हिन्दी की गद्य विधाएँ ‘कहानी’ (इकाई- 2) भाग – 4

हिन्दी कहानी का विकास क्रम:

नयी युगीन कहानियाँ- (1950 – 1960 ई० तक )

नयी कहानी शब्द का सबसे पहले प्रयोग ‘दुष्यंत कुमार’ ने किया था।

नयी कहानी की शुरुआत निर्मल वर्मा के द्वारा रचित ‘परिंदे’ कहानी से माना जाता है।

‘परिंदे’ का प्रकाशन (1956 ई०) है। डॉ नामवर सिंह के अनुसार

नयी कहानी से तात्पर्य ‘प्रयोगवाद’ से प्रेरित होकर 1950 ई० के आसपास राजेन्द्र यादव, निर्मल वर्मा एवं मोहन राकेश द्वारा कहानी के शिल्प, भाषा शैली, वर्ण्य विषय आदि क्षेत्रों में कुछ नवीन प्रयोग किया गया। जीवन की इन प्रयोगों के कारण ही नयी कहानी का प्रवर्तन हुआ।

नयी कहानी की परिभाषाएँ:

कमलेश्वर के शब्दों में- “नयी कहानी से हमारा तात्पर्य उस संचेतना से है, जो आज सम्पूर्ण जीवन की विडंबना को ग्रहण कर उसे रचना के स्तर तक पहुँचने में सामर्थ्य है। नयी कहानी अंधरे की ‘चीख’ नहीं अंधरे की ‘खोज’ है।”

मार्कंडेय के अनुसार- “नयी कहानी से हमारा मतलब उन कहानियों से है जो सच्चे अर्थों में कलात्मक निर्माण है। जो जीवन के लिए उपयोगी है और महत्वपूर्ण होने के साथ जीवन के नये पहलू पर प्रकाश डालती है।”

राजेन्द्र यादव के अनुसार- “1955 ई० के बाद की कहानियों में कलात्मक के प्रति आग्रह के साथ-साथ जीवन के अनछुए पहलूओं का भी चित्रण परिलक्षित होता है। एक नवीन दृष्टिकोण  को लेकर चलनेवाली के ये सभी कहानियाँ नयी कहानी अंतर्गत आती है।”

‘नयी कहानी’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले दुष्यंत कुमार ने किया

‘नयी कहानी’ के ‘जनक’ निर्मल वर्मा को माना जाता है। 

‘नयी कहानी’ आंदोलन के वास्तविक प्रवर्तक राजेन्द्र यादव है।

नयी कहानी का वर्गीकरण दो भागों में बाँट सकते है:

ग्रामीण अंचल की कहानियाँ  

(क). फणीश्वर नाथ रेणु (1921 – 1977 ई०)

(ख). शिवप्रसाद सिंह (1928 – 1988 ई०)

(ग). मार्कंडेय (1930 – 1910 ई०)

(घ). शेखर जोशी (1932 ई० -)

(क). फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ (1921 – 1977 ई०)

जन्म: (1921 ई०) फोबिसगंज गाँव, अररिया (बिहार) 

निधन: (1977 ई०)

प्रथम कहानी ‘बटबाबा’ (1994 ई०) ‘विश्वामित्र’ पत्रिका कोलकाता में प्रकाशित

(नामवर सिंह ने इसे पहली कहानी माना है)

‘पार्टी का भूत’ (1945 ई०) भागलपुर सेन्ट्रल जेल में लिखा था।

निर्मल वर्मा ने इस कहानी को पहली कहानी माना है। ‘पार्टी के भूत’ कहानी को ‘मैला आँचल’ कहानी का पूर्व पीठिका माना जाता है।

कहानी संग्रह:

ठुमरी (1969 ई०)

आदिम रात्रि की महक (1967 ई०)

अग्नि खोर (1973 ई०)

एक श्रावणी दोपहर की धूप (1984 ई० निधन के बाद प्र०)

अच्छे आदमी (1986 ई० निधन के बाद प्र०)

