हिन्दी साहित्य की गद्य विधा ‘निबंध’ (इकाई-2)

निबंध का शाब्दिक अर्थ- वह रचना जिसमे विचार तथ्य आदि पूर्णतया बंधा हुआ हो उसे निबंध कहते है।

“किसी एक विषय पर विचारों को क्रमबद्ध कर सुंदर, सुगठित और सुबोध भाषा में लिखी रचना को निबंध कहते हैं।”

रामचंद्र वर्मा ने ‘संक्षिप्त हिन्दी सागर में निबंध’ के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा है- “गद्य में रचित वह साहित्यिक रचना जिसमे प्रबंध के रूप में विचारों का रोचक गुफन हो।”

निबंध की परिभाषाएँ  

  • यूरोप में निबंध का ‘जनक’ मानतेन / मोंटेन (फ्रेंच विद्वान) को माना जाता है।
  • मानतेन विश्व के पहले निबंधकार थे। इनका समय: (1533-1592 ई०)
  • इन्होने निबंध की परिभाषा देते हुए कहा है- “निबंध विचारों, कथाओं और उद्धरणों का मिश्रण है।”
  • अंग्रेजी में निबंध के जनक ‘लार्ड बेकन’ थे। इनका समय (1561-1626 ई०) था। ये इंग्लैंड के रहने वाले थे।

लार्ड बेकन के शब्दों में- “निबंध बिखराव युक्त चित्त है।”

जॉनसन के शब्दों में- “निबंध मन का आकस्मिक और चिंतनहीन बुद्धि विलास मात्र है।”

डॉ भागीरथी मिश्र के शब्दों में- “निबंध वह गद्य रचना है, जिसमे लेखक किसी विषय पर लेखक किसी स्वच्छंदता पूर्वक परन्तु किसी विशेष सौष्ठव संहिती सजीवता और व्याक्तिकता के साथ अपने भावों विचारों और अनुभवों को व्यक्त करता है।”

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के शब्दों में- “प्रमाणों का ‘निबंधन’ ही ‘निबंध’ है। निबंध व्यक्ति की स्वाधीनता की उपज है।”

श्यामसुंदर दास के शब्दों में- “निबंध उस लेख को कहना चाहिए जिसमे किसी गहन विषय पर विस्तारपूर्वक पांडित्यपूर्ण विचार किया गया हो।”

बाबू गुलाबराय के शब्दों में- ‘‘निबंध उस गद्य-रचना को कहते हैं, जिसमें एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छंदता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगीत और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।’’ 

आचार्य शुक्ल के अनुसार- “यदि गद्य कवियों को कसौटी है, तो निबंध गद्य की।’’ 

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल निबंध के रहस्य को उद्घाटित करते हुए कहते हैं- “निबंध उसी को कहना चाहिए जिसमे व्यक्तित्व अथार्त व्यक्तिगत विशेषता हो। यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है, तो निबंध गद्य की कसौटी है। भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबंध में ही सबसे अधिक सम्भव होता है।’’

इस प्रकार निबंध किसी विषय पर विचार प्रगट करने की कला है। इसमें विचारों को क्रमबद्ध रूप में पिरोया जाता है। इसमें ज्ञान विचार और व्यक्तित्व का अद्भुत संगम होता है।

निबंध की शैलियाँ:  

समास शैली- इस प्रकार के निबंध शैली में निबंधकार कम से कम शब्दों में अधिक-से-अधिक बातों का प्रतिपादन करता है। इस शैली का प्रयोग विचारात्मक निबंधों के लिए किया जाता है। इस प्रकार के निबंध में वाक्य सुगठित और कसे हुए होते हैं। गंभीर विषयों के लिए इस शैली का प्रयोग किया जाता है। (आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध इस शैली के उदाहरण है)

व्यास शैली- इस तरह के निबंधों में लेखक अपने विचारों को बढ़ा-चढ़ाकर विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करता है। लेखक अपने विभिन्न तर्कों और उदाहरणों के ज़रिए व्याख्यायित करता है। वर्णनात्मक, विवरणात्मक और तुलनात्मक निबंधों में निबंधकार इसी प्रकार के शैली का प्रयोग करता है। (श्यामसुंदर दास के निबंध इस शैली के उदाहरण है)

तरंग शैली- इस शैली के निबंधों में वाक्य छोटे, सरल तथा कभी-कभी क्रियाहीन भी हो जाए। उसे तरंग शैली कहते है। इसका प्रयोग भावात्मक निबंधों में होता है। (सरदार पूर्ण सिंह इस शैली के उदाहरण है)

धारा शैली- इस प्रकार शैली में अपने भावों या विचारों को तेज प्रवाह गति से अभिव्यक्त किया जाता है। इसका प्रयोग भावात्मक शैली के निबंधों में किया जाता है। (सरदार पूर्ण सिंह के निबंध इस शैली के उदाहरण है)

