गुरु भक्त ‘आरुणि’ और ‘उपमन्यु’

“गुरु वही श्रेष्ठ है जिसकी प्रेरणा से शिष्य का चरित्र बदल जाए” गुरुभक्त आरुणि- पुराने समय में गुरु धौम्य के आश्रम में कई छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आश्रम में रहते थे। कुलीन राजघरानों और ब्राहमणों के पुत्र भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुल और आश्रमों में एक साथ रहा करते थे। गुरु… Continue reading गुरु भक्त ‘आरुणि’ और ‘उपमन्यु’

माँ की भूमिका

‘माँ’ शब्द की कोई परिभाषा नहीं होती यह शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। असहनीय शारीरिक पीड़ा के पश्चात् बच्चे को जन्म देने वाली माँ को भागवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि ‘माँ’ जननी है। भागवान ने माँ के द्वारा ही सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की है। माता-पिता बनना मनुष्य के जीवन का सबसे… Continue reading माँ की भूमिका

करोना (कविता)

प्रातःकाल का दृश्य देख आज आखों ने मन को समझाया।   देख मानव ! दशा तू अपनी पशु-पंछी उन्मुक्त है जानवर पर तू फँसा है, जाल में अपनी तेरी कैसी यह है लाचारी अजब यह मनहूस घड़ी ।   प्रकृति ने छेड़ी  है जंग चारों ओर हाहाकार मची है। घर के बाहर डर ही डर… Continue reading करोना (कविता)

शब्दों का वर्गीकरण

1. शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया गया है- स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण-स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों के चार भेद होते हैं। तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज और संकर (क) तत्सम- ‘तत्सम’ का अर्थ होता है उसके समान यानि ज्यों का त्यों। हिन्दी भाषा में शब्दों का मूल… Continue reading शब्दों का वर्गीकरण

संत रविदास जी की पोथी

आज संत रविदास जी की इस पोथी’ को पढ़ने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है कि जैसे हमारे भारत के संत और महात्मा भविष्य में होने वाली हर घटनाओं से परिचित थे। आज जो हो रहा है उसका वर्णन संत रविदास जी ने अपने इस कविता में पहले ही लिख चुके थे। धन्य थे… Continue reading संत रविदास जी की पोथी

खिलाड़ी अवुमनिया

(महिला खिलाड़ी) "न तो हारना जरुरी है, न तो जितना जरुरी है,जीवन एक खेल है, सिर्फ खेलना जरुरी है।" किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और मजबूत इक्षा शक्ति का होना आवश्यक है। नाम, प्रसिद्धि, धन आदि आसानी से प्राप्त नहीं होता है। सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य,… Continue reading खिलाड़ी अवुमनिया

‘शब्द’ और ‘पद’

शब्द की परिभाषा- एक या एक से अधिक वर्णों के मेल से बने सार्थक समूह को ‘शब्द’ कहते हैं। या वर्णों का ऐसा सार्थक समूह जिसका कोई अर्थ हो उसे ‘शब्द’ कहते है। शब्द के दो प्रकार होते है- 1. सार्थक शब्द और 2. निरर्थक शब्द सार्थक शब्द- वे शब्द जिनसे किसी अर्थ का बोध… Continue reading ‘शब्द’ और ‘पद’

वर्दी (कविता)

वर्दी के है विभिन्न प्रकार,सब वर्दियों की अपनी शान। अनेक रंगों कि वर्दी हमारी,विभिन्न रुपों में बदली हैं। वर्दी की है शान निरालीजो पहने उसकी बढ़ती मान। कुछ वर्दी पहन इतराते हैं,कुछ वर्दी पहन लोगों को डरातें हैं। कुछ लोग इसे इज्जत दिलवाते,कुछ लोग कलंकित कर देते हैं। कुछ लोग पहन करते जनता पर राज,कुछ… Continue reading वर्दी (कविता)

पर्यावरण (कविता)

आज देश की मांग यही है, पर्यावरण को हमें बचाना है।जल, वायु, मिट्टी और ध्वनि से रिश्ता हमारा पुराना है ।इन सबसे नेहा लगा कर, इनको मित्र बनाना है।आज देश की मांग यही है, पर्यावरण को हमें बचाना है। जब तक जग में पानी है, तब तक जग में जीवन है ।जब तक अनल में… Continue reading पर्यावरण (कविता)

हिंदी वर्णमाला

हिंदी वर्णमाला के दो प्रकार हैं- 1. स्वर और 2. व्यंजन स्वर की परिभाषा- स्वर वे अक्षर है जिसे बोलने के लिए किसी और ध्वनि की मदद नहीं लेनी पड़ती है। अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ – (11) अं अः अयोगवाह है – (अं) को अनुस्वार और (अः) विसर्ग कहते… Continue reading हिंदी वर्णमाला