ठुमरी (1969 ई०) इस कहानी संग्रह में कूल 9 कहानियाँ है।

1.तीन बिंदिया 2. रसप्रिया 3. तिर्थोदिक 4. ठेस 5. नित्यलीला 6. पंचलाईट 7. सिर पंचमी का सगुन 8. तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम 9. लालपान की बेगम।

आदिम रात्रि की महक (1967 ई०) इस कहानी संग्रह में कूल 13 कहानियाँ है।

1.संवदिया 2. जाहिद अली 3. टेबूल 4. अक्ल और भैंस

अग्नि खोर (1973 ई०) इस कहानी संग्रह में 11 कहानियाँ है।

1.अग्निखोर 2. रेखाएँ: वृतचक्र 3. भित्ति चित्र की मयूरी 4. शीर्षकहीन 5. अग्नि संचारक (यह इनकी अंतिम कहानी है)

फणीश्वर नाथ रेणु की चर्चित कहानियाँ:

1. कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम 2. गप्प का शीर्षक 3. पंचलाईट  4. रसप्रिय 5. टेबुल

11. कस्बे की लड़की 12. रतनी 13. लफड़ा 14. अग्नि संचारक 15. जैव 16. नित्य लीला

तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफान- (1957 ई०)

  • यह कहानी ‘अपरंपार’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।
  • इस पत्रिका का संपादक नर्मदेश्वर थे।
  • इस कहानी में हीरामन और हीराबाई के प्रेम का चित्रण है।
  • कथा क्षेत्र बिहार का पूर्णिया जिला है।
  • इस कहानी में हीरामन के द्वारा ली गई तीन कसमे महत्वपूर्ण है-
  • चोर बाजारी का माल नहीं ढ़ोने का
  • बाँस की लदनी नहीं करने का
  • फारबिंस गंज मेले के नौटंकी के नर्तकी नहीं बिठाने का कसम लेता हैं।

लालपान की बेगम (1956 ई०)

यह आँचलिक कहानी है। यह कहानी नारी सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर लिखी गया है। इसमें नारी के स्वाभिमान और आत्म सम्मान, चाह को जग जाहिर किया है। गाँव में रहनेवाली महिलाओं के बीच होने वाले माहौल का वर्णन है।

रसप्रिया (1955 ई०)

इसमें बिहार के पूर्णिया एवं सहरसा अंचल का चित्रण है।

रसप्रिया कहानी में लोक संस्कृति और आँचलिकता का गहरा रंग दिखाई देता है। मिरदंगिया को रसप्रिया के लिए जो प्यास है, वह वास्तव में कहानीकार के मन में लोक संस्कृति की प्यास का सूचक है। मिरदंगिया अपने लोक गीत को जीवित रखने के लिए मोहना के तान पर अभिभूत हो जाता है।

पंचलाईट (1959 ई०)

पंचलाईट कहानी ठुमरी कहानी संग्रह में संकलित है। इस कहानी में बिहार के एक पिछड़े गाँव के परिवेश का चित्रण है।

अदिम रात्रि की महक (1967 ई०)

यह कहानी संग्रह भी है इसमें 14 कहानियाँ संकलित है।

ठेस-  यह एक आंचलिक कहानी है।

इस कहानी में एक कलाकार की कोमल भावनाओं का मार्मिक चित्रण है।

भित्ति चित्र की मयूरी- भित्ति चित्रों की असल मयूरी रेणु के गाँव औराही हिंगना में रहती है। उसका नाम महथी देवी, उम्र 75 वर्ष, फणीश्वरनाथ  रेणु की सगी छोटी बहन। महथी के पास लोकजीवन की संवेदनाओं का अनूठा भंडार है।

(ख). शिवप्रसाद सिंह (1928 – 1988 ई०)

जन्म: 19 अगस्त (1929 ई०) जलालपुर, गाजीपुर

निधन: (1988 ई०)

शिवप्रसाद सिंह के महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

आरपार की माला (1955 ई०)

कर्मनाशा की हार (1958 ई०)

इन्हें भी इन्तजार है (1961 ई०)

मुरदा सराय (1966 ई०)

अँधेरा हँसता है (1975 ई०)

भेड़िए (1977 ई०)

दादी माँ, नन्हों

(ग). मार्कंडेय (1930 – 2010 ई०)

जन्म: 2 मई (1930 ई०) जौनपुर उ.प्र.

