कवि भूषण

हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल के उपरांत कविता में एक नया युग प्रारम्भ हुआ जिसे  रीतिकाल के नाम से जाना जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रीतिकाल का आरम्भ सन् 1700 ई० से सन् 1900 ई० तक माना जाता है। भूषण का जन्म संवत् 1670 में कानपुर जिले के तिकवापुर ग्राम में हुआ था। उनके… Continue reading कवि भूषण

वर्दी (कविता)

वर्दी के है अनेक प्रकार, वर्दी की है अपनी शान। अनेक रंगों की है ये वर्दी । जो पहने उसकी बढ़ती मान। कुछ वर्दी पहन इतराते हैं   कुछ वर्दी पहन लोगों को डराते हैं। कुछ लोग वर्दी की रखते लाज, कुछ लोग वर्दी की लाज गंवाते हैं। कुछ लोग वर्दी को इजज्त दिलवाते हैं… Continue reading वर्दी (कविता)

भारत में किसानों की स्थिति

हो जाए अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहाँ                   खाते,  खवाई,  बीज  ऋण  से  हैं  रंगे रक्खे जहाँ                   आता  महाजन  के  यहाँ  वह  अन्न सारा अंत में                   अधपेट   खाकर   फिर  उन्हें  काँपना  हेमंत   में – मैथिलीशरण गुप्त     मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियाँ तत्कालीन किसानों की दयनीय दशा का चरित्र-चित्रण करती… Continue reading भारत में किसानों की स्थिति

चिरैया (कविता)

दिल में अरमां आँखों में सपने, बिटिया रानी कुछ सोच रही थी। मैं पूछी, क्या सोच रही हो? फिर वो मुझसे लिपट कर बोली, माँ! क्या मैं उड़ सकती हूँ? चिड़िया जैसी? माँ बोली, हाँ क्यों नहीं? बिटिया रानी कुछ सोच कर बोली, कैसे माँ? माँ बोली! तुम अपने सपनों से प्यार करो। सपनों को… Continue reading चिरैया (कविता)

दुष्यंत और शकुंतला (कहानी)

प्रेम ना बारी उपजै प्रेम ना हाट बिकाय, राजा प्रजा जेहि रुचै, शीश देयी ले जाए। कबीरदास जी कहते है कि प्रेम ना तो खेत में पैदा होता है और ना ही बाजार में बिकता है। राजा हो या प्रजा जो भी चाहे इसे (प्रेम को) अपना सिर झुका कर अथार्त घमंड को छोड़कर प्राप्त… Continue reading दुष्यंत और शकुंतला (कहानी)

सात समन्दर पार (कहानी)

ऐसा लोग कहते हैं कि जोड़ी भगवान के घर से ही बनकर आता है। कहाँ तक सच है? हम सब को पता नहीं। एक मास्टर जी अपने परिवार के साथ शहर में रहने के लिए गए। मास्टर जी की पत्नी एक सुशील और धार्मिक विचार की महिला थी। उनके दो बेटे थे। बड़े का नाम… Continue reading सात समन्दर पार (कहानी)

वो बीते हुए दिन (कहानी)

‘प्रेम’- इस ढाई अक्षर के प्रेम शब्द को परिभाषित करना अत्यंत ही कठिन है। ‘प्रेम’ शब्द का कोई रंग, रूप या आकर नहीं होता है। इसे हम सब भावना के द्वरा ही महसूस करते हैं। प्रेम को ‘रूप’ और ‘आकर’ हम मनुष्य ही दे सकते हैं जैसे माँ-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, चाचा-चाची, प्रेमी-प्रेमिका के प्रेम सम्बन्ध… Continue reading वो बीते हुए दिन (कहानी)

गुजरी महल (कहानी)

भारत के इतिहास में कई सफल और असफल प्रेमी-प्रेमिकाओं की प्रेम कहानियाँ है जिसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। ये प्रेम कहानियाँ सुनने में परिलोक की कथा जैसी लगती हैं। जिसमे सिर्फ सुख ही सुख होता हो दुख तो कभी आता ही नहीं है। ये प्रेम कहानियाँ इतनी आसान और इतनी सरल नहीं… Continue reading गुजरी महल (कहानी)

भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा

भारत एक प्राचीन देश है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह विभिन्ताओं में एकता का देश है। भारत में विभिन्नता का रूप केवल भौगोलिक ही नहीं बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है। देश और काल के अनुसार भाषा अनेक रूपों में बटी है। यही कारण है कि भारत में अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। हर… Continue reading भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा

तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’

हम सभी जानते हैं कि भारत का महान मुग़ल शासक अकबर था। अकबर स्वयं तो अधिक पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन वह बुद्धिजीवियों का बहुत प्रेमी था। कहा जाता है कि अकबर के दरबार में नौ गुणवान दरबारी थे। ये सभी नवरत्न अपने-अपने क्षेत्र में प्रवीण विद्वान थे। इन्हें नवरत्न के नाम से जाना जाता… Continue reading तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’