र का उद्घाटन हो।”

कहानी के तत्व- कथावस्तु, पात्र, चरित्र-चित्रण, देश, काल और वातावरण, संवाद या कथोपकथन, भाषा-शैली और उद्देश्य।

कहानी के विकास के चार सोपान है: आरम्भ, मध्य, चरमोत्कर्ष और अंत

कहानी के निम्नलिखित भेद है- ऐतिहासिक/वार्नात्माका शैली, आत्मकथात्मक शैली, वार्तालाप शैली, पत्रात्मक शैली, नाटकीय शैली, भावात्मक शैली, प्रतीकात्मक शैली, मनोविश्लेश्नात्मक शैली, प्रतीकात्मक शैली (पूर्वदीप्ती शैली), डायरी शैली, स्वप्न शैली, मिश्रित शैली

कहानी की विशेषताएँ- डॉ० त्रिगुणायन ने एक अच्छी कहानी की निम्नलिखित विशेषताएँ मानी है: आकार की लघुता, संवेदना की एकता, प्रभावकारी, वैधानिकता, सत्य की प्रतिष्ठा, रोचकता, सक्रियता, चरित्र-चित्रण।

हिन्दी का ‘प्रथम कहानी’ विभिन्न विद्वानों के अनुसार:

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार- ‘इन्दुमती’ (1900 ई०), रचनाकार किशोरीलाल गोस्वामी

डॉ० बच्चन सिंह के अनुसा- ‘प्रणयिणी परिचय’ (1887 ई०),किशोरीलाल गोस्वामी

राजेन्द्र बढ्वालिया के अनुसार- ‘जमींदार का दृष्टांत’ (1871 ई०) रेवरेंड जे न्यूटन

देवीप्रसाद के अनुसार- ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ (1901 ई० सर्वमान्य) माधवराव स्प्रे

लक्ष्मीनारायण के अनुसार- ‘ग्यारह वर्ष आ समय’ (1903 ई०) आचार्य रामचंद्र शुक्ल, सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित

राजेन्द्र यादव के अनुसार- ‘उसने कहा था’ (1915 ई०) चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

हिन्दी के प्रथम मौलिक कहानी:

हिन्दी की प्रथम ‘मौलिक’ कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ (1901 ई०) ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ पत्रिका।

हिन्दी की प्रथम ‘वैज्ञानिक’ कहानी ‘चंद्रलोक की यात्रा’ सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित।

हिन्दी की पहली ‘ऐतिहासिक’ कहानी ‘राखी बंध भाई’ रचनाकार वृंदावनलाल वर्मा सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित।

हिन्दी कहानी का विकास क्रम:

  • प्रारंभिक काल की कहानियाँ  (1900 ई० पूर्व)
  • द्विवेदी युगीन कहानियाँ 1900 -1916 ई०)
  • प्रेमचंद युगीन कहानियाँ (1916 – 1936 ई०)
  • प्रेमचंदोत्तर युगीन कहानियाँ (1936 – 1950 ई०)
  • नई कहानी (1950 – 1960 ई०)

कहानी आंदोलन (1960 से अब तक)

  • सचेतन कहानी आंदोलन- डॉ महीप सिंह
  • अ-कहानी आन्दोलन- निर्मल वर्मा
  • समकालीन कहानी आन्दोलन- गंगाप्रसाद विमल
  • समान्तर कहानी आंदोलन- कमलेश्वर
  • सहज कहानी आंदोलन- अमृतराय
  • सक्रिय कहानी आंदोलन- राकेश वत्स

1. प्रारंभिक काल की कहानियाँ  (1900 ई० पूर्व)

रचना: ‘रानी केतकी की कहानी’ या ‘उदयभान चरित’ (1803ई०)

रचनाकार: सैयद इंशा अल्लाह खां

इस कहानी में मातृत्व, पितृत्व एवं बाल मनोविज्ञान का चित्रण है। इसमें कहानी के तत्व नहीं है। अतः शुक्ल ने इसे आख्यायिका माना है।

रचना: ‘राजाभोज का सपना’ (1853 ई०)

रचनाकार: राजा शिव प्रसाद सितारे हिन्द है।

इस कहानी में अहं भाव से युक्त राजा भोज स्वप्न में यथार्थ का बोध होना एवं अहं भाव से मुक्ति का चित्रण है।

2. द्विवेदी युगीन कहानियाँ (1900 -1916 ई० तक)

हिन्दी कहानी की वास्तविक शुरुआत द्विवेदी से मानी जाती है।

द्विवेदी युग के महत्वपूर्ण कहानीकार:

(क). किशोरीलाल गोस्वामी

जन्म: 1865 ई०

निधन: 1932 ई०

कहानी: इंदुमति (1900 ई०), सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित, शुक्ल जी ने इसे हिन्दी की प्रथम कहानी माना है। इस कहानी में प्रेम के मनोविज्ञान का चित्रण है।