निधन: 18 मार्च (2010 ई०)

मार्कंडेय के महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

पान फूल (1954 ई०)

पत्थर और परछाइयाँ (1956 ई०)

महुए का पेड़ (1957 ई०)

हंसा जाई अकेला (1957 ई०)

भूदान (1958 ई०)

माही (1962 ई०)

बीच के लोग (1975 ई०)

(घ). शेखर जोशी (1932 ई० -)

जन्म: 10 सितंबर (1932 ई०) अल्मोड़ा

शेखर जोशी के महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

कोशी का घटवार (1957 ई०)

अप्रतीक्षित (1958 ई०)

सहयात्री (1959 ई०)

प्रश्नवाचक आकृतियाँ (1961 ई०)

समर्पण (1961 ई०)

दौड़ (1965 ई०)

रास्ते (1965 ई०)

बदबू (1967 ई०)

साथ के लोग (1967 ई०)

दाज्यू (1981 ई०)

हलवाहा (1981 ई०)

मेरा पहाड़ (1989 ई०)

नौरंगी बीमार (1990 ई०)

डंगरी वाले (1994 ई०)

किंकरोमि, जनार्दन, तरु का निर्णय, उस्ताद।

नगर बोध की कहानियाँ-

  • नगरीय संस्कृति एवं विडंबनाओं का चित्रण
  • मनोविश्लेषणवाद का प्रभाव
  • टूटते पारिवारिक मूल्यों का चित्रण
  • मानव में स्वार्थ लिप्सा का चित्रण
  • एकांकी जीवन का चित्रण
  • अति यथार्थवादिता का चित्रण

नगरबोध की कहानियाँ और रचनाकारों का आरोही कालानुक्रम-

(क).  भीष्म साहनी

जन्म: 8 अगस्त (1995 ई०) रावलपिंडी (पाकिस्तान)

निधन: 11 जुलाई 2003 ई०

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

भाग्य रेखा (1953 ई०)

पहला पाठ (1975 ई०)

भटकती राख (1966 ई०)

पटरियाँ (1973 ई०)

वाड्चू (1978 ई०)

शोभायात्रा (1981 ई०)

निशाचर (1983 ई०)

पाली (1989 ई०)

डायन (1998 ई०)

(ख).  मोहन राकेश

जन्म: 8 जनवरी (1925 ई) अमृतसर

निधन: 3 जनवरी (1972 ई०)

इनकी प्रथम कहानी ‘भिक्षु’ थी यह कहानी (1945 ई०) में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

इनकी अंतिम कहानी नन्ही थी। यह कहानी (1973 ई०) में सारिका पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। नन्ही कहानी के संपादक कमलेश्वर थे।

कहानी संग्रह इनके कहानी संग्रह को दो भागों में बाँटा जा सकता है।

इन्होने अपने जीवन काल में कूल 63 कहानियाँ लिखी थी।  

जीवन काल में प्रकाशित महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

इंसान के खंडहर (1950 ई०)

नये बादल (1957 ई०)

जानवर और जानवर (1958 ई०)

एक और जिनदगी (1961 ई०)

फौलाद का आकाश (1966 ई०)

निधन के बाद प्रकाशित महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

क्वार्टर (1972 ई०)

पहचान (1972 ई०)

वारिस (1972 ई०)

इन ऊपर की तीन कहानी संग्रहों मे इनकी 54 कहानियों को सम्मिलित किया गया है।

इसे राजपाल एंड संस प्रकाशन के द्वारा प्रकाशित है।

इसके बाद ‘सारिका’ पत्रिका के द्वारा 1973 ई० में ‘मोहन राकेश की डायरी’ नाम से निम्नलिखित कहानियों का प्रकाशन किया गया।