विक्षेप (भटकाव) शैली- जहाँ मन पर संयम नहीं हो, विचार भटके हुए हो उसे विक्षेप शैली कहते है। इसमें निबंधकार अपने मन के मुताबिक़ बात कहता हुआ चलता है। विषय पर केंद्रित अवश्य रहता है। (डॉ रघुवीर सिंह के निबंध इसके उदाहरण है। ‘शेष स्मृतियाँ’)

प्रलाप (अनाप-सनाप बकना) शैली- जब किसी लेख भावों में उच्छृंखला आ जाती है। दुःख और विरह से संबंधित इस शैली में लिखे जाते हैं। 

व्यंग्य शैली– जब रचनाकार लक्षणा या व्यंजना में अपने भावों या विचारों को व्यक्त करे। इस शैली में निबंधकार व्यंग्य के माध्यम से अपने विषयों का प्रतिपादन करते है। इसमें विषय धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि भी हो सकते हैं। इसमें रचनाकार किंचित हास्य का पुट देकर विषय को पठनीय बना देता है। शब्द चयन और अर्थ के चमत्कार की दृष्टि से इस शैली का निबंधकारों में विशेष प्रचलन है। व्यंग्यात्मक निबंध इसी शैली में लिखे जाते हैं। (हरिशंकर परसाई, शरद जोशी की निबंध इसके उदाहरण है)

निबंध के निम्न चार तत्व है-

1.शीर्षक ‘शीर्षक’ संक्षेप और रोचक होनी चाहिए  

2.प्रस्तावना या भूमिका– यह निबंध का नींव होता है। विषय वस्तु की तरफ संकेत किया जाता है।

3.विस्तार- लेखक के द्वारा अपने दृष्टिकोण का प्रतिपादन उदाहरणों, दृष्टान्तों आदि से समाप्ति होता है।

4.उपसंहार- उपदेश और उदाहारण से समाप्ति होता है।

निबंध के भेद: वर्णात्मक निबंध, विचारात्मक निबंध, ललित निबंध, व्यंग्य निबंध, साहित्यिक और आलोचनात्मक निबंध।

हिन्दी का प्रथम निबंधकार:

आचार्य रामचंद्र शुक्ल, गुलाबराय के अनुसार-

भारतेंदु हरिश्चंद्र के द्वारा लिखा गया (1872 ई०) में लिखा गया ‘नाटक’ निबंध हिन्दी का पहला (आलोचनात्मक) निबंध है।

‘नाटक तथा अन्य कलाएँ’ निबंध भारतेंदु जी ने 1883 ई० में लिखा गया।

डॉ० लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय, डॉ० श्री कृष्ण लाल के अनुसार-

बालकृष्ण भट्ट को माना है। बालकृष्ण भट्ट को हिन्दी का ‘मोंटेन’ कहा जाता है। बालकृष्ण भट्ट को हिन्दी का ‘स्टील’ (रामचन्द्र शुक्ल) ने कहा था।

आचार्य गपतिचंद्र गुप्त के अनुसार-

पहला निबंधकार राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिन्द’ को पहला निबंधकार माना है। 1839 ई० में ‘राजाभोज का सपना’ इसे कुछ लोग कहानी कुछ लोग निबंध मानते है।

विश्वनाथ एम० ए० के अनुसार- इन्होने मुंशी सदासुख लाल को हिन्दी का पहला निबंधकार माना है। निबंध ‘सुरासुर निर्णय’ 1840 ई० में किया।

हिन्दी निबंध का विकाश क्रम:

भारतेंदु युग 1857 – 1900 ई०

द्विवेदी युग 1900 – 1920 ई०

शुक्ल युग 1920 – 1940 ई०

शुक्लोत्तर युग 1940 – अब तक  

1.भारतें युग (1857 – 1900 ई०)

भारतेंदु युग के निबंधों विशेषताएँ:

  • विषय की विविधता थी।
  • साहित्य को जन-जीवन के समीप लाने का प्रयास हैं।
  • लेखकों एवं पाठकों के बीच आत्मीयता थी।
  • सामाजिक सुधार की भावना इन निबंधों में होती थी।
  • देश प्रेम की प्रवृति और राज भक्ति भी थी।

भारतेंदु युग में मुख्यतः दो  प्रकार की निबंधों रचनाएँ हुई थी:

सामाजिक विषयों पर आधारित निबंधों की रचना हुई थी। जैसे धर्म, देश भक्ति, आचार-व्यवहार, सामाजिक पतन, विधवा-विवाह आदि।

विज्ञान इतिहास एवं मनोभावों पर आधारित साहित्यिक निबंध की रचना की गई थी।

भारतेंदु युग के प्रमुख निबंधकार:

बालकृष्ण भट्ट (1844 – 1904 ई०)

जन्म: 3 जून 1844 ई० इलाहाबाद (उ.प्र.)

