वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न Pronunciation effort and its Classification (भाग – 2 : प्रयत्न)

श्वास (प्राण-वायु) की मात्रा के आधार पर वर्ण-भेद:    स्वर- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ (11) अयोगवाह- अं और आ: दो अयोगवाह है। व्यंजन- ‘क’ वर्ग-  क, ख, ग, घ, ङ ‘च’ वर्ग-  च, छ, ज, झ, ञ ‘ट’ वर्ग-  ट, ठ, ड, ढ, ण ‘त’ वर्ग-  त, थ, द,… Continue reading वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न Pronunciation effort and its Classification (भाग – 2 : प्रयत्न)

वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न (भाग–1: उच्चारण स्थान) (Pronunciation effort and its Classification: Part-1)

उच्चारण स्थान- किसी वर्ण का उच्चारण करते समय अन्दर से आने वाला श्वास वायु जिस स्थान पर आकर रूकती है या जहाँ पर बिना रोके उसके निकलने का मार्ग बनाया जाता है। वही उस वर्ण का उच्चरण स्थान कहलाता है। लक्षण- किसी भी वर्ण को बोलते समय वायु तथा जिह्वा मुख के जिस-जिस भाग को… Continue reading वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न (भाग–1: उच्चारण स्थान) (Pronunciation effort and its Classification: Part-1)

भोलेनाथ का प्रसाद (कहानी)

सावन का महीन था। एक पति-पत्नी करीब दस बारह वर्षों से बाबा धाम सावन के महीने में शंकर भगवान जी को जल चढ़ाने जाया करते थे। किसी ने उन्हें कहा था कि बाबा भोले सबकी मनोकामना पूरी करते हैं। आपकी मनोकामना भी भगवान जरुर पूरी करेंगे। शादी के कई वर्षों बाद भी उन दोनों को… Continue reading भोलेनाथ का प्रसाद (कहानी)

शब्द-भेद (Parts Of Speech)

विकार की दृष्टि से शब्दों के भेद विकार की दृष्टि से शब्दों के दो भेद होते हैं - (अ) विकारी शब्द और (आ) अविकारी शब्द (अ) विकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। (आ) अविकारी शब्द के भी चार प्रकार होते हैं- क्रिया विशेषण, सम्बन्ध बोधक, समुच्चय बोधक और विस्मयादि… Continue reading शब्द-भेद (Parts Of Speech)

क्रिया और उसके भेद

क्रिया की परिभाषा- जिस शब्द से किसी कार्य का करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- खाना, पढ़ना, लिखना, चलना, सोना आदि। क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका  रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहता है। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं, अर्थात जिन मूल अक्षरों… Continue reading क्रिया और उसके भेद

वचन

वचन- ‘वचन’ का शाब्दिक अर्थ होता है ‘संख्या’। वचन का अर्थ ‘कहना’ भी होता है। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते है। जैसे- शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही है। माली पौधों को सींच रहा है। तालाब में बच्चे स्नान कर रहे हैं। टोकरी में… Continue reading वचन