नन्ही, बनिया बनाम इश्क, भिक्षु, लड़ाई, फटी हुई पतंगें, गुमशुदा, लेकिन इस तरह, पंप, अर्द्धविराम।

मोहन राकेश के महत्वपूर्ण कहानियाँ:

इंसान के खंडहर (1950 ई०)

इस संग्रह में इनकी 11 कहानियाँ है। इंसान के खंडहर, एक आलोचना, दोराहा, धुंधला, दीप, लक्ष्यहीन, वासना की छाया में, मिट्टी के रंग, कंबल।

नये बादल (1957 ई०)

इस कहानी संग्रह में इनकी कूल 12 कहानियाँ है। नये बादल, उसकी रोटी, मलवे का मालिक, फटा हुआ जूता, शिकार, छोटी सी चीज। 

जानवर और जानवर (1958 ई०)

इस संग्रह में इनकी 9 कहानियाँ है।

जानवर और जानवर, कमल रोजगार, आर्द्रा, मिस्टर भाटिया, परमात्मा का कुत्ता।

एक और जिनदगी (1961 ई०)

इस संग्रह में इनकी 9 कहानियाँ है।

सुहागिनें, मिस पाल, एक और जिंदगी, आदमी और दिवार।

फौलाद का आकाश (1966 ई०)

इस संग्रह में इनकी 9 कहानियाँ है।

ग्लास टैंक, सेफ्टीपीन, एक ठहरा हुआ चाक़ू, चौगान, पाँचवे माले का फ्लैट।

(ग).  रामदरस मिश्र

जन्म: 15 अगस्त (1925 ई०) डुमरी गोरखपुर

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

खाली घर (1969 ई०)

एक वह (1974 ई०)

दिचर्या (1979 ई०)

सर्पदंश (1982 ई०)

बसंत का एक दिन (1982 ई०)

अपने लिए (1992 ई०)

आज का दिन भी (1996 ई०)

एक कहानी लगातार (1997 ई०)

फिर कब आएंगे (1998 ई०)

विदूषक (2002 ई०) 

(घ).  अमरकांत

जन्म: 1 जुलाई (1925 ई०) बलिया

निधन: 7 फरवरी (2014 ई०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

जिंदगी और जोंक

देश के लोग

मौत का नगर

मित्र मिलन

कुहासा

दोपहर का भोजन

डिप्टी कलक्टरी

(ङ).  धर्मवीर भारती

जन्म: 25 दिसंबर (1926 ई०)

निधन: 4 सितंबर (1997 ई०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

मुर्दों का गाँव (1946 ई०)

स्वर्ग और पृथवी (1949  ई०)

चाँद और टूटे हुए लोग (1955 ई०)

बंद गली का आखरी मकान (1969 ई०)

गुलकी बन्नो (ई०)

(च).  राजेन्द्र यादव

जन्म: 28 अगस्त (1929 ई०) आगरा

निधन: 28 ओक्टूबर (2013 ई०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

देवताओं की मूर्तियाँ (1925 ई०)

खेल खिलौने (1954 ई०)

जहाँ लक्ष्मी कैद है (1957 ई०)

अभिमन्यु की आत्महत्या (1959 ई०)

छोटे-छोटे ताजमहल (1962 ई०)

किनारे से किनारे तक (1963 ई०)  

टूटना (1966 ई०)

अपने पार (1968 ई०)

ढ़ोल और अन्य कहानियाँ (1972 ई०)

हासिल तथा अन्य कहानियाँ (2006 ई०) 

(छ). रघुवीर सहाय

जन्म: 3 दिसंबर (1929 ई०) लखनऊ

निधन: 30 दिसंबर (1990 ई०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

रास्ता इधर से है (1972 ई०) जो आदमी हम बना रहे हैं (1982 ई०)

सेब

मेरे और नंगी औरत के बीच

मुठभेड़

तीन मिनट

(ज).  मन्नू भंडारी

जन्म: 3 अप्रैल (1931 ई०) भानपुरा मंदसोर (म०प्र०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

