नल और दमयंती (पौराणिक प्रेम कथा)

भारत के महाकाव्य ‘महाभारत’ से जुड़ा हुआ यह कहानी है। युधिष्टिर जुए में अपना सब कुछ हार कर अपने भाइयों के साथ वनवास जा रहे थे। उसी वन में एक ऋषि ने उन्हें ‘नल’ और ‘दमयंती’ की कथा सुनाई थी। ‘नल’ निषध देश के राजा वीरसेन के पुत्र थे। नल बड़े ही वीर, साहसी, गुणवान… Continue reading नल और दमयंती (पौराणिक प्रेम कथा)

पुरबी के जनक ‘महेद्र मिश्र’

भोजपुरी भाषा के लोकगायकी में जब भी किसी शख्सियत की बात होती है तो लोग बड़े ही गर्व से भिखारी ठाकुर का नाम लेते हैं, जबकि भोजपुरी के भारतेंदु कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिश्र दोनों ही समकालीन थे। महेंद्र मिश्र बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लोक गीतकरों में सर्वोपरि थे। वे लोकगीत… Continue reading पुरबी के जनक ‘महेद्र मिश्र’

उषा और अनिरुद्ध (अनोखी प्रेम कथा)

‘उषा’ बाणासुर की पुत्री थी और ‘अनिरुद्ध’ श्री कृष्ण भगवान के पौत्र। बाणासुर की पुत्री उषा परम सुंदरी थी। अनिरुद्ध भी कामदेव से सामान सुन्दर थे। उषा ने अनिरुद्ध के सुन्दरता और बल की चर्चा सुनी थी, लेकिन देखा नहीं था। एक दिन उषा गहरी नींद में सो रही थी। सपने में एक सुन्दर राजकुमार… Continue reading उषा और अनिरुद्ध (अनोखी प्रेम कथा)

रीतिकालीन कवि: घनानंद

रीतिकाल में प्रमुख तीन काव्य धाराएँ थी- रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त। कवि घनानंद रीतिमुक्त काव्यधारा के अग्रणी कवि थे। कवि के व्यक्तित्व और कृतित्व की रचना उनके कवित्व ने स्वयं ही की है- “लोग हैं लागि कवित्त बनावत, मोहे तौ मेरे कवित्त बनावत” अनुमान से इनका जन्म का समय संवत् 1730 के आसपास माना जाता… Continue reading रीतिकालीन कवि: घनानंद

घूंघरू (कविता)

मैं घूंघरू हूँ ! अजीब है जिंदगी मेरी, कभी पैरों की शोभा बढ़ाती हूँ मैं । जिस पग में बांधी जाती हूँ नाम वही पा जाती हूँ, मैं घूंघरू हूँ ! अजीब है जिंदगी मेरी। मैं कभी मंदिरों में बजती हूँ, कभी महफिल में बजाई जाती हूँ। कभी तोड़ी जाती हूँ। कभी टूट के बिखर… Continue reading घूंघरू (कविता)

हम हंसना भूल गए (कविता)

अपने आप में इतना उलझ गए हैं, कि   हम हंसना भूल गए हैं। दूसरों को सुखी देखकर, अपने सुख को भूल गए हैं। इसलिए हम हंसना भूल गए हैं। दूसरे की बुराई देखने में, अपनी बुराई भूल गए हैं । इसलिए हम हँसना भूल गए हैं । मोबाईल में समय गवांकर, अपनों से दूर हो… Continue reading हम हंसना भूल गए (कविता)

राजपूत

जावेद अख्तर साहब जो एक कवि, हिंदी फिल्मों के गीतकार और पटकथा लेखक हैं उन्होंने ट्वीटर पर ट्विट किया था कि “राजपूत बहुत कमजोर थे”। फ़िल्म ‘पद्मावती’ पर जावेद अख्तर” ने ऐसा कहा था कि राजपूत रजवाड़े अंग्रेजों से तो लड़े नहीं, अब सड़कों पर आ रहे हैं। ये सब उनके अपने विचार और सोंच… Continue reading राजपूत

भविष्य के सपने (लघु कथा)

एक दिन हिन्दी की एक शिक्षिका दशवीं कक्षा में हिन्दी पढ़ा रही थी। आने वाले कुछ महीनों बाद वार्षिक परीक्षा होने वाली थी। पाठ समाप्त करने के पश्चात् शिक्षिका ने बच्चों से पूछा कि आप सब बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? एक बच्चे ने कहा, बड़ा होकर मैं डॉक्टर बनना चाहता हूँ। दूसरे ने… Continue reading भविष्य के सपने (लघु कथा)