हे! पुरुष (कविता)

हमारे समाज में ज्यादातर कवि, लेखक और गीतकारों ने सिर्फ नारियों के ही गुणों का बखान अपने कविताओं, गीतों और कहानियों में किया है, जबकि पुरुष के बिना समाज की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती है। पुरुष के बिना घर परिवार सुना-सुना रहता है। पुरुष घर, परिवार और समाज के शान और सरताज होते… Continue reading हे! पुरुष (कविता)

लौट जायेंगे हम (कविता)

जी को उदास न कीजिए, जी भर के जीना सीखिए। छोड़िये उलहना देना औरों को, बस धन्यवाद करना दीजिए। गुजरिए जिन रास्तों से होकर, प्यारा सा संदेश दीजिए। देख कर हर जन-जन को, जरा सा मुस्करा दीजिए। उम्र का हर दौड़ बेहतरीन है, हर उम्र का स्वाद लीजिये। लौट जायेंगे हम सब एक दिन, हर… Continue reading लौट जायेंगे हम (कविता)

श्रापित रावण

रावण अपने पूर्वजन्म में भगवान विष्णु के द्वारपाल थे। एक श्राप के चलते उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ा था। एक पौराणिक कथा के अनुसार- सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार ये चारों ‘सनकादिक’ ऋषि कहलाते थे और देवताओं के पूर्वज माने जाते थे। एक बार ये चारों ऋषि सम्पूर्ण लोकों से दूर… Continue reading श्रापित रावण

स्मृति (कविता)

निकली थी घर से अकेले, जीने को जिंदगी लेकिन आपकी यादें, और याद आने लगी । मन से आपकी स्मृति, कभी निकलती नहीं सुगंध आपके एहसास की, कभी कम होती नहीं । बरसों बीत गए आपके साथ रहकर, एक ही घर में उन यादों की प्रतिबिम्ब, नयनों से ओझल होती नहीं । हुलस कर लिखती… Continue reading स्मृति (कविता)