ठूँठ (कविता)

हरी भरी वसुंधरा पर, था खड़ा, एक ठूँठ वृक्ष कभी वो खुद को निहारता, कभी दिशाओं को देखता पुष्पहीन, पत्रहीन, असहाय सा था खड़ा ना वसेरा चिडियों का, ना लोगों के लिए ठिकाना जब थी मैं हरी भरी और खुशहाल पक्षियों के कलरव से गूंजती थी डाल-डाल पथिकों का होता था बैठक यहाँ लेकिन चुप… Continue reading ठूँठ (कविता)

हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व

जन जन की है भाषा हिन्दी, जन समूह की जिज्ञासा हिन्दी । जन जन में रची बसी है, जन मन की  अभिलाषा  हिन्दी ।। वैश्विकरण का शाब्दिक अर्थ होता है किसी भी स्थानीय या क्षेत्रीय वस्तुओं का विश्व स्तर पर रूपांतर होना, 21वीं शताब्दी को अगर वैश्विकरण की शदी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।… Continue reading हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व

हिन्दी साहित्य के मुस्लिम लेखक : गंगा जमुनी तहज़ीब (रसखान)

हिन्दी साहित्य के इतिहास में आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक अनेकों मुसलमान लेखकों ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में विशेष भूमिका निभाई है। उसीप्रकार कई हिन्दू रचनाकारों ने भी उर्दू साहित्य को समृद्ध करने का काम किया है। हिन्दी साहित्य के रीतिकाल में रीतिमुक्त धारा के कविओं में रसखान का महत्वपूर्ण स्थान है।… Continue reading हिन्दी साहित्य के मुस्लिम लेखक : गंगा जमुनी तहज़ीब (रसखान)

पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी

भाषा का कोई रंग, रूप, जाति या आकार नहीं होता है। इसे तो सिर्फ सुनकर महसूस किया जाता है। हमारी  हिन्दी का तो कुछ कहना ही नहीं इसकी शब्दों में इतनी मिठास है कि विश्व का हर व्यक्ति इसे सीखना और बोलना चाहता है। कुछ लोग तो हिन्दी सीखकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं।… Continue reading पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी

बेटा बचाओ, देश बचाओ

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी जी ने राजस्थान के झुंझुनू से एक योजना को पुरे देश में लागू किए थे । जिसका नाम था ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’। यह योजना आज पूरे भारत में एक आन्दोलन की तरह फैल गया है। सभी लोग, मीडिया, सिनेमा, टीवी चैनल वाले सभी पूरे जोश के… Continue reading बेटा बचाओ, देश बचाओ

हत्यारिन राजनीति (कविता)

हे! मानव तुमने ये क्या कर दिया? मैं क्या थी और तुमने मुझे क्या बना दिया? खुद को संवारने के लिए मुझे दाग-दाग कर दिया। मैं तो रानी थी राजाओं के नीतियों की तुमने मुझे हत्यारिन बना दिया। मुझे तो मेरे पूर्वजों ने इजज्त और सम्मान दिया लेकिन तुमने मुझे कलंकित कर दिया। थी मैं… Continue reading हत्यारिन राजनीति (कविता)

एक निवेदन पत्र किन्नर गुरुओं के नाम

सेवा में, किन्नर गुरु                                                                                                 12.01.19 महोदय/महोदया, मेरा शत्-शत् प्रणाम माता-पिता भारतीय संस्कृति के दो ध्रुव है। जब ये दोनों मिलकर तीसरे की कामना करते है तो उनके दिल में बहुत सारे अरमान होते हैं। इसके साथ ही वे उसकी… Continue reading एक निवेदन पत्र किन्नर गुरुओं के नाम

किन्नरों का इतिहास वर्तमान और भविष्य

“वाह  रे ! कुदरत  तेरी  कैसी  खेल  निराली, एक का घर भर दिया, दुसरे की झोली भी खाली । जिसको  दिया  आधा, दिल का  है वह राजा, फिर भी  घर-घर  घूमकर, बजाता  है  बाजा । वे  अपनी  पहचान  को   भी  हैं     तरसते, फिर भी, उनकी दुआओं से हैं दुसरों के घर सजते ।”   ये… Continue reading किन्नरों का इतिहास वर्तमान और भविष्य

मन्नू भण्डारी की कहानियों में यथार्थ बोध

हिन्दी साहित्य की विधाएँ: हिन्दी साहित्य की मुख्य तीन विधाएँ हैं – काव्य         2. गद्द      3. चम्पू काव्य। गद्द साहित्य के अंतर्गत – कहानी, जीवनी, आत्मकथा, नाटक, एकांकी, निबंध आदि अनेक विधाएँ हैं। गद्द की सभी विधाओं में कहानी की विधा सबसे पुरानी मानी जाती है। कहानी का आरम्भ कब और कहाँ हुआ यह बताना कठिन है। पुराणों… Continue reading मन्नू भण्डारी की कहानियों में यथार्थ बोध

मकर संक्रांति

चला भास्कर मकर से मिलने धनु राशि को छोड़।नई वर्ष की नई उमंगे जन-जीवन में जोड़ ।। तील-तील बड़ा होने लगा दिन और रातें तील-तील छोटी।सर्दी की अब हुई बिदाई गर्मी की स्वागत होती ।। गंगा स्नान और दान-पुण्य कर दही चिवड़ा खाते।आसमान में पतंगों का मेला लोग लगाते ।। भारत त्यौहारों का देश है।… Continue reading मकर संक्रांति