निधन: 20 जुलाई 1904 ई०

बालकृष्ण भट्ट के प्रमुख निबंध संग्रह: साहित्य सुमन, भट्ट निबंधावली    

काशीनाथ खत्री (1849 – 1891ई०)

भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850 – 1885 ई०

जन्म: 9 सितंबर (1850 ई०) वाराणसी

निधन: 6 जनवरी (1885 ई०)

भारतेंदु हरिश्चन्द्र के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

नाटक, कालचक्र (जर्नल), लेवी प्राण लेवी, भारतवर्षोंउन्नति कैसे हो सकती है?, कश्मीर कुसुम, जातीय संगीत, संगीत सार, हिन्दी भाषा, स्वर्ग में विचार सभा

मोहनलाल विष्णुलाल पांड्या (1850 -1912 ई०)

बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघन (1855 – 1923 ई०)

जन्म: 1 सितन्बर (1855 ई०) मिर्जापुर (उ.प्र.)

निधन: (1923 ई०)                                      

प्रतापनारायण मिश्र (1856 – 1894 ई०)

जन्म: 24 सितंबर (1856 ई०) उन्नाव (उ.प्र.)

निधन: 6 जुलाई (1894 ई०)

प्रतापनारायण मिश्र के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

निबंध नवनीत, प्रताप पियूष, प्रताप समीक्षा।

राधाचरण गोस्वामी (1859 – 1925 ई०)

जन्म: 25 फ़रवरी (1859 ई०)

निधन: 12 दिसंबर (1925 ई०)

द्विवेदी युग (1900 – 1920 ई०)

द्विवेदी युग के निबंधों की विशेषताएँ:

इस युग में विचार प्रधान निबंध लिखें गए थे।  

निबंध रचना के सभी शैलियों का प्रयोग किया गया।

अनुवाद की परंपरा भी सुदृढ़ थी।

इन निबंधों में नवजागरण का संदेश था।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण, और वैज्ञानिक अविष्कारों पर निबंध लिखें गए।

पुरातत्व, इतिहाश, भूगोल, सामाजिक, धार्मिक आदि विषयों पर निबंध लिखे गए।

साहित्य और भाषा, जीवन चरित आदि विषय की विविधता थी।

2. द्विवेदी युगके प्रमुख रचनाकार:

गोबिंद नारायण मिश्र (1859 – 1926 ई०)

महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864 – 1938 ई०)

बाल मुकुंद गुप्त (1865 – 1907 ई०)

बालमुकुन्द गुप्त को द्विवेदी और भारतेंदु युग का योजक कड़ी कहा जाता है।

माधव प्रसाद मिश्र (1871 – 1907 ई०)

श्याम बिहारी मिश्र (1873 – 1947 ई०)  

जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी (1875 – 1939 ई०)

श्यामसुंदर दास (1875 – 1945 ई०)

पदम् सिंह शर्मा (1876 – 1932 ई०)

पदम् सिंह शर्मा को तुलनात्मक आलोचना का जनक माना जाता है।

शुकदेव बिहारी मिश्र (1878– 1951 ई०)

सरदार पूर्ण सिंह (1881 – 1939 ई०)

चंद्रधर शर्मा गुलेरी (1883 – 1922 ई०)

कृष्ण बिहारी मिश्र (1890 – 1959 ई०)

बाबुगुलाब राय (1890 – 1939 ई०)

महावीर प्रसाद द्विवेदी- (1864 – 1938 ई०)

जन्म- 1864 ई० दौलतपुर रायबरेली (उ० प्र०)

निधन- 1938 ई०

महत्वपूर्ण निबंध- प्रभात, म्युनिसिविलिटी के कारनामे, कवि और कविता, कविता, साहित्य की महत्ता, गोपियों की भागवत भक्ति, कालिदास का आत्म निवेदन, क्रोध, लोभ, लेखांजली, महाकवि माघ का प्रभात वर्णन, कवि कर्तव्य, साँची के पुराने स्तूप, प्रतिभा, अतीत की स्मृतियाँ।

महावीर प्रसाद द्विवेदी के निबंधों का वर्गीकरण:

साहित्यिक निबंध- कविवर लच्छीराम, बलदेव प्रसाद मिश्र, सत्यनारायण मिश्र, अरविंद घोष, रविन्द्रनाथ ठाकुर, नाटक, नाट्यशास्त्र, कवि बनने के सापेक्ष साधन, साहित्य की महत्ता, नायिका भेद, कवि और कविता

चरित्रप्रधान निबंध- महात्मा बुद्ध, शंकराचार्य, भीष्म पितामह, महाकवि होमर, सवाई जयसिंह, विजय धर्म सुरि।

ऐतिहासिक एवं पुरातत्व संबंधी निबंध- आर्यों की जन्मभूमि, सोमनाथ मंदिर की प्राचीनता, भारतवर्ष के पुराने खंडहर।

विज्ञान संबंधी निबंध- प्राचीन भारत के जहाज, मंगल ग्रह तक तार, प्राचीन भारत में रसायन विद्या।

भूगोल संबंधी निबंध- व्योम विहरण, सौर जगत की उत्पति

उद्योग शिल्प संबंधी निबंध- खेती की बुरी दशा, हिन्दुस्तान का व्यापार, भारत में औधोगिक शिक्षा।

अध्यात्मिक धार्मिक निबंध- पुनर्जन्म का प्रत्यक्ष प्रमाण, वैदिक देवता, धर्म और कर्म, विष्णु का लोकोपकार।

भाषा और व्याकरण संबंधी निबंध- हिन्दी नवरत्न, अक्षर विज्ञान, संस्कृत साहित्य का महत्व, शब्दार्थ विचार।

महावीर प्रसाद द्विवेदी के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह- कवि कर्तव्य (निबंध और निबंध संग्रह दोनों है), रसज्ञ रंजन, साहित्य सीकर, साहित्य संदर्भ, कवि और पंडित, आलोचनांजलि, कौटिल्य, वनिता विलास, बेकन विचार रत्नावली (अनुदित निबंध संग्रह है)

श्यामसुंदर दास- (1875 – 1945 ई०) इन्होने लगभग 40 निबंध लिखें है

जन्म: (1875 ई०) काशी में हुआ था

निधन: (1945 ई०)

श्यामसुंदर दास के महत्वपूर्ण निबंध:

गद्य कुसुमावली इनके कूल 8 निबंध संग्रह है।

चंदबरदाई, गोस्वामी तुलसीदास, समाज और साहित्य, भाषा और भाषण, ललित कलाएँ और काव्य, सूरदास, हमारी भाषा, कर्तव्य और सभ्यता।

इनका ‘साहित्य लोचन’ निबंध आलोचना संबंधी निबंध है।

पदम् सिंह शर्मा (1876 – 1932 ई०)

जन्म: (1876 ई०), नगवा ग्राम, बिजनौर उत्तर प्रदेश  

निधन: (1932 ई०)

महत्वपूर्ण निबंध: पदम् पराग (यह निबंध प्रबंध मंजरी में संकलित है) 

बाल मुकुंद गुप्त (1865 – 1907 ई०)

बालमुकुन्द गुप्त को द्विवेदी और भारतेंदु युग का योजक कड़ी कहा जाता है।

जन्म: 14 नवंबर (1865 ई०), गुड़ियानी गाँव, जिला रिवाड़ी, हरियाणा 

निधन: 18 सितंबर (1907 ई०)

महत्वपूर्ण निबंध: शिवशम्भू का चिठ्ठा, चिठ्ठे और ख़त

सरदार पूर्ण सिंह (1881 – 1939 ई०)

जन्म: 17 फ़रवरी (1881 ई०) एबटाबाद, पकिस्तान

निधन: 31 मार्च (1939 ई०) देहरादून, उत्तराखाब्द

महत्वपूर्ण निबंध: आचरण की सभ्यता, सच्ची वीरता, मजदूरी और प्रेम, पवित्रता, कन्यादान, अमरीका का मस्त जोगी ह्वेटमैन

चंद्रधर शर्मा गुलेरी (1883 – 1922 ई०)

जन्म: 1883 ई० जयपुर

निधन: 1922 ई० 

चंद्रधर शर्मा गुलेरी के महत्वपूर्ण निबंध:

कछुआ धरम, मारेसि मोहि कुठाव, अमंगल के स्थान पर मंगल शब्द, गोबर गणेश संहिता, धर्म और समाज, वंशच्छेद

निबंध संग्रह: ‘गोबर गणेश संहिता’ यहा निबंध और निबंध संग्रह दोनों है।

बाबुगुलाब राय (1890 – 1939 ई०)

जन्म: 17 जनवरी (1890 ई०), इटावा उत्तर प्रदेश 

निधन: 13 अप्रैल (1939)

महत्वपूर्ण निबंध: ठलुआ क्लब, फिर निराशा क्यों?, मान की बातें, मेरी असफलताएँ, कुछ उथले कुछ गहरे।

शुक्ल युग 1920 – 1940 ई०

शुक्ल युग की निबंधों की विशेषताएँ:

गम्भीर एवं चिंतन प्रधान निबंध लिखा गया।  

साहित्य एवं आलोचनात्मक निबंधों की प्रमुखता थी।

विषय के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण है।

इनके निबंधों में मौलिकता अधिक है।

मनोविकारो की प्रौढ़ व्याख्या की गई है।

लोकमंगल की भावना और व्यंग्य की भी प्रधानता है।

3. शुक्ल युग के प्रमुख निबंधकार:

आचार्य रामचंद्र शुक्ल (1884 – 1941 ई०)

जयशंकर प्रसाद (1889 – 1937 ई०)

माखनलाल चतुर्वेदी (1889 – 1968 ई०)

आचार्य चतुरसेन शास्त्री (1891 – 1960 ई०)

रायकृष्ण दास (1892 – 1995 ई०)  

राहुल सांकृत्यायन (1893 – 1963 ई०)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (1896 – 1961 ई०)  

वियोगी हरि (1896 – 1988 ई०)

नंददुलारे वाजपेयी (1906 – 1967 ई०)

शांतिप्रिय द्विवेदी (1906 – 1967 ई०)

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ (1906 – 1995 ई०)

रघुवीर सिंह (1909 – 1991 ई०)

आचार्य रामचंद्र शुक्ल- (1884 – 1941 ई०) इनके 106 निबंध है।

जन्म: 1884 ई० अगौना, बस्ती (उ०प्र०) में हुआ था।

निधन: 1941 ई०

प्रथम निबंध ‘साहित्य’ 1904 ई० के ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

आचार्य रामचंद्र के निबंध संग्रह:  

‘विचार वीथी’ 1930 ई० प्रकाशित, इसमें कूल 12 निबंध है।

‘काव्य में अभिव्यंजनावाद’ (1935 ई०) यह निबंध और निबंध संग्रह दोनों है।

चिंतामणि भाग-1 1939 ई० इसमें 17 निबंध है। (इसका संपादन रामचंद्र शुक्ल ने किया था)

चिंतामणि भाग-2 1945 ई० इसमें 3 बड़े निबंध है।

चिंतामणि भाग-3 1983  ई० इसमें 21 निबंध है। (इसका संपादन डॉ नामवर सिंह ने किया था)

चिंतामणि भाग-4 2002 ई० इसमें 47 निबंध है। (कुसुम चतुर्वेदी और ओम प्रकाश ने संपादन किया था।

चिंतामणि भाग-1 (1939 ई०)

संपादक: रामचंद्र शुक्ल है इसमें कूल 17 निबंध है

यह निबंध संग्रह ‘विचार वीथी’ का ही परिस्कृत एवं परिवर्द्धित रूप है।

यह मनोविकारात्मक निबंध है:

भाव या मनोविकार, उत्साह, श्रद्धा भक्ति, करुणा, लज्जा और ग्लानि, लोभ और प्रीति, घृणा, ईर्ष्या, भय।

ये सभी चारों निबंध सैद्धांतिक समीक्षा से संबंधित निबंध है:

कविता क्या है, भारतेंदु हरिश्चन्द्र, तुलसी का भक्तिमार्ग, मानस की धर्म भूमि।

ये तीनों निबंध आलोचना से संबंधित है:

काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था

साधारणीकरण और व्यक्ति वैचित्र्यवाद

रसात्मक बोध के विविध रूप

चिंतामणि भाग- 1 के विषय में शुक्ल जी का कथन- “इस पुस्तक में मेरी अंतर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश है। यात्रा के लिए निकलती रही है। बुद्धि पर हृदय को भी साथ लेकर।”

चिंतामणि भाग- 2

प्रकाशन वर्ष: (1945 ई०)

संपादक: विश्वनाथ प्रसाद मिश्र है

इसमें कूल तीन बड़े निबंध है।

काव्य में प्रकृति दृश्य

काव्य में रहस्यवाद

काव्य में अभिव्यंजनावाद

चिंतामणि भाग- 3

प्रकाशन वर्ष: 1983 ई०

संपादक: डॉ नामवर सिंह

इसमें कूल 21 निबंध है।

चिंतामणि भाग- 3 के महत्वपूर्ण निबंध:

प्रेमघन की छाया स्मृति में (संस्मरणात्मक निबंध है)

कल्पना का आनंद

जोसेफ एडिसन के प्रेजर्स

बुद्धचरित की भूमिका

विश्व प्रपंच की भूमिका    

चिंतामणि भाग-4

प्रकाशन वर्ष: 2002 ई०

सम्पादक: कुसुम चतुर्वेदी और ओम प्रकाश सिंह

इसमें कूल 47 निबंध है

चिंतामणि भाग- 4 का महत्वपूर्ण निबंध:

प्राण तत्व

आकाश का नीला रंग

निंद्रा रहस्य

जाती व्यवस्था

भारत को क्या करना चाहिए

विकाशवाद- लगभग 30 पेज का लंबा निबंध है।

4. शुक्लोत्तर युग 1940 ई०- लगातार, अब तक (आ० रामचंद्र शुक्ल के बाद का युग)

इस युग में साहित्यिक और आलोचनातमक निबंधों की प्रधानता है।

विषय विविधता पर्याप्त है। नवीन शिल्प विधान भी है।

इन युग में संवेदनशीलता और सामाजिकता पर निबंध लिखे गए।

सम-सामयिक समस्याओं का चित्रण है।

मनोविश्लेष्णात्मल निबंध भी लिखे गए।

शुक्लोत्तर युग के प्रमुख निबंधकार:

रामवृक्ष बेनीपुरी (1899 – 1968 ई०)

इलाचन्द्र जोशी (1902 – 1982 ई०)

यशपाल (1903 – 1976 ई०)

वासुदेवशरण अग्रवाल (1904 – 1966 ई०)

जैनेन्द्र (1905 – 1988 ई०)

विनय मोहन शर्मा (1905 – 1993 ई०)

राजबली पांडेय (1907 – 1971 ई०)

हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907 – 1979 ई०)

हरिवंशराय बच्चन (1907 – 2003 ई०)

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908 – 1974 ई०)

भगवतशरण उपाध्याय (1908 – 1982 ई०)

अज्ञेय (1911 – 1987  ई०)

रामविलास शर्मा (1912 – 2000 ई०)

इन्द्रनाथ मदान (1914 – 1984 ई०)

डॉ० भागीरथ मिश्र (1914 – 1984 ई०)

डॉ० नगेन्द्र (1915 – 1999 ई०)

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ (1917 – 1964 ई०)

प्रभाकर माचवे (1917 – 1991 ई०)

हरिशंकर परसाई (1924 – 1995 ई०)

विवेकीराय (1924 – 2016 ई०)

धर्मवीर भारती (1926 – 1997 ई०)

डॉ नामवर सिंह (1927 – 2019 ई०)

निर्मल वर्मा (1929 – 2005 ई०)

कुबेरनाथ राय (1933 – 1996 ई०)

हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907 – 1979 ई०) ये ललित निबंधकार है।

जन्म: (19 अगस्त 1907 ई०) आरत का दूबे का छापड़ा, ओझवलिया, बलिया जिला (उ०प्र)

निधन: 19 मई, 1979 ई०

बचपन का नाम: वैद्दनाथ द्विवेदी था।

उपनाम: व्योमकेश दरवेश, आधुनिक वाणभट्ट

इन्होने लगभग 200 सौ निबंध लिखें। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के बाद हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ निबंधकार है।

इनका प्रथम निबंध-  ‘बसंत आ गया’ (1942 ई०) में लिखा गया।

हजारी प्रसाद द्विवेदी के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

‘अशोक के फूल’ (1948 ई०) यह निबंध और निबंध संग्रह दोनों है। इस संग्रह में 21 निबंध है।

अशोक के फूल में संकलित महत्वपूर्ण निबंध:

अशोक के फूल

बसंत आ गया

घर जोड़ने की माया

राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली

संस्कृत का साहित्य

काव्य कला

मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है।

‘कल्पलता’ (1951 ई०) इसमें निबंधों की संख्या 21 है।

कल्पलता में संकलित महत्वपूर्ण निबंध:

नाखून क्यों बढ़ते है

आम फिर बौरा गए

शिरीष के फूल

ठाकुर जी की बटोर

साहित्य का नया कदम

‘मध्यकालीन धर्म साधना’ (1952 ई०) निबंध संग्रह है।

इसमें निबंधों की संख्या 20 है।

विचार और वितर्क (1957 ई०) इसमें निबंधों की संख्या 28 है ।

विचार और वितर्क में संकलित प्रमुख निबंध:

हिन्दी भक्ति साहित्य

साहित्य के नये मूल्य

लोक साहित्य का प्रयोजन लोक कल्याण

विचार प्रवाह (1959 ई०) इसमें कूल निबंधों की संख्या 21 है।

विचार प्रवाह में संकलित प्रमुख निबंध:   

साहित्य में मौलिकता का प्रश्न

साहित्य में व्यक्ति और समिष्टि

विश्वभाषा हिन्दी

कुटज (1964 ई०) इसमें निबंधों की संख्या 16 है। (‘कुटज’ निबंध भी है इसका प्रकाशन वर्ष 1960 ई० में हुआ )

कुटज निबंध संग्रह में संकलित प्रमुख निबंध:

कुटज

देवदास

फिर से सोचने की आवश्यकता है

भारतीय संस्कृति के मूल स्त्रोतवेद

हिन्दी का वर्तमान और भविष्य

साहित्य सहचर (1965 ई०) निबंध संग्रह है।

इसमें निबंधों की संख्या 12 है।

आलोक पर्व (1972 ई०) इसमें निबंधों की संख्या 14 है। आलोक पर्व के लिए 1973 ई० में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

आलोक पर्व में संकलित प्रमुख निबंध: (इस संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था)

हिमालय

व्योमकेश शास्त्री उर्फ़ हजारीप्रसाद द्विवेदी

प्राचीन ज्योतिष

भाषा सर्वेक्षण

मध्ययुगीन भारतीय संस्कृति और हिन्दी

हजारी प्रसाद द्विवेदी के समस्त निबंधों का प्रकाशन ‘हजारी प्रसाद ग्रंथावली’ के नाम से हो चुका है। इसमें 11 खडं है इस ग्रंथावली में इनके 194 निबंध है।

हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंधों का वर्गीकरण:

संस्कृति निबंध- संस्कृतियों का संगम, भारत की सांस्कृतिक समस्या, भारतीय संस्कृति की देन।

साहित्यिक निबंध- मनुष्य की सर्वोत्तम कृति साहित्य, साहित्य का नया कदम, साहित्य की मौलिकता का प्रश्न।

भाषा संबंधित निबंध- संस्कृत और हिन्दी, हिन्दी प्रचार की समस्या।

शास्त्रीय निबंध- काव्यकला, रस क्या है , रस का व्यावहारिक अर्थ, आलोचना का स्वतंत्र मान।

प्रकृति विषयक निबंध- आम फिर बौरा गए, शिरीष के फूल, अशोक के फूल।

ज्योतिष से संबंधित निबंध- भारतीय फलित ज्योतिष।

डॉ० नगेन्द्र (1915 – 1999 ई०)

जन्म: 9 मार्च (1915 ई०) अतरौली, अलीगढ़ (उ.प्र.) 

निधन: 27 औक्तुबर (1999 ई०) नई दिल्ली  

डॉ नगेन्द के प्रमुख निबंध संग्रह:

विचार और अनुभूति (1949 ई०)

आधुनिक हिन्दी कविता की प्रमुख प्रवृतियाँ (1951 ई०)

विचार विश्लेषण (1955 ई०)

विचार विवेचन (1959 ई०)

अनुसंधान और आलोचना (1961 ई०)

आस्था के चरण (1968 ई०)

आलोचना की आस्था (1966 ई०)

कुबेरनाथ राय (1933- 1996 ई०)

जन्म: 26 मार्च 1933 ई० मतसाँ, गाजीपुर (उ.प्र.)

निधन: 5 जून (1996 ई०)

इन्होने कूल 258 निबंध लिखें है। पहली निबंध ‘काव्य के प्रतिमान’ (1962 ई०) में प्रकाशित हुआ

कुबेरनाथ राय के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

प्रिया नीलकंठी (1968 ई०)

रस आखेटक (1970 ई०)

गंधमादन (1972 ई०)

विषादयोग (1973 ई०) 

निषाद बाँसुरी (1974 ई०)

पर्णमुकुटी (1978 ई०)

महाकवि की तर्जनी (1979 ई०)

कामधेनु (1980 ई०)

पत्रमणि पुतुल के नाम (1980 ई०)

मन पवन की नौका (1982 ई०)

किरात नदी में चंद्रमधु (1983 ई०)

दृष्टि अभिसार (1984 ई०)

त्रेता का वृहतसाम (1986 ई०)

मराल (1993ई० हंस)

उत्तरकुरु (1994 ई०)

वाणी का क्षीरसागर (1998 ई०)

अंधकार में अग्निशिखा (1998 ई०)

आगम की नाव (2000ई०)

कुबेरनाथ राय के निबंधों की विशेषता:

सांस्कृतिक चेतना और लोक जीवन का वर्णन है।

अधिकांश निबंध सांस्कृतिक से संबंधित है।

इसमें धरा शैली का अत्यधिक प्रयोग है।

अधिकांशतः इन्होने भावात्मक निबंध लिखे है।

धर्मवीर भारती (1926 – 1997 ई०)

जन्म: 25 दिसंबर (1926 ई०) प्रयागराज

निधन: 4 सितंबर (1997 ई०)

धर्मवीर भारती के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह :

ठेले पर हिमालय (1958 ई०)

मानव मूल्य और साहित्य (1960 ई०)

पश्यन्ति (1969 ई०)

कहनी अनकहनी (1970 ई०)

शब्दिता (1977 ई०)

कुछ चहरे कुछ चिंतन (1995 ई०)

निर्मल वर्मा (1929 – 2005 ई०)

जन्म: 3 अप्रैल (1929 ई०) शिमला

निधन: 25 औक्तुबर (2005 ई०)

निर्मल वर्मा के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह :

चीड़ों पर चाँदनी (1964 ई०)

हर बारिश में (1970  ई०)

शब्द और स्मृति (1976 ई०)

कला का जोखिम (1981ई०)

ढलान से उतारते हुए(1985 ई०)

हरिशंकर परसाई (1924 – 1995 ई०)

जन्म: 22 अगस्त (1924ई०) होशंगाबाद

निधन: 10 अगस्त (1995 ई०)

हरिशंकर परसाई के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह :

पगडंडियों का ज़माना (1966 ई०)

जैसे उनके दिन फिरे (1963 ई०)

सदाचार का ताबीज (1967 ई०)

शिकायत मुझे भी है (1970 ई०)

ठिठुरता हुआ गणतंत्र (1970 ई०)

वैष्णव का फिसलन (1967 ई०)  

विकलांग श्रद्धा का दौर (1980 ई०)

भूत के पाँव पीछे (1983 ई०)

बेईमानी की परत (1983 ई०)

सुनों भाई साधो (1983 ई०)

तुलसीदास चन्दन घिसे (1986 ई०)

कहत कबीर (1987 ई०)

हँसते हैं रोते है (1993 ई०)

तबकी बात और थी (1993 ई०)

ऐसा भी सोचा जाता है (1993 ई०)

पाखण्ड का अध्यात्म (1998 ई०)

आवारा भीड़ के खतरे (1998 ई०)

निंदा रस

डॉ० प्रभाकर माचवे (1917 – 1991 ई०)

जन्म: 26 दिसंबर (1917 ई०) ग्वालियर, मध्य प्रदेश 

निधन: (1991 ई०)

डॉ० प्रभाकर माचवे के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

खरगोश के सींग (1951 ई०)

संतुलन (1954 ई०)

बेरंग (1955 ई०)

रामवृक्ष बेनीपुरी (1899 – 1968 ई०)

जन्म: 23 दिसंबर, (1899 ई०) ललित निबंधकर

निधन: (1968 ई०)

रामवृक्ष बेनीपूरी महान विचारक, चिन्तक, मनन करने वाले क्रान्तिकारी साहित्यकार, पत्रकार, संपादक थे। वे हिन्दी साहित्य के शुक्लोत्तर युग के प्रसिद्ध साहित्यकार थे।

रामवृक्ष बेनीपुरी के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह

माटी की मुरते- (1941-45 ई०)

गेहूँ और गुलाब- (1948–50 ई०)

वन्देवाणी और विनायकी (1953- 54 ई०)

इलाचन्द्र जोशी (1902 – 1982 ई०)

जन्म: 13 दिसम्बर, (1903 ई०)

निधन: (1982 ई०) हिन्दी में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों के आरम्भकर्ता माने जाते हैं।

इलाचंद्र जोशी के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

साहित्य सर्जना (1938 ई०)

साहित्य चिंतन (1934 ई०)

विवेचना (1943 ई०)  

विश्लेषण (1953 ई०)

साहित्य चिंतन (1934 ई०)

देखा-परखा (1957 ई०) ।

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908 – 1974 ई०)

जन्म: 23 सितंबर (1908 ई०) सिमरिया  

निधन: 24 अप्रैल (1974 ई०) बेगुसराय

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

मिट्टी की ओर (1946 ई०)

अर्द्धनारीश्वर (1952 ई०)

रेती के फूल (1954 ई०)

हमारी सांस्कृतिक एकता (1956 ई०)

उजली आग (1956 ई०)

वेणुवन (1958ई०)

राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय एकता (1958 ई०)

धर्म नैतिकता और विज्ञान (1959 ई०)

वटपीपल (1961 ई०)

साहित्यमुखी आशुनिकता बोध(1973 ई०)

सच्चीदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (1911 – 1987 ई०)

जन्म: 7 मार्च (1911 ई०) उत्तर प्रदेश के कसया

निधन: 4 अप्रैल (1987 ई०)

सच्चितानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

त्रिशंकु (1945 ई०)

सबरंग कुछ राग (1956 ई०)

आत्मनेपद (1960 ई०)

आलबाल (1971 ई०)

लिखी कागद कोरे (1972 ई०)

अद्दतन (1977 ई०)

जोग लिखी (1977 ई०)

स्त्रोत और सेतु (1978 ई०)

युग संधियों पर (1982 ई०)

धार और किनारे (1982 ई०)

कहाँ है द्वारिका (1982 ई०)

छाया का जंगल (1984 ई०)

स्मृतिछंदा (1989 ई०)

रामविलास शर्मा (1912 – 2000 ई०)

जन्म: 10 औक्तुबर (1912 ई०) उन्नाव जिला (उ.प्र.)

निधन: 30 मई (2000 ई०)

रामविलास शर्मा के महत्वपूर्ण निबंध संग्रह:

प्रगति और परंपरा (1949 ई०)

साहित्य और संस्कृति (1949 ई०)

भाषा साहित्य और संस्कृति (1954 ई०)

प्रगतिशील साहित्य की समस्याएँ (1954 ई०)

लोक जीवन और साहित्य (1955 ई०) 

स्वाधीनता और राष्ट्रीय साहित्य (1956 ई०)

विराम चिह्न (1957 ई०) 

परम्परा का मूल्यांकन (1981 ई०)

भाषा युग- बोध और कविता (1981ई०)

कथा विवेचन और गद्य-शिल्प (1982ई०)

आस्था और सौंदर्य (1961ई०)

साहित्य- स्थाई मूल्य और मूल्यांकन (1968 ई०)

परम्परा का मूल्यांकन (1981 ई०)

भाषा युग- बोध और कविता (1981ई०)

कथा विवेचन और गद्य-शिल्प (1982ई०) भारतेंदु युग और हिन्दी भाषा की विकास परंपरा (1985ई०)

1 thought on “हिन्दी साहित्य की गद्य विधा ‘निबंध’ (इकाई-2)”

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