संत कबीर

“माटी  का  एक  नाग  बनाके, पुजे  लोग लुगाई! जिंदा नाग जब घर में निकले, ले लाठी धमकाई”!! संत कबीर दास जी कवि और समाज-सुधारक थे। कबीर दास जी सिकंदर लोदी के समकालीन थे। ‘कबीर’ का अर्थ अरबी भाषा में ‘महान’ होता है। कबीर भारतीय हिन्दी साहित्य के भक्ति कालीन काव्य परम्परा के महानतम कवियों में… Continue reading संत कबीर

धाय माँ (कहानी)

चितौड़गढ़ को शुरवीरों का शहर कहा जाता है। यह मेवाड़ की राजधानी भी रहा है। चितौड़गढ़ वह वीर भूमि है, जिसने समूचे भारत में शौर्य, देशभक्ति और बलिदान का अनूठा उदहारण प्रस्तुत किया है। चितौड़गढ़ के इतिहास में जहाँ पद्मिनी के जौहर की अमर गाथायें, मीरा बाई की भक्ति और माधुर्य प्रेम की कहानी है,… Continue reading धाय माँ (कहानी)

कवि ‘घाघ’ की कहावतें

भारत कृषि प्रधान देश है। हमारे देश की कृषि का मुख्य आधार ऋतुएँ हैं। अच्छी वर्षा होगी तभी अन्न का उपज भरपूर होगा, अतः इसका ज्ञान होना कृषि के लिए अनिवार्य है। हमारे किसानों को इन सब बातों की जानकारी नहीं थी। उन्हें इस बात का पता नहीं होता था कि  वर्षा कब होगी, कितना… Continue reading कवि ‘घाघ’ की कहावतें

हिंदी के लोक महाकवि घाघ

लगभग सन् 1700 ई० के आस-पास हिंदी कविता में एक नया मोड़ आया। जिसे रीतिकल के नाम से जाना जाता है। इस काल के कवि, राजाओं और रईसों के आश्रय में रहते थे। मध्यकाल के अन्य कवियों की ही तरह उत्तर भारत में एक प्रसिद्ध कवि थे, जिन्हें महाकवि ‘घाघ’ के नाम से जाना जाता… Continue reading हिंदी के लोक महाकवि घाघ

गौरइया का संघर्ष (बाल साहित्य)

बचपन में हम संयुक्त परिवार में रहा करते थे। उस समय हम दादी-नानी से रोज कहानियाँ सुना करते थे। आज का समय एकल परिवार का हो गया है। अब ज्यादातर परिवार के साथ दादा–दादी या नाना-नानी नहीं रहते हैं और न ही उनकी कहानियाँ होती है। आज मुझे एक कहानी याद आई जिसे हमारी दादी… Continue reading गौरइया का संघर्ष (बाल साहित्य)

बिहारी सतसई

हिन्दी साहित्य के महाकवि बिहारी रीतिकालीन, रीतिसिद्ध काव्यधारा के श्रेष्ठ कवि थे। बिहारीलाल का जन्म सन् 1603 ई० के लगभग ग्वालियर के पास बसवा गोविंदपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवराय था। वे संस्कृत के विद्वान थे। बिहारीलाल माथुर चौबे थे। इस दोहे में उनके बाल्यकाल और यौवनकाल का प्रमाण मिलता है-… Continue reading बिहारी सतसई