ऋतु बसंत (कविता)

आया बसंत, आया ऋतुराज, भू पर लाया खुशियों का सौगात। बाग-बगीचे हुए खुशहाल, खेतों में फूले सरसों भरमार। आम के पेड़ों पर लदे मोजरें, झूम के गाये प्यारी कोयल। पीली सरसों हवा में झूमे, झूम-झूम के गीत सुनाये।   अलसी खेतों में डोल रही है, डोल-डोल कुछ बोल रही है।   रंग-बिरंगी धरा हो रही,… Continue reading ऋतु बसंत (कविता)

संगाई (भू-श्रंगी हिरण)

संगाईयह भारत के मणिपुर में पाया जाने वाला एक मृग-हिरण है। यह हिरण केवल मणिपुर में ही पाया जाता है। यह मणिपुर का ‘राज्य पशु’ भी है। पहले यह हिरन पूरे मणिपुर में पाया जाता था परन्तु अब सिर्फ ‘केईबुल लम्जाओं राष्ट्रीय उधान’ में ही दिखाई देता है। केईबुल लम्जाओं राष्ट्रीय उधान विश्व का एकमात्र… Continue reading संगाई (भू-श्रंगी हिरण)

ब्रह्म बाबा (बुजुर्ग बरगद)

हमारे गाँव में सड़क के किनारे एक विशाल बरगद का पेड़ है। यह विशालकाय बरगद चारों तरफ से लगभग 2 एकड़ में फैला हुआ है। इसकी लम्बी-लम्बी सुन्दर जटाएं, उभरी हुई जड़ें और तने देखकर मन खुश हो जाता है। गाँव के सब लोग कहते हैं कि यह बरगद का पेड़ बहुत ही पुराना है।… Continue reading ब्रह्म बाबा (बुजुर्ग बरगद)

हनुमान जी की आरती

।।श्री हनुमंत स्तुति।। मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।। वातात्मजं वानरयुथ   मुख्यं, श्रीरामदुतं  शरणम प्रपद्धे ।। हनुमान जी की आरती आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट  दलन  रघुनाथ कला की ।।टेक।। जाके   बल  से गिरिवर काँपै। रोग-दोष जाके निकट न झांपै  ।।१।। अंजनि    पुत्र  महा बलदायी। संतान  के  प्रभु  सदा  सहाई ।।२।। दे  बीरा… Continue reading हनुमान जी की आरती

विक्रमादित्य के नवरत्न

विश्वविजेता चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे। वे अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। विक्रमादित्य के काल को ‘कला और साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता था। राजा विक्रमादित्य का नाम- 'विक्रम' और 'आदित्य' के समास से बना है जिसका अर्थ होता है- 'सूर्य के समान पराक्रमी'। ‘भविष्य पुराण’ व ‘आईने अकबरी’ के अनुसार विक्रमादित्य… Continue reading विक्रमादित्य के नवरत्न

पंडिताईन

सब कहते हैं कि जोड़ियाँ भगवान के घर से ही बन कर आती है। पता नहीं यह कहाँ तक सत्य है। कुछ कहना बड़ा ही मुश्किल है। सच में कुछ जोड़ियों को देखकर लगता है कि सच में इस जोड़ी को भगवान ने बहुत फुर्सत में बनाया होगा और कुछ को देखकर ऐसा लगता है… Continue reading पंडिताईन

लुप्त विराशत (भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय)

वैदिक काल से ही भारतवर्ष में शिक्षा एवं शिक्षण को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। मनुष्य के सर्वांगीन विकास के लिए शिक्षा अति आवश्यक है। भारतवर्ष में गुरु का महत्व माता-पिता से भी बढ़कर माना गया है- इसलिए भारत को विश्व गुरु का दर्जा भी दिया जाता है। जिस काल में विश्व के सभी… Continue reading लुप्त विराशत (भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय)