हरिवंशराय राय ‘बच्चन’

हरिवंशराय ‘बच्चन’ हिन्दी कविता के उत्तर छायावादी युग के प्रमुख कवि थे। पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव और माता सरस्वती देवी थी। बाल्यावस्था से ही इन्हें ‘बच्चन’ के नाम पुकारा जाता था।  

जन्म: 27 नवंबर 1909 ई० इलाहबाद (उत्तर प्रदेश)

निधन: 18 जनवरी 2003 ई०

सन् 1926 ई० में इनका विवाह श्यामादेवी के साथ हुआ था। 1936 ई० में श्यामा बच्चन की टी बी बिमारी के कारण मृत्यु ही गई।

पाँच वर्ष बाद 1941 ई० में इन्होने दूसरा विवाह तेजी बच्चन से किया जो रंगमंच तथा गायन से जुड़ीं थी।

इन्होने कैम्बिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य के विख्यात कवि डब्लू० बी० ‘यीट्स’ की कविताओं पर शोध किया था।

हिन्दी साहित्य में ‘हालावाद’ के कवि माने जाते है।

उपनाम: प्रबंध शिरोमणि, क्षयी रोमांस का कवि, आत्मानुभूति का कवि, प्रेम व रोमांस का कवि और मस्ती का कवि भी कहा जाता है।

इन्होने अपनी आजीविका 1932 ई० में ‘पायोनियर’ के संवाददाता के रूप में शुरू किया। यही से उनका रुझान कविता की तरफ हुआ।

महत्वपूर्ण रचनाएँ:

तेरा हार (1932 ई०)

मधुशाला (1935 ई०)

मधुबाला (1936 ई०)

मधुकलश (1937 ई०)

निशा निमंत्रण (1938 ई०)

एकांत संगीत (1939 ई०) इस रचना के कारण उन्हें क्षयी रोमांश का कवि कहा जाने लगा।

आकुल अंतर (1943 ई०)

सतरंगिनी (1945ई०)

बंगाल का आकाल (1946 ई०)

हलाहल (1946 ई०)

सूत की माला (1948 ई०) खादी के फूल (1948 ई०) ये दोनों रचनाएँ महात्मा गाँधी पर आधारित थे। खादी के फूल रचना इन्होंने पंत जी के साथ मिलकर लिखा था।

मिलन यामिनी (1950 ई०)

आरती और अंगारे (1954 ई०)

प्रणय पत्रिका (1955 ई०) इसकी रचना तुलसीदास जी की विनयपत्रिका के आधार पर हुई थी। 

बुद्ध और नाचघर (1958 ई०) ये रचना मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित है। इसमें समाज के बुराइयों के प्रति आक्रोस का स्वर व्यक्त हुआ है।

त्रिभंगिमा (1961 ई०) यह प्रगतिवादी रचना है।  

चार खेमे चौंसठ खूंटे (1962 ई०) इस रचना में लोक धुनों का प्रयोग हुआ है।

धार के इधर-उधर (1964 ई०)

दो चट्टानें (1966 ई०) इस रचना के लिए 1968 ई० ‘साहित्य अकादमी’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सोड्हम हंस (1981 ई०) यह बच्चन जी की अंतिम रचना थी। इस रचना में दार्शनिक सिधान्तों का वर्णन है

इन्होने अपनी आत्मकथा चार भागों में (पद्य) में लिखा:

क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969 ई०)

नीड़ का निर्माण फिर (1964 ई०)

बसेरे से दूर (1977 ई०)

दसद्वार से सोपान तक (1985 ई०)

सन् 1966 ई० में इन्हें राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया गया था।

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