मैं हार गई (1957 ई०)

यही सच है (1996 ई०)

एक प्लेट सैलाब (1968 ई०)

तीन निगाहों की तस्वीर (1968 ई०)

त्रिशंकु (1978 ई०)

रानी माँ का चबूतरा (ई०) 

(झ).  महेंद्र भल्ला

जन्म: 31 दिसंबर (1933 ई०)

निधन: 1 जुलाई (2015 ई०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

तीन चार दिन पुल की परछाई कुत्तेगिरी

(ञ). दूधनाथ सिंह

जन्म: 17 ओक्टूबर (1936 ई०) बलिया (उ०प्र०)

निधन: 12 जनवरी (2018 ई०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

सपाट चहरे वाला आदमी (1967 ई०)

सुखांत (1971 ई०)

पहला कदम (1976 ई०)

माई का शोक गीत (1992 ई०)

नमो अंधकार (1998 ई०)

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे (2002 ई०)

निष्काशन (2002 ई०)  

विजेता, कबंध, रीछ, सुखांत, प्रतिशोध।

(ट). काशीनाथ सिंह

जन्म: 1 जनवरी (1937 ई०) जीयनपुर, चंदौली (उ०प्र०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

लोग विस्तारों पर (1968 ई०)

सुबह का डर (1975 ई०)

आदमीनामा (1978 ई०)

नयी तारीख (1979 ई०)

काल की फटेहाल कहानियाँ (1980 ई०)

सदी का सबसे बड़ा आदमी (1986 ई०)

(ठ). गोविंद मिश्र

जन्म: 1 अगस्त (1937 ई०) अतर्रा बाँदा (उ०प्र०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

नए-पुराने माँ-बाप (1973 ई०)

अंतःपुर (1976 ई०)

रगड़ खाती आत्माएँ (1978 ई०)

धाँसू (1978 ई०)

अपाहिज (1980 ई०)

खुद के खिलाफ (1982 ई०)

खाक इतिहास (1984 ई०)

पगला बाबा (1987 ई०)

आसमान कितना नीला (1992 ई०)

हवाबाज (1998 ई०)

मुझे बाहर निकालों (2004 ई०) 

(ड).  मृणाल पांडे

जन्म: 26 फरवरी (1947 ई) टीकमगढ़ (म०प्र०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

यानी की एक बात थी

बचुली चौकीदारिन की कढ़ी

एक स्त्री का विदा गीत

चार दिन की जवानी तेरी।

(ढ).  असगर वजाहत

जन्म: 5 जुलाई (1947 ई०) फतेहपुर (उ०प्र०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

(ण).  उदय प्रकाश

जन्म: 1 जनवरी (1952 ई०) सीतापुर, जिला अनूपुर (म०प्र०)

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

दरियाई घोड़ा (1989 ई०)

तिरछी (1989 ई०)

और अंत में प्रार्थना (1994 ई०)

पाल गोमला का स्कूटर (1997 ई०)

पीली छतरी वाली लड़की (2001 ई०) 

दत्तात्रेय का दुःख (2002 ई०) 

राम सजीवन की प्रेम कथा

अ-काहानी आन्दोलन-

अ-कहानी आन्दोलन के प्रवर्तक- गंगा प्रसाद विमल

प्रवर्तन वर्ष- (1960 ई०)

इसे ‘साठोत्तरी’ कहानी और ‘समकालीन’ कहानी के नामों से पुकारा गया।

यह कहानी आंदोलन फ़्रांस के ‘एंटी-स्टोरी मूवमेंट’ से प्रेरित होकर और ‘नयी कहानी’ के विरोध में इसका प्रवर्तन किया गया।

अ-कहानी आंदोलन की विशेषताएँ:

इसमें जीवन मुल्यों का तिरस्कार किया गया

इसमें परम्पराओं का विरोध किया गया

इसमें अधिक आधुनिकता परिलक्षित है

इन कहानियों में यौन उन्मुक्तता दिखाई देती है

इन कहानियों में शिल्प के प्रति उपेक्षा का भाव मिलता है

अ-कहानी आंदोलन के पक्षधर:

(क). निर्मल वर्मा

जन्म: 3 अप्रैल (1929 ई०) शिमला

निधन: 25 औक्तुबर (2005 ई०)

इनकी प्रथम कहानी ‘डायरी का खेल’ (1953 ई०)

प्रथम कहानी संग्रह ‘परिंदे’ हैं (1960 ई०)

इन्होने ‘परिंदे’ कहानी लिखी 1955 ई० में और प्रकाशन हुआ 1956 ई० में।

‘परिंदे’ कहानी से ही डॉ० नामवर सिंह ने ‘नयी कहानी’ का आरम्भ माना है।

निर्मल वर्मा के अन्य कहानी संग्रह:

जलती झाडी (1965ई०)

पिछली गर्मियों में (1968 ई०)

बीच बहस में (1973 ई०)

मेरी प्रिय कहानियाँ (1973 ई०)

कव्वे और कला पानी (1983 ई०) इस कहानी के लिए इन्हें (1985 ई० में स०अ० पुरस्कार)

सुखा तथा अन्य कहानियाँ (1956 ई०)

ग्यारह लम्बी कहानियाँ (2000 ई०)

संपूर्ण कहानियाँ (2005 ई०)

परिंदे कहानी संग्रह में निम्नलिखित 7 कहानियाँ है:

  1. डायरी का खेल 2. माया का मर्म 3. तीसरा गवाह 4. अँधेरे में 5. पिक्चर का पोस्टकार्ड 6. सितंबर की एक शाम 7. परिंदे

निर्मल वर्मा की प्रसिद्ध कहानियाँ:

  1. परिंदे 2. अँधेरे में 3. लवर्स 4. दहलीज 5. लंदन की एक रात 6. खोज 7. बीच बहस में 8. अंतर 9. सुखा 10. बुखार 11. कुत्ते की मौत 12. सुबह की सैर

‘परिंदे’ कहानी (1955 में लिखी, 1956 ई० में प्रकाशित )

इस कहानी में अकेलेपन की पीड़ा का चित्रण है।

आधुनिक मानव के नियति को जानने की कोशिश इस कहानी में किया गया है।

पात्र: लतिका (नायिका), डॉ० मुकर्जी, मि० ह्यूबर्ट, ग्रीस नेगी, करीमुद्दीन, मिसवुड, फादर एलमंड आदि।

परिंदे संग्रह के विषय में डॉ० नामवर सिंह का कथन:

“स्वतंत्रता या मुक्ति का प्रश्न, जो समकालीन विश्व साहित्य का मुख्य प्रश्न बन गया है। निर्मल वर्मा की इन कहानियों में अलग-अलग कोणों से उठाया गया है।”

निर्मल वर्मा की कहानियों की विशेषताएँ:

वीर तलवार (आलोचक) के शब्दों में- इन्होने निर्मल वर्मा के कहानियों के मुख्य तीन विशेषताएँ बताएँ है।

इनकी कहानियों की भाषा काव्यात्मक है।

चमत्कार पूर्ण कल्पना

रहस्यात्मकता

निर्मल वर्मा ने कहानी या कला का मुख्य धर्म ‘अभिव्यक्ति’ को माना है।

(ख). गंगा प्रसाद विमल (अ-कहानी आंदोलन के जनक)

जन्म: (1939 ई०) उत्तर काशी (उत्तराखंड)

निधन: 2019 ई०

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

विध्वंश (1965 ई०)

शहर में (1966 ई०)

बीच की दरार (1968 ई०)

अतीत में (1972 ई०)

कोई शुरुआत (1973 ई०)

खोई हुई थाती (1995 ई०)

गंगा प्रसाद विमल की प्रसिद्ध कहानियाँ:

  1. एक और विदाई 2. प्रश्न चिह्न 3. सपनों का सच 4. बाहर न भीतर 5. मैं भी जाऊँगा।

इनकी कहानियों में अकेलेपन, शहरी जीवन की उबन और आधुनिकता की पीड़ा का वर्णन है।

(ग).  रमेश बक्षी

जन्म: 15 अगस्त (1936 ई०) इंदौर

निधन: 17 ओक्टूबर

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

मेज पर टिकी हुई कुहनियाँ (1963 ई०)

पिता दर पिता (1971 ई०) यह लंबी कहानी है।

एक अमूर्त तकलीफ (1972 ई०)

शवासन (1980 ई०)

रक्तचाप (1983 ई०)

खाली जेब (1988 ई०)

टुकड़े-टुकड़े (1980 ई०)

रमेश बक्षी की महत्वपूर्ण कहानियाँ:

तलघर (1969 ई०)

राजा (1970 ई०)

(घ). रविन्द्र कालिया

जन्म: 11 नवंबर (1939 ई०) जालंधर

निधन: 9 जनवरी 1916

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह :

नौ साल छोटी पत्नी (1969 ई०)

काला रजिस्टर (1972 ई०)

गरीबी हटाओं (1972 ई०)

गली कुचे (1976 ई०)

चकैया नीम (1979 ई०)

बाँके लाल (1982 ई०)

राग मिलावट मालकौश (1985 ई०)

सत्ताईस साल की उम्र तक (1987 ई०)

जरा सी रोशनी (2002 ई०)

(ङ).  ज्ञान रंजन

जन्म: 21 नवंबर (1936 ई०) महाराष्ट्र, अकोला में हुआ था।

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

फेंस के इधर उधर (1968 ई०)

यात्रा (1971 ई०)

क्षणजीवी (1977 ई०)

सपना नहीं (1977 ई०)

घंटा, बहिर्गमन, अनुभव

(च).  श्रीकांत वर्मा

जन्म: 18 सितंबर (1931 ई०) बिलासपुर छत्तीसगढ़

निधन: (1986 ई०) न्यूयार्क संयुक्त अमेरिका

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

झाड़ी , संवाद, घर, ठंड, बास, साथ

(छ).  डॉ० विजय मोहन सिंह

जन्म: 1 जनवरी (1937 ई०) शाहबाद, बिहार

निधन: 25 मार्च (2015 ई०) अहमदाबाद

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

टट्टू (1971 ई०) सवार

एक बँगला बने न्यारा (1982 ई०)

शेरपुर पंद्रह मील

गमे हस्ती का हो किससे…! (2000 ई०)

चाय के प्याले में गेंद

(ज). अमरकांत:

जन्म: 1 जुलाई (1925 ई०) बलिया

निधन: 17 फ़रवरी (2017 ई०) प्रयागराज

महत्वपूर्ण कहानी संग्रह:

जिंदगी और जोंक, देश के लोग, मौत का नगर, मित्र मिलन तथा अन्य कहानियाँ, कुहासा, तूफ़ान, कला प्रेमी, एक धनी व्यक्ति का बयान, दुःख और दुःख का साथ, जाँच और बच्चे, दोपहर का भोजन, डिप्टी कलक्टरी, औरत का क्रोध । 

सचेतन कहानी आंदोलन:

  • सचेतन कहानी का प्रारंभ महीप सिंह के द्वारा किया गया।
  • सन् 1964 ई० में ‘आधार’ नामक पत्रिका के ‘सचेतन’ कहानी विशेषांक प्रकाशित हुआ था। जिसे इस कहानी आंदोलन का प्रारम्भ माना जाता है।
  • महीप सिंह सचेतन कहानी को ‘नई कहानी’ की आत्मपरकता से दूर रखना चाहते थे।
  • महीप सिंह, कमल जोशी, मधुकर सिंह, योगेश गुप्त, वेद राही, हिमांशु जोशी, मनहर चौहान आदि कहानीकार इस आंदोलन से जुड़े थे।
  • यह आंदोलन अधिक दिनों तक नहीं चला।