किशोरीलाल गोस्वामी अन्य काहानियाँ 

‘प्रणयिणी परिचय’ (1887 ई०), इस कहानी में कहानी के तत्व नहीं है।

डॉ० बच्चन सिंह ने इसे हिन्दी का प्रथम कहानी माना है।

‘गुलबहार’ 1902 ई० सरस्वती में प्रकाशित है

(ख). माधव प्रसाद मिश्र

जन्म: कूँगड़ गाँव भिवानी (हरियाणा)

निधन: 1907 ई० ‘सुदर्शन’ पत्रिका के संपादक थे।

‘मन की चंचलता’ (1900 ई०)

‘पुरोहित का आत्मत्याग’ (1900 ई०)

(ग). वृंदावनलाल वर्मा

जन्म: 1889 ई० मऊरानीपुर, झाँसी (उ.प्र.)

निधन: 1969 ई०

प्रसिद्ध कहानियाँ

‘राखीबंध भाई’ 1909 ई०) हिन्दी की पहली ऐतिहासिक कहानी माना जाता है।

तातार और एक वीर राजपूत (1910 ई०)

अन्य कहानियाँ- मेढ़क का व्याह, नकली किला, अंबरपुर के अमरवीर, तोषी, कलाकार का दंड

(घ). केशवप्रसाद सिंह:

चंद्रलोक की यात्रा (1900 ई०) इसे हिन्दी की पहली कहानी माना जाता है

आपत्तियों का पहाड़ (1900 ई०)

(ङ). राजेन्द्रबाला घोष/बंग महिला के नाम से जाना जाता है।

हिन्दी की पहली हिन्दी महिला कहानीकार थी।

जन्म: 1882 ई० वाराणसी

निधन: 1951 ई०

महत्वपूर्ण कहानियाँ:

चंद्रदेव से मेरी बातें (1904 ई०), डॉ० भवदेव ने इस कहानी को हिन्दी की प्रथम राजनैतिक कहानी माना है।

अन्य कहानियाँ: कुंभ में छोटी बहू (1906 ई०), प्रतिदान (1906 ई०) सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

दुलाईवाली (1907 ई०) यह हास्यरस प्रधान कहानी है।

दालिया (1909 ई०)

कुसुम (1912 ई० ) यह कहानी संग्रह है।

(च). विश्वभर नाथ ‘कौशिक’

जन्म: 1891 ई० अंबाला पंजाब

निधन: 1945 ई०

ये कालक्रम की दृष्टि से प्रेमचंद युग में एवं वर्ग्य विषय की दृष्टि से द्वेवेदी युग में आते है।

ये भी आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी कहानीकार है। इन्होने प्रेमचंद की तरह 300 कहानियाँ लिखा था। इनकी हास्य रस से संबंधित कहानियाँ ‘चाँद’ पत्रिका ‘दुबे जी की चिट्ठियाँ’ नाम से प्रकाशित हुई।

कहानी संग्रह:

गल्प मंदिर 1919 ई०

चित्रशाला भाग- 1 (1914 ई०)

चित्रशाला भाग- 2 (1929 ई०)

कल्लोल (1933 ई० )

प्रेम प्रतिमा (1949 ई०)

मणिमाला (1942 ई०)

प्रसिद्ध कहानियाँ: परदेशी (1912 ई०), रक्षाबंधन (1913 ई०)

(छ). चंद्रधरशर्मा ‘गुलेरी’

जन्म: 25 जुलाई 1883 ई० जयपुर

निधन: 11 सितंबर 1922 ई०

महत्वपूर्ण कहानियाँ:

सुखमय जीवन (1911 ई०) ‘भारतमित्र’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

बुदधू का काँटा (1912 ई०) ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

उसने कहा था (1915 ई०) ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

द्विवेदी युग की अन्य महत्वपूर्ण कहानियाँ और कहानीकार

  • ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ (1901 ई०) माधवराव सप्रे ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
  • देवी प्रसाद एवं आधुनिक शोध के अनुसार इसे हिन्दी की प्रथम कहानी माना जाता है।
  • इसमें सामंती व्यवस्था एक महिला के साहस का चित्रण है।
  • प्लेग की चुड़ैल (1902 ई०) मास्टर भगवान दीन
  • ग्यारह वर्ष का समय (1903 ई०) आचार्य रामचंद्र शुक्ल सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित
  • पंडित और पंडितानी (1903 ई०) गिरिजादत्त वाजपेयी
  • नलकी किला (1909 ई०) मैथिलशरण गुप्त
  • निन्यानबे का फेर (1910 ई०) मैथिलशरण गुप्त
  • ग्राम (1911 ई० इंदु में प्रकाशित) जयशंकर प्रसाद
  • पिकनिक (1911 ई०) गंगा प्रसाद श्रीवास्तव
  • रसिया बालम (1912 ई०) जयशंकर प्रसाद
  • मिलन (1914 ई०) ज्वालादत्त शर्मा
  • कानों में कंगना (1913 ई०) राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह
  • गृह लक्ष्मी (1914 ई०) चतुरसेन शास्त्री

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