पिता की परिवार में भूमिका

हम सभी हमारे जीवन में हर चीज की परिभाषा लिखते और पढ़ते हैं । ये परिभाषाएँ तथ्य पर आधारित होती हैं लेकिन हमारा भारतवर्ष ही एक ऐसा देश है, जहाँ कुछ परिभाषाएँ भावनाओं से बनती हैं जैसे- प्यार, लगाव और भावनाओं की परिभाषाएँ आदि । आज ऐसी ही परिभाषा हम लिखने की कोशिश करने जा… Continue reading पिता की परिवार में भूमिका

परिवार का बदलता स्वरूप

साधारण बोल - चाल की भाषा में संस्कार का अर्थ होता है शुद्धिकरण। संस्कार के दो रूप है -आतंरिक रूप और बाहरी रूप। बाहरी रूप का नाम रीति-रिवाज है जो हमारी आतंरिक रूप की रक्षा करता है। आतंरिक रूप हमारी जीवन चर्या में शामिल है जो कुछ नियमों पर आधारित होता  है। इन नियमों के पालन में अनुशासन का बहुत महत्व होता है।  अनुशासन और सामाजिक नियमों को सम्मान देकर ही मनुष्य आत्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

आज मुझे राहुल सांस्कृत्यायन की एक पंक्ति याद आ रही है- “भागो नहीं दुनिया को बदलो” ‘ऐ मेरे देश के युवाओं जड़ता तोड़ो आगे आओ, संगठित होकर कदम बढाओ, फिर से मुक्ति मशाल जलाओ । भारत एक विकासशील और विशाल जनसंख्या वाला देश है । संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे बड़ी युवा जनसंख्या वाला देश… Continue reading राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका