वक्त (कविता)

वक्त वक्त की बात है भईया

वक्त बड़ा ही है बलवान ।

 

वक्त के आगे सब कोई हारा

दुर्बल हो या हो पहलवान।

वक्त बदलता रहता सबका

गरीब हो या हो धनवान ।

वक्त वक्त पर भारी है अब

वक्त बड़ा ही है बलवान।।

 

बदला वक्त जब हरिश्चन्द्र का

पहुँचा दिया उनको श्मशान।

बदला वक्त जब रामचन्द्र का

जंगल-जंगल भटके भगवान।

वक्त-वक्त पर भारी है अब

वक्त बड़ा ही है बलवान।।

 

वक्त के चक्र को टाल सके ना

इस धरती पर कोई इन्सान।

घर के अन्दर बंद हैं हम सब

महामारी से हैं परेशान ।

वक्त-वक्त पर भारी है अब

वक्त बड़ा ही है बलवान।।

 

रुपया पैसा काम न आवे

वक्त की अब करो पहचान।

आत्म संयम और समाज से दूरी

इसमें ही है सबका कल्याण ।

वक्त-वक्त पर भारी है अब

वक्त बड़ा ही है बलवान।।

 

समय से यदि मिल जाये भोजन

समझलो की अब बच गई जान ।

‘कोरोना’ ने दिया है मौका

अपने अपनों को पहचान ।

वक्त-वक्त पर भारी है अब

वक्त बड़ा ही है बलवान।।

 

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