महत्वपूर्ण कहानी और कहानीकार:

महीप सिंह- धुँधले कोहरे, और भी कुछ

सुरेन्द्र अरोड़– बर्फ

मनहर चौहान– बीस सुबहों के बाद

राम कुमार भ्रमर– लव पर रखी हुई हथेली आदि

इस समय की प्रमुख कहानियाँ हैं।

सामानांतर कहानी आंदोलन:

  • हिन्दी साहित्य में यह आंदोलन कालेश्वर द्वारा (1972 ई०) के आसपास प्रारंभ किया गया।
  • इस दौड़ में कमलेश्वर ‘सारिका’ पत्रिका के संपादक थे।
  • सारिका पत्रिका के धारावाहिक के रूप में समान्तर कहानी पर तीन विशेषांक निकाले
  • भीष्म साहनी, शैलेश मटियानी, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर इस आंदोलन के प्रमख कहानीकार थे।
  • इस पत्रिका के माध्यम से उन्होंने इस आंदोलन को व्यापक बनाने का प्रयास किया।
  • समान्तर कहानी आंदोलन ने आम आदमी को प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया था।
  • भैरवप्रसाद गुप्त ने इसे क्रांति के नाम पर क्रांति के पीठ पर छूरा भोंकना बताया था।
  • यह कहानी आंदोलन भी बहुत सफल नहीं रहा। यह कमलेश्वर तथा उनसे जुड़े लेखकों तक ही सीमित रहा।

से. रा. यात्री, मेहरुन्निसा परवेज, जितेन्द्र भाटिया, मधुकर सिंह, इब्राहिम शरीफ, दाकोदर सदन, स्वदेश दीपक, आलमशाह खान, निरुपमा शोभती, सुधा अरोड़ा आदि कहानीकार इस आंदोलन से जुड़े थे।

प्रमुख कहानी और कहानीकार:

कामतानाथ- तीसरी आँख

से० रा० यात्री– गौरव

सूर्यबाला– निर्वासित

दिनेश पालीवाल– दुश्मन

जितेन्द्र भाटिया– शहादतनाम आदि

इस समय की प्रमुख कहानियाँ है।    

सहज कहानी आंदोलन:

सहज कहानी आंदोलन का सूत्रपात अमृतराय ने 1968 ई० में ‘नयी कहानियाँ’ मासिक पत्रिका के माध्यम से किया।

यह कहानी आंदोलन अमृतराय द्वारा ‘नयी कहानियाँ’ में लिखी गई संपादकीय टिपण्णी तक ही सीमित रहा।    

सक्रिय कहानी आंदोलन:

  • सन् 1979 ई० राकेश वत्स ने मंच पत्रिका के माध्यम से सक्रिय कहानी आंदोलन के नाम से एक नया कहानी आंदोलन चलाया।
  • राकेश वत्स के अनुसार “सक्रिय कहानी ‘चेतनात्मक उर्जा और जीवंतता’ की कहानी है।”
  • सक्रिय कहानी अपना संबंध फणीश्वर नाथ रेणु और नागार्जुन से जोड़ती है।
  • वह ‘वाम चेतना’ को अपनाती है, लेकिन मार्क्सवाद या अन्य किसी वाद में जकड़ना नहीं चाहती है।
  • यह कहानी समाज में फैले व्यापक शोषण के विरुद्ध आवाज उठाती है और शोषण के कारणों को रेखांकित करती है।

प्रमुख कहानी और कहानीकार:

राकेश वत्स- काले पेड़

रमेश बतरा– जंगली जुगरा किया

धीरेन्द्र अस्थाना– लोग हाशिये पर आदि

अतः यह कहा जा सकता है, कि कहानी आंदोलन अपने समय में उभरा और अपनी खास विशेषताओं के कारण अपनी सीमाओं में बंधा रहा।

फलस्वरूप कोई भी कहानी आन्दोलन सफलता के साथ भले ही नहीं चाल पाया मगर नयी कहानी आन्दोलनों ने हिन्दी कहानी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।   

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